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हिंदी सलाहकार समिति ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों से मांगी जानकारी

Lucknow

Updated Sat, 22 Dec 2012 05:30 AM IST
लखनऊ। मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों में हिंदी माध्यम में परीक्षा देने वाले छात्रों की संख्या और ट्रेंड के बारे में पूछा है। एमएचआरडी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में हिंदी में कामकाज परखने के साथ ही परीक्षा प्रणाली में इसकी मौजूदा स्थिति और मांग का भी आकलन कर रहा है। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए एमएचआरडी की ओर से गठित हिंदी सलाहकार समिति ने इस संदर्भ में पत्र लिखकर केंद्रीय विश्वविद्यालयों को पत्र लिखा है। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) को भी समिति ने पत्र लिखा है और प्रशासन विभागों और संकायों के जरिए ये जानकारियां जुटा रहा है। मंत्रालय की ओर से विश्वविद्यालयों को भेजे गए पत्र में पूछा गया है कि प्रश्न हिंदी में उपलब्ध होने और उसका उत्तर हिंदी में देने का विकल्प होने के बावजूद कितने बच्चों ने हिंदी में जवाब दिए। कहा गया है कि इससे बाजार की मांग और छात्रों की पसंद के बारे में पता चलेगा। विश्वविद्यालयों से अपने परीक्षा पैटर्न में हिंदी के ट्रेंड का अध्ययन कराकर इसकी जानकारी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को भेजने को कहा गया है। आदेश के बाद बीबीएयू में गठित हिंदी प्रकोष्ठ में भी हलचल शुरू हो गई है। प्रकोष्ठ ने विभिन्न विभागों एवं संकायों को पत्र लिखकर इस संदर्भ में जानकारी देने को कहा है।
हिंदी में सिलेबस पर विचार ः हिंदी सलाहकार समिति हिंदीभाषी राज्यों में भविष्य में सिलेबस हिंदी में रखने और पढ़ाने को अनिवार्य करने पर विचार कर रही है। इस संदर्भ में विश्वविद्यालयों से सुझाव भी मांगे गए हैं। समिति का कहना है कि यूजीसी को हिंदीभाषी राज्यों के विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में अधिक से अधिक हिंदी में ही विभिन्न विषयों की पढ़ाई की व्यवस्था करने का निर्देश देना चाहिए। इसके लिए संबंधित राज्यों की हिंदी अकादमियों को किताबें एवं सिलेबस छापने को कहना चाहिए। इस बिंदु पर अगली कार्रवाई के लिए यूजीसी ने विश्वविद्यालयों से भी उनका पक्ष मांगा है।

होगा वार्षिक पत्रिका का प्रकाशन ः बीबीएयू की वार्षिक पत्रिका ‘संदेश’ का प्रकाशन फिर शुरू होगा। इसके लिए संपादक मंडल तय कर दिया गया है। वार्षिक पत्रिका के लिए छात्र-छात्राओं के लेख भी आमंत्रित किए गए हैं। हालांकि, ऐसे समय में लेख आमंत्रित किए गए हैं जब विश्वविद्यालय में छुट्टी चल रही है, इसलिए छात्रों की भागीदारी कितनी होगी, इस पर सवाल ही है। शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं छात्रों से 27 दिसंबर तक अपने स्वरचित लेख देने को कहा गया है।
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