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स्वागत द्वार पर भी उठे सवाल

Allahabad

Updated Sun, 01 Jul 2012 12:00 PM IST
महाकुंभ के कार्यों में गड़बड़ी
मलाक हरहर में आबादी के बीच बनाया जा रहा गेट
ऐसी जगह बनाने का आदेश था, जहां दूर से ही दिखे
नगर विकास मंत्री ने दूसरी जगह बनाने को कहा
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। महाकुंभ के कार्यों को लेकर अफसर जरा भी गंभीर नहीं है। तभी सड़क और डिवाइडर निर्माण में गड़बड़ी के बाद अब शहर के बाहर मुख्य सड़कों पर बनाए जा रहे स्वागत द्वार पर भी सवाल उठने लगे हैं। पर्यटन विभाग इलाहाबाद-लखनऊ-प्रतापगढ़ मार्ग, इलाहाबाद-रीवां मार्ग एवं इलाहाबाद-झूंसी मार्ग पर स्वागत द्वार बनवा रहा है। तीन द्वार के लिए कुंभ मेला बजट से 1.60 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं।
पर्यटन विभाग ने स्वागत द्वार बनाने की जिम्मेदारी जल निगम की इकाई सीएेंडडीएस को सौंपी है। इन द्वार को बनाने वाली जगह को लेकर सवाल खड़ा हो गया है। तय हुआ था कि स्वागत द्वार ऐसी जगह बनाए जाएं, जहां से यह साफ और दूर से नजर आएं लेकिन इलाहाबाद-लखनऊ-प्रतापगढ़ मार्ग पर मलाक हरहर में बन रहा द्वार आबादी के बीच है। इससे मात्र दस मीटर की दूरी पर मकान बने हैं। आगे और मकानों का निर्माण भी होगा। इसके अलावा यहां पर रोडवेज की बसें भी रुकती हैं।
मलाक हरहर द्वार के निर्माण पर अब तक तकरीबन सात लाख रुपये खर्च हो चुके हैं, जबकि तकरीबन 49 लाख रुपये की लागत से इसे बनाया जाना है, जिसमें राजस्थान के पत्थर लगाए जाएंगे। पिछले दिनों यहां आए नगर विकास मंत्री आजम खां ने भी इस पर आपत्ति जताई थी। आबादी के बीच द्वार बनाने पर उन्होंने पर्यटन विभाग के अफसरों को जमकर फटकार लगाई थी और उसे वहां से हटाकर दूसरे स्थान पर बनाने का आदेश दिया ताकि वह दूर से दिखाई दे। यही हाल इलाहाबाद-वाराणसी मार्ग पर सराय इनायत के पास एवं इलाहाबाद-रीवां रोड पर बन रहे स्वागत द्वार का भी है। हालांकि मंत्री ने अभी इसका निरीक्षण नहीं किया है लेकिन मेला प्रशासन से शिकायत की गई है कि उसे भी आबादी के बीच में बनाया जा रहा है। इस संबंध में क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अमित कुमार एवं सीएेंडडीएस के अधिशासी अभियंता घनश्याम द्विवेदी से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उनका मोबाइल नहीं उठा।
इनसेट
घाट निर्माण मेला प्रशासन की आपत्ति
इलाहाबाद। यमुना किनारे अरैल में पक्के घाट के निर्माण पर मेला प्रशासन ने आपत्ति दर्ज कराई है। यहां एक पक्का घाट पहले से बना हुआ है और सिंचाई विभाग इससे मात्र दस मीटर की दूरी पर दूसरा घाट बनवा रहा है। मेला प्रशासन को शिकायत मिली है कि पास-पास घाट बनने से बाढ़ में उसके बहने का खतरा रहेगा। मेला प्रशासन के अफसरों ने सिंचाई विभाग के अभियंताओं से इस पर आपत्ति दर्ज कराई है। हालांकि पक्का घाट कहीं और शिफ्ट करने पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
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