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जागा विवि, मांगा चुनाव में खर्च का हिसाब

Allahabad

Updated Sat, 27 Oct 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। एक महीने बाद ही सही इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रसंघ चुनाव में प्रत्याशियों से खर्च का हिसाब मांगने की सुधि आ गई। डीएसडब्ल्यू ने 30 अक्टूबर तक सभी उम्मीदवारों से खर्च का ब्योरा मांगा है। इसके बाद इसे विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर प्रकाशित कर दिया जाएगा। इसके बाद प्रत्याशी आपत्ति भी जता सकेंगे।
विश्वविद्यालय छात्रसंघ नियमावली के अनुसार मतदान के 14 दिन के अंदर सभी प्रत्याशियों को चुनाव खर्च का विवरण सौंप देना चाहिए। इस लिहाज से 13 अक्टूबर तक ही खर्च का हिसाब दे देना चाहिए था लेकिन इसके लिए छात्र नेता तो आगे नहीं ही आए, शिक्षकों और अफसरों के बीच भी विवाद रहा कि हिसाब लेगा कौन। खास यह कि खर्च की अधिकतम सीमा पांच हजार रुपये थी लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं तथा संगठनों ने बेहिसाब पैसे लुटाए। होर्डिंग, बैनर, जुलूस में ही कई प्रत्याशियों ने लाखों रुपये खर्च कर दिए।
इसको लेकर लगातार सवाल उठाए गए। इसके बावजूद खर्च को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन के इस चुप्पी से चौतरफा आवाज उठने लगी है। इसके मद्देनजर डीएसडब्ल्यू को शुक्रवार को विश्वविद्यालय खुलने पर सूचना जारी करनी पड़ी। उम्मीदवारों को 30 अक्टूबर तक डीएसडब्ल्यू कार्यालय में ही खर्च का विवरण जमा करना है। हालांकि 27 और 28 अक्टूबर को विश्वविद्यालय में फिर छुट्टी है। ऐसे में उम्मीदवारों के पास विवरण जमा करने के लिए 29 और 30 अक्टूबर मात्र दो दिन का समय है।
छात्रसंघ चुनाव में प्रचार के दौरान आचार संहिता की लगातार धज्जियां उड़ाई गईं। प्रचार और खर्च को देखकर कई बार लोग धोखा खा जाते कि चुनाव आयोग का डंडा चलने से पहले का लोकसभा और विधानसभा का चुनाव तो नहीं है। सीमा से अधिक खर्च करने वालों में विजयी होने वाले भी दो प्रत्याशी हैं। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन खामोश बना रहा। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि आपत्ति जताने पर क्या विश्वविद्यालय प्रशासन उम्मीदवारों के खिलाफ कार्रवाई की हिम्मत जुटा पाएगा। इसके अलावा एक सवाल यह भी उठ रहा है कि विश्वविद्यालय के नियमानुसार कोई भी प्रत्याशी दोबारा चुनाव नहीं लड़ सकता। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन हारे हुए उम्मीदवारों के खिलाफ कौन से कार्रवाई करेगा।
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