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राष्ट्रीय समस्या है भ्रूण हत्या: सुभाषिनी

Agra

Updated Tue, 18 Dec 2012 05:30 AM IST
आगरा। पूर्व सांसद सुभाषिनी अली ने कहा कि मां, बहन, पत्नी के रूप में स्त्री पुरुष की सहयोगी रही है। स्त्री बिना पुरुष का वजूद नहीं है। फिर भी भ्रूण हत्या से इनके दिल नहीं कांपता। लगातार स्त्री अनुपात गिरने से यह राष्ट्रीय समस्या बन गया है। इसके बावजूद सरकारी तंत्र मौन धारण किए हुए हैं। विवि के जुबली हॉल में लिंग अनुपात संगोष्ठी में भाग लेने आईं विशेष बातचीत में सुभाषिनी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की स्थिति भी बदतर है। आंकड़ाें का गणित बताते हैं कि प्रदेश में 40 हजार से अधिक अल्ट्रा साउंड हैं। इनमें कानून को ताक पर रख भ्रूण हत्याएं कराई जा रही हैं। इसी के चलते 28 जिलों में महिलाआें की संख्या नौ से नीचे है। हैरत है कि यह पाप करने वालाें में सर्वाधिक शिक्षित हैं। उन्होंने कहा कि कठोर कानून के बाद भी भ्रण वध नहीं रुक रहा। इसका कारण उन्होंने सरकारी तंत्र का ढुलमुल रवैया बताया। उन्होंने कहा कि अगर सरकारें जल्द नहीं चेतीं तो निकट भविष्य में समस्या भयावह होंगी।
बाजार बना दी औरत की काया
आगरा। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति के दहेज प्रथा और लिंग अनुपात में बतौर मुख्य वक्ता सुभाषिनी ने ब्रांडेड कंपनियाें को जमकर कोसा। उन्होंने कहा कि कंपनियों ने औरत की काया को बाजार बना दिया है। सीमेंट से लेकर साइकिल के विज्ञापन में स्त्री का सहारा लिया जा रहा है। टीवों सीरियलाें में भी नारी के शरीर से टीआरपी बढ़ाई जा रही है। दहेज पर सुभाषिनी ने कहा कि यह भी अब फैशन हो गया है, अब तो लड़कियों खुद ही इसकी अपने पिता से डिमांड करती हैं। इस चलन को रोकने की बात करते हुए छात्राआें को भ्रूण हत्या के खिलाफ खड़ा होने की बात कही।

शहर में 866 रह गया प्रतिशत
आगरा। हैरत होगी कि भ्रूण हत्या में अपना शहर भी पीछे नहीं है। यहां के आंकडे और डराने वाले हैं। हजार पुरुषाें पर केवल 866 ही महिलाएं है। महिला समिति की प्रदेश उपाध्यक्ष मधु गर्ग ने कहा कि समय रहते भ्रूण हत्या पर लोग जागरूक नहीं रहे तो स्त्री जाति ही संकट में आ जाएगी। डा. शिवानी चतुर्वेदी ने कहा कि जो लोग लड़कियाें को बोझ समझते हैं, वह भारी गफलत में हैं। लड़कियाें को बेहतर शिक्षा देकर वह भी आपके उत्थान में सहयोग बनेगी। संयोजिका डा. नसरीन बेगम, डा. वीना गुप्ता, डा. लता शर्मा, डा. गुंजन चतुर्वेदी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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