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शहरियों के लिए बीमारी बन गई सड़कें

Allahabad

Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। ऊंची नीची, गड्ढों से भरी बेतरतीब सड़कों से उठ रही धूल इन दिनों शहर के लिए सबसे बड़ी बीमारी बन गई है। दिन भर धूल के गुबार के कारण शहर की सड़कों पर चलने वाले सांस, एलर्जी, माइग्रेन, सिर दर्द के शिकार हो रहे हैं। इन दिनों यानी संक्रमण काल में सड़कों से उड़ यह बीमारी ज्यादा खतरनाक हो गई है। दिन में तेज धूप और रात में सर्दी के कारण लोग सर्दी, जुकाम, बुखार से जूझ ही रहे हैं, धूल ने इसमें कई और बीमारियां जोड़ दी हैं। शहर की जो सड़कें नहीं बनी हैं, वहां तो धूल का गुबार उठ ही रहा है, जहां सड़कों पर डामर पड़ा है, वहां भी दिक्कत कम नहीं है। धोबीघाट चौराहे से आगे सेंट एंथोनी तक सड़क पर डामर पड़ गया है लेकिन उस पर इस कदर धूल उड़ती है कि कई दफे सांस लेना मुश्किल हो जाता है। स्टेनली रोड पर चलना सबसे ज्यादा तकलीफदेह है। पूरी सड़क इस कदर बदतर है कि पूरी तरह स्वस्थ, फिट आदमी भी चार-पांच दिन लगातार उधर से गुजरे तो बीमार पड़ जाए। ट्रैफिक चौराहा से आगे नया पुरा तक सड़क पर केवल धूल का गुबार दिखता है।
धूल ने दे दी गंभीर बीमारियां
गंभीर सिर दर्द, माइग्रेन के अटैक के साथ, आंखों की बीमारी, शरीर में खुजली, दाने, नींद न आना जैसी समस्याएं पिछले कुछ दिनों में तेजी से बढ़ी हैं। सिविल लाइंस, दारागंज, अल्लापुर, राजापुर, बेली, मम्फोर्डगंज, स्टेशन के सामने, नुरुल्ला रोड, करेली यानी हर मोहल्ले में सड़कें धूल से सनी हैं। इन दिनों संक्रमण काल चल रहा है। मौसम बदल रहा है। ऐसे में धूल ज्यादा परेशानी वाली है। शहर के दिल कहे जाने वाले सिविल लाइंस की हर गली धूल से पैक है। नवाब युसुफ रोड से जीटी रोड के बीच हर सड़क पर दिन भर धूल का गुबार रहता है।
फेफड़े में भरी धूल
केस एकऱ् निदेशालय में सीनियर क्लर्क प्रमोद कुमार दुबे दो दिन से नाजरेथ अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें सांस की गंभीर परेशानी है। मंगलवार दोपहर में दफ्तर में ही अचानक सांस फूलने लगी और बेहोश हो गिर पड़े। जांच में सामने आया कि उनके फेफड़े में धूल भर गई है। परेशानी चार-पांच दिन पहले से थी लेकिन वह समझ नहीं सके। समस्या गंभीर होती गई। अब लगातार तीन दिन से सुबह-शाम पांच-पांच मिनट श्वांस नली और फेफड़े में मशीन के जरिए गर्म हवाएं भरी जाती हैं ताकि अंदर जमा धूल साफ हो सके।
केस दोऱ् जीआईसी में शिक्षिका श्वेता नारायण सोमवार को स्कूल में अचेत सी हो गईं। शुरुआती जांच में लगा कि उच्च रक्तचाप का मामला है लेकिन बाद में पता चला कि लगातार धूल भरी सड़क से आते जाते परेशानी हो गई। उन्हें कई दिन से सांस फूलने की शिकायत थी। डॉक्टरों का कहना है कि सांस में दिक्कत के कारण उन्हें गहरी नींद की समस्या थी। नींद न आने से माइग्रेन का अटैक भी पड़ने लगा था।
प्रमोद और श्वेता की तरह कई मरीज हैं जो गड्ढों से भरी सड़कों से उड़ रही धूल के कारण बीमार हैं। रेलवे के ही दस कर्मचारी सांस फूलने की शिकायत लेकर अस्पतालों में भर्ती हैं। उन्हें सांस के लिए कई कई घंटे मशीन का सहारा लेना पड़ रहा है।
धूल से दिल को खतरा
विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ.जितेंद्र प्रकाश के मुताबिक आंख, नाक, कान के सहारे धूल शरीर में भर जाती है। कई दिनों ऐसा हो तो आंखों से नमी कम हो जाती है और सांस भारी सी लगती है। नींद का चक्र पूरा नहीं होता जिससे दिल के लिए खतरा बढ़ जाता है। वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. यतींद्र सिन्हा के मुताबिक वह धूल के कारण गंभीर हुए पांच रोगियों का इलाज कर रहे हैं जिनमें से दो हॉर्ट की तकलीफ की तरफ बढ़ रहे हैं। यह गंभीर संकेत है जिस पर तत्काल ध्यान देना चाहिए।
बदलते मौसम पर रखें नजर
आधी रात के बाद जो लोग चादर ओढ़े बगैर सो रहे हैं, उनके लिए चेतावनी। आधी रात के बाद का पारा सेहत के लिए खतरे की घंटी बजा रहा है। आधी रात बाद दोपहिया सवारों को हवा में सिहरन महसूस होने लगी है। इन दिनों जब बरसात लगभग समाप्त हो चुकी है और सर्दी दस्तक दे रही है, पारे का यह उतार चढ़ाव शरीर को किसी भी क्षण झटका दे सकता है। पारे में दिन भर में 10 डिग्री से अधिक का अंतर आ रहा है जो शरीर के अनुकूल नहीं है। बच्चे और बूढ़े जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कम है, उन पर खास ध्यान देने की जरूरत है। वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. केके वर्मा के मुताबिक शरीर का तापमान बनाए रखने में सबसे अहम भूमिका है पानी की। संक्रमण काल में अन्य दिनों की तुलना में दोगुना पानी पीना चाहिए। तापमान नियंत्रित रखने में गुड़ भी अच्छा और सुरक्षित विकल्प है। गुड़ के अलावा प्याज भी तापमान नियंत्रित करने में सहायक है। फलों में अनार और हरी सब्जियां शरीर को बीमारी से बचाने में राहत दे सकती हैं।
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