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मिर्च का तीखापन कम कर रहा प्रदूषण

Aligarh

Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
अलीगढ़। मिर्च से तीखापन गायब होने की चर्चा घर-घर होती है, लेकिन कम ही लोग जानते है कि ‘तीखापन’ को कम कर सब्जी का मजा किरकिरा करने का जिम्मेदार सल्फर डाईऑक्साइड (एसओ टू) है।
वायु प्रदूषण बढ़ाने में सल्फर डाईऑक्साइड का अहम रोल है। यहीं हमारी टेस्टी और हेल्दी सब्जियों का मजा बिगाड़ रहा है। डीएस कॉलेज के शोध छात्र राहुल भारद्वाज ने ‘इफेक्ट ऑफ सल्फर डाईऑक्साइड ऑन केपसिकम एनम’ पर अपना शोध कार्य वनस्पति विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मुकेश भारद्वाज के पर्यवेक्षण में पूरा किया है। उन्होंने बताया कि मिर्च का तीखापन एक एल्केलोइड, जिसका नाम कैप्सिसिन है, पर निर्भर है। यह मिर्च के अंदर पाया जाता है। वातावरण में सल्फर डाईऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से कैप्सिसिन की मात्रा दिनों दिन घटती जा रही है। इसी की वजह से मिर्च का तीखापन गायब हो रहा है। यह कैप्सिसिन तत्व तीखापन बढ़ाने के साथ-साथ बहुत सारी बीमारियों में रामवाण की तरह काम करता है। हमारे शरीर में दर्द को कम करने और रक्तचाप को सही बनाए रखने में सहायक होता है। इसके सेवन से कैंसर से लड़ने के लिए रोध प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है। राहुल भारद्वाज ने बताया कि दो मिर्च में एक सेब के बराबर विटामिन होता है।
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यहां हुई जांच
कासिमपुर थर्मल पॉवर प्लांट के पास एसओटू की मात्रा - 0.9 पीपीएम
दूबे का पड़ाव, एटा चुंगी व सारसौल चौराहे का औसत - 0.6 पीपीएम
मानक - वातावरण में एसओटू 0.1 से 0.2 पीपीएम से अधिक नहीं होना चाहिए
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निष्कर्ष
- कासिमपुर की मिर्च में तीखापन कम
- पौधे की लंबाई कम
- पौधे में पत्तियों की संख्या कम
- पौधे पर लगने वाली मिर्चों की संख्या कम
- पौधे का संपूर्ण विकास प्रभावित
स्कोरपियन मोरुगा ब्लेंड है सबसे तीखी मिर्च
दुनिया की सर्वाधिक तीखी मिर्च में त्रिनिदाद का स्कोरपियन मोरुगा ब्लेंड और भारत की भुट जोलोकिया मिर्च शामिल है। स्कोरपियन मोरुगा ब्लेंड त्रिनिदाद के मोरुगा जनपद में होता है। दी न्यू मैक्सिको स्टेट यूनिवर्सिटी की चिली पेपर इंस्टीट्यूट ने इसकी पहचान फरवरी 2012 में की थी। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों नागालैंड, असम, बांग्लादेश और श्रीलंका के कुछ हिस्सों में पैदा होने वाली भुट जोलोकिया मिर्च भी अपने तीखेपन के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है।
वातावरण में एसओ टू की मात्रा बढ़ने से उत्पादन प्रभावित हो जाता है। खासकर सब्जियों को काफी नुकसान पहुंचता है। यही अम्ल वर्षा का भी कारण बनता है। इसकी रोकथाम के लिए प्रदूषण नियंत्रण के कानून का पालन कराना जरूरी है।
- डॉ. मुकेश भारद्वाज, वनस्पति विज्ञान विभाग, डीएस कॉलेज
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