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नए सपनों के साथ पूरा हुआ मीट एट आगरा

Agra

Updated Mon, 05 Nov 2012 12:00 PM IST
आगरा। फुटवियर इंडस्ट्री को नया मुकाम देने वाले मीट एट आगरा का छठवां संस्करण अपने लिए भी नए आसमान की तलाश के साथ पूरा हुआ। इंटरनेशनल एक्सपो रीवा शू फेयर के साथ कोलोब्रेशन के खुले द्वार और सुविधाओं के लिए सरकारी घोषणाएं मीट एट आगरा 2012 की उपलब्धि रहीं। वहीं आधुनिक मशीनें, आरामदायक फुटवियर कंपोनेंट और आधुनिक बाजार की मांग पूरी करने वाले सामान एक ही छत के नीचे मिलने से निर्यातकों के साथ घरेलू बाजार के लिए नए आसमान पर जाने जैसा रहा।
वर्ष 2007 से हो रहे इस फेयर आगरा के साथ प्रदेश के फुटवियर निर्यात और घरेलू कारोबार को हर बार नई दिशा दी। सात संमदर पार की आधुनिक तकनीक ने नए बाजार से लड़ने का मौका दिया। घरेलू बाजार से निर्यात क्षेत्र में कदम रखने वाले बढ़े तो नया बाजार भी मिला। यह परंपरा इस बार भी कायम रही। इस बार मीट एट आगरा एक बार फिर खुला बाजार देकर गया।
हालांकि आर्थिक मंदी से डरे आयोजकों के मन में पिछला रिकार्ड हासिल करने को लेकर शंकाएं भी थीं लेकिन लगन ने उन्हें नया रिकार्ड दिया। स्टाल और कंपनियों की संख्या में कमी के बाद भी तीन दिवसीय फेयर में तकरीबन 6000 देशी-विदेशी बिजनेस विजटर्स आए जबकि कुल 20 हजार विजिटर्स फेयर में पहुंचे।
फेयर के दूसरे दिन प्रमुख सचिव मुकुल सिंघल ने सूबे में आगरा सहित तीन मेगा लेदर क्लस्टर को 2013 तक पूरा करने, इंटरनेशनल टेस्टिंग लैब, ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना करने की घोषणा की। वहीं एक्सपो रीवा शू द्वारा मीट एट आगरा के साथ कोलोब्रेशन करने के आफर ने भी सौगात दी। सब कुछ ठीकठाक रहा तो अगला मीट एट आगरा एक्सपो रीवा शू के साथ होगा।

लेकिन चमड़े का संकट बरकरार
मीट एट आगरा की सफलता से जहां फुटवियर इंडस्ट्री में खुशी है कारोबार में आड़े आ रहे चमड़े की कमी का संकट ज्यों का त्यों रहा। कारोबारियों का कहना है कि देश का अधिकतर चमड़ा निर्यात कर दिया जाता है। अच्छा लेदर मिलना भी मुश्किल है। साथ ही साफ्ट लेदर भी नहीं मिलता जिससे विदेशी बाजार का मुकाबला कठिन हो रहा है। विदेशों में अच्छे लेदर का प्रयोग किया जाता है और उनके जूते काफी सॉफ्ट होते हैं। फेयर के आयोजन में राज्य व केंद्र सरकार के प्रतिनिधि, नौकरशाह हिस्सा लेते हैं पर परिणाम ढाक के तीन पात ही हैं। इस पर सरकार बिल्कुल नहीं संजीदा है। जूता कारोबारियों का कहना है कि चमड़े की समस्या दूर नहीं होने पर निर्यात नहीं बढ़ाया जा सकता है।
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