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कमजोर पैरवी : सांसत में शहर

Agra

Updated Sun, 21 Oct 2012 12:00 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
आगरा। राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और सरकारों द्वारा हाशिये पर रखे जाने के कारण ताज नगरी इंटरनेशनल एयरपोर्ट या सिविल टर्मिनल ही नहीं नियमित उड़ानों से भी महरूम है। 1960 से 1992 तक आगरा-नेपाल कनेक्टिविटी के दौरान एक दिन में चार-चार फ्लाइट आती थीं। वहीं पिछले दो सालों से एक भी नियमित उड़ान नहीं आई है। वह भी तब जब आगरा में 65-70 लाख टूरिस्ट आते हैं।
हर तरफ से निराश पर्यटन उद्यमियों ने पहल की। तत्कालीन मंडलायुक्त अमृत अभिजात ने डीजी पर्यटन भारत सरकार के साथ समन्वय कर विमानन कंपनियों से वार्ता कराई। कंपनियों ने कहा एटीएफ पर वैट कम हो जाए तो नियमित उड़ाने देंगे। वहीं पर्यटन उद्यमियों ने विमानन कंपनियों को अपनी तरफ से कई पैकेज भी आफर किया। लेकिन राज्य सरकार ने वैट नहीं घटाया और आगरा के जनप्रतिनिधि इस संबंध में राज्य सरकार पर दबाव नहीं बना पाए। सिविल टर्मिनल का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया लेकिन जन प्रतिनिधि चुप रहे। राज्य सरकारों की अनदेखी देख केंद्र सरकार ने भी हाशिये पर रखा। इंटरनेशनल एयरपोर्ट देने के आश्वासन के बाद जब लिस्ट जारी की तो आगरा क्या ब्रज का क्षेत्र ही गायब था। लेकिन किसी ने भी आवाज नहीं उठाई।

सुुविधाएं भी हैं
अक्टूबर 2011 में एयरपोर्ट अथारिटी ने की कई घोषणाएं
मेट्रो एयरपोर्ट पर शिड्यूल फ्लाइट के लिए नाइट पार्किंग फ्री
लैंडिंग चार्ज और दिन में पार्किंग पर 50-50 फीसदी की छूट
पांच साल तक मिलनी है छूट, इसके बाद छूट 25 फीसदी

वर्ष शिड्यूल (घरेलू) डोमेस्टिक चार्टर्ड इंटरनेशनल चार्टर्ड
2008-09 502 372 41
2009-10 262 698 20
2010-11 256 655 31
2011-12 0 - -

राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और आगरा को राजनीतिक हाशिये पर रखने के कारण आज भी एयरपोर्ट या सिविल टर्मिनल तो दूर की बात है, नियमित उड़ान भी नहीं मिल रही है। जब से मांग हो रही है यहां केंद्र सरकार की पार्टी का सांसद नहीं रहा। आगरा को सिविल टर्मिनल नहीं दे रहे हैं तो कम से कम फ्री पैसेज दें ताकि पर्यटक बेरोकटोक आ सके।
राजीव तिवारी
उपाध्यक्ष नेशनल चैंबर आफ इंडस्ट्री एंड कामर्स

जनप्रतिनिधि बोले
मैंने विमानन मंत्रालय भारत सरकार और पर्यटन उद्यमियों के साथ समन्वय कराया। लेकिन सरकारों की मानसिकता हाशिये पर रखने की है।
रामशंकर कठेरिया
सांसद

इंटरनेशनल एयरपोर्ट मिलना ही चाहिए लेकिन सरकारें उदासीन हैं। हमेशा आगरा को हाशिये पर रखा गया है। सरकार से वैट कम करने की मांग की गई है।
जगन प्रसाद गर्ग
विधायक

एयरपोर्ट का प्रस्ताव हमारी सरकार में भेजा गया था लेकिन केंद्र ने नहीं माना। राज्य सरकार को वैट कम करना चाहिए।
गुटियारी लाल दुवेश
विधायक
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