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बांझपन के दंश से राहत देगा एसएन

Agra

Updated Fri, 14 Sep 2012 12:00 PM IST
आगरा। घर-आंगन में किलकारी गूंजने का इंतजार लंबा होता जा रहा है। इसका कारण बदलती जीवनशैली के चलते बढ़ते बांझपन के मामले हैं। अभी तक चिकित्सकों के पास इसका सटीक इलाज नहीं है। जिन निजी अस्पतालों में इलाज है भी, वह बहुत महंगा है। ऐसे में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च का एक फैसला बांझपन का दंश झेल रहे दंपतियों के लिए अच्छी खबर लेकर आया है। आईसीएमआर द्वारा बांझपन के कारणों में से एक महिलाओं के जननांगों में टीबी पर शोध के साथ इलाज के लिए पांच सुपर स्पेशलिटी सेंटर बनाए जा रहे हैं। इसमें एसएन मेडिकल कालेज को भी चुना गया है। एसएन के माइक्रोबायलॉजी और स्त्री रोग विभाग द्वारा केंद्र को संचालन किया जाएगा। तीन साल तक मरीजों पर शोध के साथ इलाज होगा।
जननांगों में टीबी से हो रहा बांझपन
गर्भाशय की ट्यूब की खराबी से करीब 30 प्रतिशत बांझपन के मामले सामने आ रहे हैं। इसमें से 80 प्रतिशत ट्यूब खराब होने के मामले जननांगों की टीबी से हो रहे हैं। यह डायग्नोज भी नहीं हो पाता है। इसका इलाज न हो पाने से बांझपन के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

बढ़ते मामलों को देखते हुए यूपी में दो केंद्र
उत्तर प्रदेश में टीबी के मामले काफी हैं। ऐसे में एक केंद्र केजीएमसी, लखनऊ को बनाया गया है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मरीजों पर शोध और इलाज के लिए एसएन मेडिकल कालेज को केंद्र बनाया गया है।

अत्याधुनिक तकनीक से करेंगे डायग्नोज
जननांगों की टीबी को लेप्रोस्कोपी, पीसीआर सहित अत्याधुनिक तकनीक से डायग्नोज किया जाएगा। इसका इलाज टीबी की स्टेज के हिसाब से होगा। टीबी सही होने के बाद भी बांझपन होने पर इसका भी इलाज किया जाएगा। पांचों केंद्र एक दूसरे के संपर्क में रहेंगे।

महिलाओं में बांझपन के कारण
गर्भाशय के ट्यूब में खराबी 30 प्रतिशत (80 प्रतिशत जननांगों की टीबी)
अंडा न बनने और खंडों में खराबी 30 प्रतिशत
गर्भाशय में खराबी और संक्रमण 10 प्रतिशत
अन्य कारण 30 प्रतिशत

पुरुषों में प्रमुख कारण
शुक्राणुओं में कमी और खराबी 80 प्रतिशत
अन्य कारण 20 प्रतिशत

महिलाओं के जननांगों की टीबी को डायग्नोज करना मुश्किल होता है। इसके लिए आईसीएमआर द्वारा एसएन मेडिकल कालेज को सुपर स्पेशलिटी रिसर्च सेंटर बनाया गया है। यहां ऐसे मरीजों का इलाज किया जाएगा।
डॉ. सरोज सिंह, विभागाध्यक्ष स्त्रीरोग विभाग एसएन मेडिकल कालेज


स्त्री रोग विशेषज्ञों की मदद से अत्याधुनिक तकनीक द्वारा टीबी की डायग्नोज की जाएगी। सेंटर में तीन साल तक महिलाओं में जननांगों की टीबी के डायग्नोज की तकनीक तैयार की जाएगी।
डॉ. अंकुर गोयल, विभागाध्यक्ष माइक्रोबायलॉजी विभाग एसएन मेडिकल कालेज


ये बनाए गए सेंटर
एसएन मेडिकल कालेज, आगरा
केजीएमसी, लखनऊ
एम्स, नई दिल्ली
पीजीआई, चंडीगढ़
हैदराबाद
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