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मासूम से दुराचार हत्या के दोषी की फांसी बरकरार

Allahabad Bureau

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Updated Fri, 06 Oct 2017 08:23 PM IST
मासूम से दुराचार, हत्या के दोषी की फांसी बरकरार
0 देश में लड़कियों की स्थिति दयनीय: हाईकोर्ट
0 सात साल की मासूम की 35 साल के अभियुक्त ने रेप के बाद की थी हत्या
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। सात साल की मासूम से रेप के बाद हत्या करने की घटना को विरल से विरलतम घटना मानते हुए हाईकोर्ट ने फांसी की सजा को बरकरार है। अभियुक्त पप्पू को सत्र न्यायालय पड़रौना, कुशीनगर ने आठ दिसंबर 2016 को फांसी की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने सजा के रेफरेंस और अपील दोनों पर सुनवाई करते हुए कहा कि ऐसे कुकृत्य में अपराधी को फांसी की सजा देने से समाज में गहरा असर पडे़गा तथा अपराध करने वालों का मनोबल गिरेगा।
अपील पर न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता और न्यायमूर्ति प्रभात चंद्र त्रिपाठी की खंडपीठ ने सुनवाई की। निर्णय सुनाते हुए न्यायमूर्ति पीसी त्रिपाठी ने कहा कि सात साल की बच्ची को 35 साल के युवक द्वारा फुसलाकर सुनसान में ले जाकर रेप करना और फिर उसकी हत्या कर शव छिपा देना क्रूरतम अपराध है। ऐसे अपराधों में कड़ी से कड़ी सजा ही दी जानी चाहिए।
प्रकरण कुशीनगर के गांव सबाखास थाना कसया का है। बच्ची की मां ने चार मई 2015 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी सात वर्षीय बेटी गांव के अपनी ही उम्र के बच्चों के साथ घर के बाहर खेल रही थी। पड़ोस के गांव का पप्पू उसे लीची तोड़ने के बहाने अपने साथ लिवा गया। साथ खेल रहे अन्य बच्चों को टॉफी देकर उसने वहीं रुकने के लिए मना लिया। सुनसान स्थान पर ले जाकर बच्ची से रेप किया और फिर हत्या कर लाश दूर ले जाकर फेंक आया।
बच्ची के देर रात तक घर न आने पर उसकी तलाश शुरू हुई। अन्य बच्चों ने बताया कि पप्पू उसे साथ लिपा गया था। पप्पू अपने घर से गायब था। पुलिस ने शव बरामद कर अभियुक्त को गिरफ्तार किया। सत्र न्यायालय ने विचारण शीघ्रता से पूरा किया और आठ दिसंबर 2016 को अभियुक्त पप्पू को फांसी की सजा सुनाई। जिसे हाईकोर्ट ने बरकरार रखा।

मानवता के विरुद्ध अपराध: हाईकोर्ट
अपनी पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि बच्चों के साथ दुराचार की घटनाएं विकृत मानसिकता को उजागर करती हैं। यह मानवता के विरुद्ध अपराध है। देश में लड़कियां दयनीय स्थिति में रह रही हैं। यौन शोषण के अलावा अन्य तरीकों से भी उत्पीड़न हो रहा है। ऐसे मामलों में अदालतों के कंधे पर जिम्मेदारी आती है कि वह बच्चों की सुरक्षा के लिए काम करें। कोर्ट ने कहा बच्चे देश का भविष्य हैं, देश को उनसे उम्मीदें हैं। बच्चों से होने वाले अपराधों पर अदालतों को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। उनके साथ होने वाला अपराध जीवन भर के लिए उनके मस्तिष्क पर अपनी छाप छोड़ जाता है। सेक्स अपराधी जंगली जानवरों की तरह व्यवहार कर रहे हैं। कड़े दंड से अपराध को रोका जा सकता है।
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