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ईंट भट्ठों के लिए बेधड़क खुदाई पर रोक

Allahabad

Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने प्रदेश में पर्यावरण विभाग की मंजूरी के बगैर चल रहे खनन पट्टों के आवंटन और लाइसेंस के नवीनीकरण पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा जारी शासनादेश 22 मार्च 2011 और 10 सितंबर 2012 का अनुपालन करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने जिलाधिकारियों द्वारा ईट भट्ठा मालिकों को खनन के लिए पूर्व में दी गई अनुमति को भी निष्प्रभावी मानने का आदेश दिया है। यह भी कहा है कि इस आदेश का पालन न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सरकार कार्रवाई करे। यह आदेश सोमवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अमिताव लाला और न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल ने सुमित सिंह की जनहित याचिका पर दिया है।
याची के अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी का कहना था कि सुप्रीमकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में पर्यावरण विभाग की मंजूरी प्राप्त किए बिना खनन पट्टे देने और लाइसेंस के नवीनीकरण पर रोक लगाई जाए। उनके मुताबिक सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश होने के बावजूद जिलाधिकारी बागपत ने भट्ठा मालिकों को बिना पर्यावरण मंजूरी के पांच हेक्टेयर से कम भूमि पर खनन करने की अनुमति और खनन लाइसेंस के नवीनीकरण का आदेश पारित कर दिया। प्रदेश सरकार द्वारा बताया गया कि उन्होंने 23 मार्च 2011 और 10 सितंबर 2012 को शासनादेश जारी कर सभी जिलाधिकारियों को सुप्रीमकोर्ट के निर्देश का पालन करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने बिना पर्यावरण मंजूरी के खनन पट्टे देने और नवीनीकरण करने पर रोक लगाते हुए कहा कि यदि जिलाधिकारियों ने पूर्व में राज्य सरकार द्वारा जारी शासनादेशों को नजरअंदाज कर कोई आदेश दिया है तो वह निष्प्रभावी समझा जाएगा। यह भी कहा है कि यदि कोई डीएम इस आदेश की अवहेलना करता है तो सरकार उससे स्पष्टीकरण मांगे तथा अन्य उचित कार्रवाई की जाए।
उल्लेखनीय है कि याची के खेत के चारों ओर की जमीन भट्ठा मालिकों को आवंटित कर दी गई थी। भट्ठा संचालकों ने मिट्टी खोद दी। इसके खिलाफ याचिका दाखिल की गई। याचिका में कहा गया कि सुप्रीमकोर्ट ने निर्देश दिया है कि पर्यावरण मंत्रालय द्वारा खनन केसंबंध में दी गई गाइड लाइन का पालन किया जाए। मंत्रालय द्वारा दी गई संस्तुतियों पर नियम बनाए जाएं। निर्देश के बावजूद जिलाधिकारी बिना पर्यावरण मंजूरी के लाइसेंस दे रहे हैं।
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