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बीटेक की फीस जमा करने को गिरवी रखी जमीन

Allahabad

Updated Thu, 12 Jul 2012 12:00 PM IST
समाज कल्याण विभाग ने इंजीनियरिंग एवं प्रबंधन कॉलेजों को दो वर्ष से नहीं दी शुल्क प्रतिपूर्ति
अभिभावकों ने सरकार से प्रवेश के समय ही शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ लेने की मांग की
कॉलेजों के फर्जीवाड़े से समाज कल्याण विभाग ने कड़े किए शुल्क प्रतिपूर्ति के नियम

इलाहाबाद। प्रदेश के इंजीनियरिंग एवं प्रबंधन कॉलेजों में समाज कल्याण विभाग की ओर से गरीब छात्रों को मिलने वाली शुल्क प्रतिपूर्ति समय से नहीं मिलने पर अभिभावकों को फीस भरने के लिए जमीन तक गिरवी रखनी पड़ गई। समाज कल्याण विभाग की ओर से गरीब और मध्यम वर्ग के विद्यार्थियों को 40 फीसदी फीस प्रतिपूर्ति किया जाता है। प्रदेश के कॉलेज प्रबंधनों की ओर से फर्जी छात्र संख्या पेश करके समाज कल्याण विभाग से गलत ढंग से फीस का भुगतान करवा लेने के बाद जांच जारी से पिछले दो वर्ष से गरीब छात्रों को फीस प्रतिपूर्ति नहीं मिल सकी है। प्रदेश भर में बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग और प्रबंधन कॉलेज फीस प्रतिपूर्ति नहीं होने से बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं।
केस एक
समाज कल्याण विभाग से फीस प्रतिपूर्ति नहीं मिल पाने से जीबीटीयू केएक संस्थान से बीटेक तीसरे वर्ष के छात्र राहुल मिश्र के पिता श्रीनिवास मिश्र जो सामान्य किसान हैं, ने अपनी खेती योग्य जमीन गिरवी रखकर फीस जमा की। राहुल के दो भाइयों को इस वर्ष जीबीटीयू की प्रवेश परीक्षा में 19000 और 9000 रैंक मिली है। इनकी काउंसिलिंग 14 जुलाई से हो रही है। इनको प्रवेश दिलाने के लिए इस गरीब अभिभावक के पास फीस जमा करने के लिए पैसे नहीं हैं। इस अभिभावक ने बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है। इस अभिभावक ने सरकार से मांग की है कि 14 जुलाई को जीबीटीयू काउंसिलिंग से पहले शुल्क प्रतिपूर्ति पर निर्णय लेने की अपील की है।
केस दो
शहर के एक प्रबंधन कॉलेज से एमबीए कर रहे सत्येन्द्र सिंह समाज कल्याण विभाग से फीस प्रतिपूर्ति नहीं होने के कारण अब पढ़ाई आगे जारी रखने में असमर्थ हैं। इनके पिता आरएन सिंह एक निजी संस्थान में कर्मचारी हैं। बच्चे की फीस प्रतिपूर्ति समाज कल्याण विभाग से नहीं होने से उन्होंने अपने आफिस के कुछ साथियों से उधार ले रखा है। अब आगे पढ़ाई के लिए इनके पास कोई विकल्प नहीं है। कॉलेज प्रबंधन समाज कल्याण विभाग का हवाला देता है तो समाज कल्याण विभाग बजट नहीं होने की बात कह रहा है। इस अभिभावक ने सरकार से अपील की है कि गरीब छात्रों को प्रवेश के समय ही शुल्क प्रतिपूर्ति की व्यवस्था की जाए। जिससे एक बार प्रवेश लेने के बाद उनका भविष्य अंधकार मय न हो।
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