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फ्लाईओवर पर डिवाइडर बना तो शहर होगा जाम

Allahabad

Updated Mon, 08 Oct 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। अलोपीबाग फ्लाईओवर प्रशासन के लिए गले की हड्डी बन गया है। फ्लाईओवर तकनीकी तौर पर इतना गलत बना है कि अब उसमें रोज नए संशोधन की बात हो रही है और हर प्रस्ताव उल्टा पड़ रहा है। अफसर भी समझ रहे हैं कि इस फ्लाईओवर पर सेतु निगम ने करोड़ों रुपए सिर्फ बर्बाद किए लेकिन इससे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधरने के बजाय और बिगड़ेगी। फ्लाईओवर पर ट्रैफिक संभालने के लिए एक और ‘लाल बुझक्कड़’ की तर्ज का सुझाव प्रशासन ने दिया है। प्रशासन ने फ्लाईओवर पर ट्रैफिक को संभालने और दुर्घटनाएं रोकने के लिए वहां 50 मीटर की दूरी तक डिवाइडर बनाने का निर्णय लिया है लेकिन अफसरों को इसका अंदाज नहीं कि फ्लाईओवर जितना संकरा है, वहां डिवाइडर बनने के बाद जाम और दुर्घटनाएं दोनों बढ़ने की आशंका है। डिवाडर झूंसी से नैनी की ओर फ्लाईओवर के रास्ते पर बनाया जाएगा। झूंसी से आने वाले वाहन सोहबतियाबाग की तरफ न जा सकें, इसलिए डिवाइडर बनाया जा रहा है लेकिन फ्लाईओवर की सड़क देख कोई भी बता सकता है कि वहां डिवाइडर बना तो इसका केवल नुकसान है। डिवाइडर बनने से फ्लाईओवर पर ट्रकों की लंबी लाइन लगेगी। साथ ही जो गाड़ियां नैनी से आकर फ्लाईओवर पर चढ़ सोहबतियाबाग की तरफ मुड़ेंगी, डिवाइडर बनने के बाद उनकी मुड़ना बेहद कठिन होगा। बल्कि यह कहें कि वहां मोड़ने के फेर में गाड़ियां रोज डिवाइडर या रेलिंग से टकराएंगी।
ट्रकों को मोड़ने में होगी फजीहत
फ्लाईओवर की चौड़ाई तकरीबन 24.60 फुट (7.50) मीटर है। डिवाइडर यदि बहुत पतला बनेगा तो भी एक फुट की जगह घेरेगा। एक तरफ की सड़क की चौड़ाई 11.50 ही रह जाएगी। ऐसे में नैनी की तरफ से आने वाले 22-22 फुट लंबे और नौ से दस फुट चौड़े बड़े ट्रकों को सोहबतियाबाग की तरफ मोड़ पाना ड्राइवरों के लिए बड़ी चुनौती साबित होगी। ट्रक को मोड़ते समय लगभग 30 फुट का घेरा चाहिए जो डिवाइडर बनने के बाद नहीं मिलेगा। इसके अलावा आगे पीछे कर किसी तरह मोड़ा भी तो पीछे चल रहे वाहनों की लंबी कतार लग जाएगी। डिवाइडर बन जाने के बाद ट्रकों को टर्न पर थोड़ा आगे ले जाकर मोड़ना पड़ेगा। अगर ट्रक पहले मोड़ा तो उसका पिछला हिस्सा ट्रक से टकरा सकता है और थोड़ा आगे ले जाकर मोड़ा तो अगले हिस्से की पुल से टक्कर की आशंका बनी रहेगी।
मोटरसाइकिल को भी ओवरटेक करना मुश्किल
डिवाडर बनने के बाद पुल की एक तरफ चौड़ाई 11.50 फुट रह जाएगी। नौ फुट जगह तो ट्रक से घिर जाएगी। ऐसे में महज ढाई फुट जगह से स्कूटर और मोटर साइकिल को ओवरटेक करना दुर्घटना को दावत देने जैसा होगा। अगर किसी स्कूटर या मोटरइसाकिल के पीछे तेज गति से ट्रक चल रहा है और वह डिवाइडर वाले हिस्से में स्कूटर या मोटरसाइकिल को ओवरटेक करने का प्रयास करता है तो भी गंभीर दुर्घटना हो सकती है। यह स्थिति दोनों तरफ से रहेगी। वाहन चाहे झूंसी से बैरहना की ओर जा रहे हों या विपरीत दिशा में चल रहे हों, सड़क के जितने हिस्से पर डिवाइडर रहेगा, खतरा बना रहेगा।
ब्रेक डाउन हुआ तो ठप हो जाएगा ट्रैफिक
झूंसी या बैहरना की तरफ से फ्लाईओवर पर चढ़ने वाला कोई भी बड़ा वाहन अगर उस 50 मीटर की दूरी के बीच खराब होता है, जहां डिवाइडर बनना है तो फ्लाईओवर का पूरा ट्रैफिक ठप हो जाएगा। डिवाइडर के दोनों तरफ 11.50 फुट की जगह रहेगी, सो किसी भी तरफ वाहन खराब हो जाने पर उसके पीछे आ रहे वाहनों को रुकना पड़ेगा, क्योंकि एक तरफ से नौ फुट चौड़ा एक ही ट्रक निकल सकेगा। जाम में सिर्फ बड़े वाहन ही नहीं, छोटे वाहन भी फंसेंगे। ऐसे में फ्लाईओवर बनाने का उद्देश्य ही चौपट हो जाएगा।
रोज गुजरते हैं चार से पांच हजार ट्रक
झूंसी से नैनी की तरफ और नैनी से झूंसी और सोहबतियाबाग की तरफ रोज चार से पांच हजार ट्रक गुजरते हैं। फ्लाईओवर बनने के बाद इन ट्रकों का पूरा लोड उस पर आ जाएगा। नो-इंट्री खुलते ही ट्रैफिक इतना ज्यादा होगा, जिसे संभाल पाना इस टू-लेन फ्लाईओवर के लिए मुश्किल हो जाएगा।
‘डिवाइडर बनाए जाने का हम विरोध करते हैं। डिवाइडर बना तो फ्लाईओवर बनाने का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा। जाम की समस्या कम होने के बजाय और बढ़ जाएगी। साथ ही दुर्घटनाएं बढ़ेंगी। डिवाइडर बनाने से बेहतर है कि फ्लाईओवर के तिराहे पर ट्रैफिक पुलिस की ड्यूटी लगा दी जाए ताकि झूंसी की तरफ से आने वाले वाहन सोहबतियाबाग की तरफ न मुडे़ं।’
कुलदीप मिश्र
पूर्वाचंल प्रभारी, उत्तर प्रदेश युवा ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन
‘अव्वल तो हाईवे पर टू-लेन फ्लाईओवर बनाने का कोई मतलब ही नहीं है। तकनीकी रूप से गड़बड़ इस फ्लाईओवर को मंजूरी ही नहीं मिलनी चाहिए थी। रही बात डिवाइडर की तो उसके लिए सड़क कम से कम फोर लेनी होनी चाहिए और दोनों तरफ से सड़क कम से कम सात-सात मीटर चौड़ी होनी चाहिए। जिस सड़क की कुल चौड़ाई साढ़े सात मीटर, उस पर डिवाइडर बनाने का कोई औचित्य ही नहीं।’
एपी गुप्ता, पूर्व सिविल इंजीनियर
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