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कबाड़खाने से भी बदतर हैं स्कूलों के शौचालय

Agra

Updated Tue, 25 Sep 2012 12:00 PM IST
बाह। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राएं खुले में शौच कर रोजाना शर्मसार होने को मजबूर हैं। कबाड़खाने से भी बदतर हालात में मौजूद शौचालयों पर या तो ताले लटके रहते हैं या फिर दीवारें टूटी-उखड़ी पड़ी हैं। शौचालय परिसरों में गंदगी के ढेर पर झाड़-झंकाड़ उग आए हैं। मरम्मत से लेकर सफाई की ओर किसी का ध्यान नहीं गया है।
परिष्ज्ञदीय स्कूलों में 25 हजार की लागत से शौचालयों का निर्माण कराया गया है। छात्र-छात्राओं के लिए दो-दो दरवाजे के शौचालयों की हालत ऐसी है कि छात्राओं को मजबूरी में खुले में शौच को जाना पड़ता है। इस ओर न तो विभाग ध्यान दे रहा है और न ही पंचायत विभाग। हर रोज खुले में शौच कर शर्मसार हो रही छात्राओं को लेकर शौचालयों की हाल का अमर उजाला ने जायजा लिया तो बीमार पड़े शौचालय छात्र-छात्राओं के लिए बीमारी का खतरा बन गए हैं। परिसरों में गंदगी को हटाने तक की किसी को फुर्सत नहीं मिल रही। सबसे बुरा हाल बाह के पुरा बीच गांव के स्कूल का है। पंचायत विभाग द्वारा बनवाए शौचालय में बबूल के पेड़ खड़े हैं, तो स्कूल निधि से बने शौचालय की दीवार टूटी-उखड़ी पड़ी है। एक हिस्सा उखड़ गया है। पुरा तिन्नेत गांव के शौचालय की हालत ऐसी है कि छात्राएं दुर्गंगध के चलते उसके बगल तक से नहीं गुजर पातीं। शांतीनगर गांव के स्कूल के शौचालय की तस्वीर पुरा तिन्नेत जैसी ही है। दोनों ही स्कूलों की छात्राओं का कहना था कि शौच के लिए उन्हें खुले में जाना पड़ता है। बाह के डेरक गांव के स्कूल के शौचालय पर ताला लटका रहता है। अंदर टाइल्स, फर्श, सब कुछ उखड़ गया है। बाह के दोदापुरा गांव के स्कूल का शौचालय भी बेहाल है।

क्या होना चाहिए
25 हजार की लागत से बने शौचालय में टाइल्स लगी हैं। यूरिन बेसिन, लीच पिट शीट्स की व्यवस्था होनी चाहिए। प्रवेश द्वार पर पेंटिंग, शौचालय की सफेद सीमेंट से रंगाई पुताई होनी चाहिए। छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय होने चाहिए।
कैसा है सूरत-ए-हाल
टाइल्स, यूरिन बेसिन शीट आदि का इंतजाम नहीं है। रंगाई-पुताई और पेंटिंग नहीं कराई गई है। गंदगी, झाड़-झंकाड़ उगे हैं। दीवार-दरवाजे सब टूटे पड़े हैं। शौचालयों पर ताला लगाकर निर्माण कर्ताओं ने पीछे मुड़कर नहीं देखा है।

= निरीक्षण के दौरान शौचालयों की सफाई न मिलने पर प्रधानाध्यापकों को कड़ी चेतावनी दी गई थी। सुधार न होने पर कठोर कार्रवाई होगी। मरम्मत के लिए आला अधिकारियों को लिखा जाएगा। सफाई के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी को पत्र लिखेंगे।
ट्ट ललित मोहन पाल, खंड शिक्षा अधिकारी, बाह
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