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संबद्घता समाप्ति की धमकी भी लॉ कॉलेजों पर बेअसर

Lucknow

Updated Wed, 19 Dec 2012 05:30 AM IST
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के बेलगाम स्ववित्तपोषित लॉ कॉलेजों पर संबद्घता समाप्ति की धमकी का भी कोई असर नहीं है। अनियमितताओं की पुष्टि के बाद लविवि प्रशासन ने छह लॉ कॉलेजों को नोटिस जारी करके कमियां न पूरी करने की वजह पूछा था और समय से जवाब न देने पर संबद्घता समाप्त करने जैसे कड़े कदम उठाने की बात कही थी। स्थिति यह है कि बृहस्पतिवार को जवाब देने की समय-सीमा खत्म हो रही है पर अब तक सिर्फ एक कॉलेज ने ही अपनी सफाई भेजी है। लविवि प्रशासन इस नाफरमानी को गंभीरता से लेते हुए आगामी सत्र से इन कॉलेजों में दाखिले रोक सकता है। लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्घ आठ लॉ कॉलेजों में मानकों की दो कमेटियों द्वारा जांच कराई गई थी। आठों स्ववित्तपोषित लॉ कॉलेजों में मानकों के साथ खिलवाड़ होने की पुष्टि हुई थी। रिपोर्ट आने के एक साल से भी अधिक समय तक चले नोटिस के खेल के बीच भी कॉलेजों ने अपनी स्थिति नहीं सुधारी। विश्वविद्यालय की ओर से भेजी गई नोटिस पर कॉलेजों ने अपना जो जवाब भेजा था उसके भौतिक परीक्षण के लिए दोबारा एक तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई। इसमें विभाग के प्रो. आरआर लायल, डॉ. सीपी सिंह एवं डॉ. आरबी जैसल शामिल थे। इस कमेटी ने भी छह लॉ कॉलेजों में अनियमितता की पुष्टि की, जिसमें लखनऊ लॉ कॉलेज, सेंट मदर टरेसा लॉ कॉलेज, एक्सेल लॉ कॉलेज, नर्वदेश्वर लॉ कॉलेज एवं यूनिटी लॉ कॉलेज शामिल हैं।
रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 38 (7) के अंतर्गत इन लॉ कॉलेजों को लविवि ने नोटिस भेजी। नोटिस में कहा गया कि पहली कमेटी की जांच के बाद पिछले वर्ष नवंबर में उन्हें नोटिस जारी कर कमी को पूरा करने को कहा गया था। उसके बाद कई रिमाइंडर भी भेजे गए। लेकिन दूसरी कमेटी की जांच में भी पुरानी कमियां देखने को मिलीं। ऐसे में कॉलेज स्पष्ट करे कि विश्वविद्यालय के बार-बार कहने पर भी क्यों नहीं इन कमियों को ठीक किया गया। इस नाफरमानी के लिए कॉलेज की संबद्घता क्यों न समाप्त की जाए? मानक पूरे न करने के बताए गए सभी कारणों के प्रमाण सहित कॉलेजों को 20 दिसंबर तक अपना जवाब दाखिल करना था। लेकिन मदर टरेसा लॉ कॉलेज को छोड़कर अन्य पांचों लॉ कॉलेजों ने अपना जवाब नहीं भेजा है। सूत्रों की मानें तो मदर टरेसा लॉ कॉलेज ने भी अपने जवाब में कमियां पूरी न करने का ठीकरा लविवि प्रशासन पर ही फोड़ा है। फिलहाल लविवि प्रशासन इन कॉलेजों द्वारा लगातार की जा रही नाफरमानी को आधार बनाकर नए सत्र से दाखिले रोकने का पूरा मन बना चुका है।
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