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एनआरएचएम का ‘फ्लॉप शो’

Agra

Updated Sun, 28 Oct 2012 12:00 PM IST
आगरा। भ्रष्टाचार की कोठरी बन चुके एनआरएचएम में ‘सयाने’ भी जाने से बच रहे हैं। इन्हें ‘दागदार’ होने का डर सता रहा है। नतीजतन, इस साल आवंटित एनआरएचएम के बजट का इस्तेमाल ही नहीं किया जा रहा है। आलम यह है कि कई स्वास्थ्य योजनाएं तो शुरू ही नहीं हुईं। वहीं जननी सुरक्षा समेत अन्य योजनाओं में मात्र 10 प्रतिशत बजट का ही प्रयोग हुआ।
पिछले साल राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) की तमाम योजनाएं कागजों में ही पूरी हो गईं। इनमें हुए घोटालों की सीबीआई जांच चल रही है। एनआरएचएम में वर्ष 2012-13 के लिए 30 करोड़ 60 लाख का बजट आवंटित हो चुका है। मगर, इसका लाभ लोगों की पहुंच से दूर है। अप्रैल से अगस्त तक एनआरएचएम की योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट पर नाराजगी जताते हुए मिशन निदेशक अमित कुमार घोष ने डीएम अजय चौहान को आगाह किया है।

सरकारी अस्पतालों में नहीं हो रहे प्रसव
जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क प्रसव के साथ चेक दिया जाता है। गर्भवती महिला को घर से लाने और छोड़ने की भी व्यवस्था है। इसके बावजूद सरकारी अस्पतालों में प्रसव की संख्या बहुत कम है। अप्रैल 2012 से अगस्त 2012 तक 48,856 गर्भवती महिलाओं का रजिस्ट्रेशन किया गया। सरकारी अस्पतालों में अगस्त तक प्रसव का लक्ष्य 52,568 था, जबकि प्रसव महज 29 प्रतिशत (15,461) ही हुआ।

नियमित टीकाकरण भी अधूरा
अप्रैल 2012 से अगस्त 2012 तक 1,19,664 बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया था। इसमें से महज 41,215 (34 प्रतिशत) बच्चों का ही पूर्ण टीकाकरण हुआ है।
ये योजनाएं नहीं हुई शुरू
नेशनल मेंटल हेल्थ प्रोग्राम के लिए 12 करोड़ रुपये के बजट का इस्तेमाल नहीं हो सका है। इसके साथ ही बाल स्वास्थ्य, परिवार कल्याण प्रशिक्षण, नियमित टीकाकरण में बजट का बहुत कम इस्तेमाल हुआ है।


एनआरएचएम का वर्ष 2012-13 का बजट
कुल बजट 30 करोड़ 60 लाख
अगस्त तक खर्च हुआ बजट 3 करोड़ 23 लाख
विभिन्न योजनाओं मेें खर्च हुआ बजट बजट
आवंटित खर्च हुआ बजट
आरसीएच जननी सुरक्षा योजना और बच्चों का टीकाकरण 11 करोड़ 23 लाख 2 करोड़ 62 लाख
टीकाकरण 73 लाख 6 लाख 48 हजार
पल्स पोलियो 99 लाख 31 लाख
एनबीसीपी अंधता निवारण कार्यक्रम 28 लाख शून्य
एनएमएचपी नेशनल मेंटल हेल्थ प्रोग्राम 12 करोड़ 12 लाख शून्य

इनके पास है योजनाओं की जिम्मेदारी
नियमित टीकाकरण और पल्स पोलियो एसीएमओ डा. अनुपम भास्कर, आशाकार्यकत्रियों और हेल्थ वर्कर के द्वारा क्रियान्वयन
एनएचएमपी मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय
आरसीएच, एनबीसीएच, आरएनटीसीपी सहित अन्य योजनाएं एसीएमओ डा. वाईपी सिंह

सभी योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट तैयार की गई है। लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं।
डा. वाईपी सिंह, प्रभारी, एनआरएचएम
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