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नरायच में 14 मकान ढहाए

Agra

Updated Tue, 18 Sep 2012 12:00 PM IST
आगरा। हाईकोर्ट में काउंटर एफिडेविट देने से पहले तालाबों पर अवैध कब्जे हटाने का अभियान चला। जिले की सभी तहसीलों के एसडीएम, तहसीलदार अपने अपने अधीनस्थों के साथ तालाबों का पुरसाहाल लेने दौड़े। सदर तहसील में पांच स्थानों से कब्जे हटाए गए तो एत्मादपुर तहसील में तालाबों से कब्जा हटाने के लिए 14 मकान और दुकानें तोड़ी गईं। लोगों ने मकान ढहाए जाने का विरोध किया, लेकिन जेसीबी धड़ाधड़ चलती रही।
बताते चलें कि आगरा में तालाबों पर अवैध कब्जे को लेकर दाखिल जनहित याचिका में हाईकोर्ट ने तालाबों की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी है। इस पर जिलाधिकारी ने सभी तहसीलों में तालाबों से कब्जा हटाने के साथ 18 सितंबर तक रिपोर्ट मांगी है। इसके बाद सोमवार को तहसीलों से कब्जा हटाने अभियान चला। एसडीएम एत्मादपुर पीडी गुप्ता ने नगला रामबल में अभियान चलाते हुए 14 भवनों को ढहा दिया। अभियान के दायरे में सुंदर पुत्र रघुवीर, वीरू पुत्र फलौरी सिंह, हरी सिंह, जोगेंद्र सिंह पुत्र ज्योतिराम, मानिक चंद पुत्र लक्ष्मण सिंह, देवलाल पुत्र लक्ष्मण सिंह, सुनील पुत्र रामजीलाल, श्रीचंद पुत्र मेघ चंद, जगदीश पुत्र चरन सिंह आदि आए। वहीं छलेसर में तालाब के किनारे पूरन सिंह पुत्र नत्थीलाल द्वारा बनाई गई तीस मीटर लंबी बाउंड्री भी तोड़ी गई।
वहीं सदर तहसील में पांच स्थानों से कब्जे हटाए गए। एसडीएम सदर राजेश कुमार ने बताया कि गैलाना में तालाब की जमीन पर कोठरी बनाकर भूसा रखा जा रहा था। सिकंदरा में नारायणी स्कूल में तालाब की जमीन पर कोठरी बना रखी थी। वहीं बोदला में शौचालय बना कर कब्जा किया गया था। उसे हटाया गया। एसडीएम ने बताया कि बसई मुस्तकिल में सड़क के किनारे जमीन कब्जाने के लिए नक्शा ही बदल दिया गया। सड़क किनारे बने तालाब को नक्शे में पीछे दिखाकर निजी जमीन को तालाब बना दिया और तालाब को निजी जमीन। इसकी भी बाउंड्री तुड़वाई गई। इसके अलावा फतेहाबाद में एसडीएम फतेहाबाद रेखा एस चौहान और राजस्व निरीक्षक सरदार सिंह चौहान ने राजपूत मोहल्ला, कछिपाल, बाईपास रोड, हनुमान नगर, रामनगर, फीरोजाबाद रोड स्थित तालाबों का निरीक्षण किया। एसडीएम ने तालाबों से कब्जा न हटने पर मंगलवार को कार्रवाई की चेतावनी दी। जबकि तहसीलदार किरावली ने कस्बे के तालाबों का निरीक्षण कर सत्यापित किया। कानूनगो व लेखपाल भी सारा दिन अपने-अपने क्षेत्र के तालाबों की रिपोर्ट बनाने में व्यस्त रहे।

सात तालाबों पर स्थायी कब्जा
भू अभिलेखों में शहर में 56 तालाब दर्ज हैं। इसमें सात पर स्थायी निर्माण हो चुका है जबकि तीन पर सरकारी निर्माण है। सूत्रों की मानें तो स्थायी निर्माण का मामला कोर्ट के संज्ञान में है। प्रशासन ने गेंद कोर्ट के पाले में डाल रखी है कि कोर्ट अपना निर्णय दे उसके अनुसार कार्रवाई होगी। वहीं तीन तालाबों पर सरकारी निर्माण को न हटा पाने की दशा में दूसरे स्थान पर तालाब बनाए जा सकते हैं। बाकी तालाबों पर कब्जे हैं, जिन्हें हटाने की कवायद चल रही है।

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खुद सड़क पर सोए, बच्चों को सुलाया पड़ोसी के घर
नगला रामबल के 14 परिवार आए सड़क पर, प्रशासन पर पक्षपात का आरोप

लोगों ने लगाए आरोप
तालाब की मूल जमीन पर बने अमीरों के घर नहीं तोड़े
अधिकतर मकान कई दशक पुराने, कभी कार्रवाई नहीं
रात में आए तहसीलदार ने कहा था बस दीवाल तोड़ेंगे

आगरा। तालाबों से कब्जा हटाने में 14 परिवार बेघर हो गए। बेघर परिवारों के मुखिया का कहना है कि प्रशासन ने पक्षपात कर उनकी छत छीन ली है। प्रशासन ने तालाब की मूल जमीन पर बने मकानों को नहीं तोड़ा, क्योंकि वह पैसे वालों के घर हैं। वह सड़क पर हैं बच्चे पड़ोसी के घर सोने के लिए भेजने पड़े। सिर से छत हटने पर बारिश की रात सड़क पर बिताई।
पेशे से मजदूर 70 वर्षीय राजवीर सिंह का कहना है कि रविवार रात तहसीलदार कुछ लोगों के साथ आए थे और कहा था कि तालाब पर मकान बनाकर कब्जा किया गया है। सामान बाहर निकाल कर रखना कल तोड़ने आएंगे, लेकिन चिंता मत करना केवल दीवार तोड़ेंगे जबकि वह पूरा मकान ढहा गए। बच्चे भी मकान में फंस गए थे, जिन्हें बाद में निकाला गया। मकान तोड़ने आए लोगों को बताया गया कि उनका परिवार यहां पर 80 साल से रह रहा है, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। राजवीर का कहना है कि मकान तालाब पर नहीं बने हैं। तालाब की जमीन पीछे के हिस्से में हैं, जहां पैसे वालों ने घर बना रखें हैं। उनका मकान नहीं तोड़ा गया।
वहीं 50 वर्षीय शिवचरन का कहना है कि परिवार में चार लड़के दो लड़कियां हैं। इतनी रात में लड़कियों को लेकर कहां जाएं। बचपन से यही रहे कभी किसी ने कुछ नहीं कहा। अब कह रहे हैं कि तालाब पर अवैध कब्जा है। सब कुछ खत्म कर दिया साहब, अब क्या करें। वहीं आटा चक्की स्वामी सुंदर सिंह यादव का कहना है कि सालों से रह रहे हैं आज बिना बताए मकान तोड़ दिया। अब बच्चों को क्या खिलाएंगे। चक्की में रखा गेहूं भी नहीं निकाल पाए। वहीं 40 वर्षीय जोगेंद्र सिंह का कहना है कि प्रशासन ने सामान हटाने का मौका ही नहीं दिया। लोगों का कहना था कि प्रशासन ने 14 मकानों को ढहा दिया।
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