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चल रहा मध्यम वर्ग को उपभोगवादी बनाने का कुचक्र

Agra

Updated Mon, 08 Oct 2012 12:00 PM IST
आगरा। मध्यमवर्ग को उपभोगवादी बनाकर उन्हें मस्त करने का कुचक्र चल रहा है। हमें इस कोशिश को नाकाम करना होगा। आज हिंदी को इस रूप में विकसित करने की जरूरत है जो मध्यम वर्ग की छद्म प्रगतिशीलता को चुनौती दे सके और अपने समय के सवालों और चुनौतियों से संवाद कर आलोचना का सही विकल्प बन सके।
रविवार को केंद्रीय हिंदी संस्थान के नजीर सभागार में डॉ. रामविलास शर्मा के जन्मशती समारोह पर आयोजित सेमिनार में दूसरे सत्र के अध्यक्षीय संबोधन में वरिष्ठ आलोचक प्रो राजेंद्र कुमार ने मध्यम वर्ग की छद्म प्रगतिशीलता को चुनौती देने के परिप्रेक्ष्य में हिंदी के विकास की बात कही। वह दूसरे सत्र ‘राम विलास शर्मा की आलोचना दृष्टि और समकालीन सृजन’ विषय पर बोल रहे थे।
पहले सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो. रविभूषण ने कहा पूंजी अपनी भाषा लेकर चलती हैै, जो अन्य भाषाओं की पूंजी नष्ट करती है। वहीं ‘भाषा और समाज’ विषय पर बोलते हुए रेलवे बोर्ड के संयुक्त सचिव प्रेमपाल शर्मा ने कहा कि भाषा ही नहीं, समाज भी टूट रहा है। समाज में अब गरीब-अमीर का फर्क नहीं रहा, अब बंटवारा भाषाई आधार पर होता है। सच तो ये है कि न भाषा बची है, न समाज बचा है।
वार्ष्णेय कालेज अलीगढ़ से आए डॉ. रमेश कुमार ने हिन्दी सहित अन्य भाषाओं के विकास पर जोर दिया। डॉ. उमाकंत चौबे ने कहा कि भोजपुरी, मैथिली आदि भाषाएं अपने लिए स्वतंत्रता की मांग कर रही हैं। बीएचयू के डॉ. अवधेश प्रधान ने डा. रामविलास की इच्छा बताते हुए कहा कि उनकी सारी स्थापनाएं भले ही खंडित हो जाएं, लेकिन एक आदि भाषा से सभी भाषाओं के पैदा होने का सिद्धांत का खंडन बच जाए यही काफी है। भाषा और समाज को लेकर डॉ. जितेन्द्र रघुवंशी, डॉ. जितेन्द्र कुमार, आगरा विद्यापीठ के हिन्दी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. गोविन्द रजनीश ने भी महत्वपूर्ण विचार रखे। वहीं बीएचयू के डॉ. आशीष त्रिपाठी ने कहा कि राम विलास शर्मा के आलोचना कर्म मार्क्सवाद और प्रगतिशील आंदोलन के समकालीन संदर्भों के बिना नहीं समझा जा सकता है। डॉ. गोपाल प्रधान ने कहा कि डॉ. राम विलास जी साहित्य को विशुद्ध विचारधारा मानने से गुरेज करते थे।
इस दौरान साहित्य अकादमी सम्मान प्राप्त कवि वीरेन डंगवाल, कथादेश संपादक हरिनारायण, कथाकार प्रियदर्शन मालवीय, रानी सरोज गौरिहार, डॉ. कमलेश नागर, डॉ. चंद्रकांत त्रिपाठी, डॉ. सुनीता रानी, डॉ. शशिकांत पांडेय आदि मौजूद रहे। अंत में डॉ. अनुपम श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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