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अध्यक्ष, महामंत्री ने नहीं दिया खर्च का हिसाब

Allahabad

Updated Wed, 31 Oct 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में उम्मीदवारों से खर्च का हिसाब लिए जाने की कार्रवाई भी मात्र खानापूर्ति ही बनकर रह गई है। आलम यह है कि मंगलवार को आखिरी तारीख बीत गई लेकिन अध्यक्ष दिनेश सिंह यादव और महामंत्री अभिषेक सिंह माइकल ने भी खर्च का ब्योरा जमा नहीं किया। इनमें से माइकल जेल में हैं। इसको लेकर प्रत्याशी और विश्वविद्यालय प्रशासन कितना गंभीर है इसका अनुमान इससे भी लगाया जा सकता है कि कुल 102 में से 85 प्रत्याशियों ने हिसाब नहीं दिया लेकिन इनके खिलाफ कोई कार्रवाई होगी इसको लेकर अधिकारी पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि उपाध्यक्ष, संयुक्त और सांस्कृतिक मंत्री ने 500 रुपये से कम राशि खर्च करके चुनाव जीत लिया।
प्रत्याशियों को 14 अक्टूबर तक ही चुनाव में हुए खर्च का हिसाब देना था लेकिन तब तक शिक्षक और अफसर ही उलझे रहे कि आखिर हिसाब लेगा कौन। काफी फजीहत के बाद विश्वविद्यालय खुलने पर डीएसडब्ल्यू ने दो दिन का मौका देते हुए उम्मीदवारों से मंगलवार तक ब्योरा देने को कहा लेकिन प्रत्याशी इसके लिए आगे नहीं आए। मात्र 17 उम्मीदवारों ने खर्च का विवरण जमा किया है। इन लोगों ने भी एक सादे कागज पर मात्र यह लिखकर दिया है कि चुनाव में इतना खर्च किया। पैसा कहां और किस मद में खर्च हुआ इसकी डिटेल नहीं है। यानी, यह भी मात्र एक खानापूर्ति जैसा ही है। इसके अलावा हिसाब देने वालों में भी अध्यक्ष पद के प्रत्याशी प्रमोद शर्मा ने सबसे अधिक 3200 रुपये खर्च किए हैं। इनके अलावा किसी ने 200 तो किसी ने इससे भी कम खर्च किया। चुनाव में आचार संहिता की खुलेआम धज्जियां उड़ीं। ऐसे में विश्वविद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों ने ही इस औपचारिकता को हास्यास्पद बताया तथा विश्वविद्यालय की भूमिका पर कई सवाल खड़े किए।
तो अध्यक्ष, महामंत्री पर होगी कार्रवाई
विश्वविद्यालय छात्रसंघ नियमावली में खर्च का हिसाब नहीं देने वाले प्रत्याशियों पर कार्रवाई का प्रावधान है। इसके तहत प्रत्याशियों का अभ्यर्थन भी निरस्त किया जा सकता है। यानी, जीते हुए प्रत्याशी से सर्टिफिकेट वापस लिया जा सकता है। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन अध्यक्ष और महामंत्री समेत 85 लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगा? इस बाबात डीएसडब्ल्यू से संपर्क करने की लगातार कोशिश की गई लेकिन उनका मोबाइल नहीं उठा।
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