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डीआरएम दफ्तर में टेंडर के दौरान बवाल

Lucknow

Updated Tue, 18 Dec 2012 05:30 AM IST
लखनऊ। हजरतगंज में उत्तर रेलवे के डीआरएम ऑफिस में एक बाहुबली सांसद के गुर्गों ने सोमवार दोपहर टेंडर डाल रहे ठेकेदार व उसके साथी की धुनाई कर दी। घंटा भर चले हंगामे के दौरान आरपीएफ के जवान चुप्पी साधे खड़े रहे। पुलिस के पहुंचने पर हमलावर भागे। पुलिस ने पिटे ठेकेदार की रिपोर्ट दर्ज करके हमलावरों की तलाश शुरू की है।
पुलिस के मुताबिक, राजाजीपुरम के शीतलापुरम निवासी ठेकेदार प्रदीप श्रीवास्तव दोपहर 2:30 बजे मड़ियांव के अजीजनगर में रहने वाले अपने साथी पिंटू को लेकर उत्तर रेलवे के डीआरएम ऑफिस में प्रयाग में ट्रेनों की सफाई का टेंडर डालने गया था। कागजी खानापूरी करके दोनों व्यक्ति एएमई सी एंड डब्ल्यू अनंतलाल के कक्ष में पहुंचे और वहां रखे टेंडर बॉक्स में लिफाफा डाला ही था कि कक्ष में साथियों समेत मौजूद सुरेंद्र कालिया भड़क उठा। एक बाहुबली सांसद के गुर्गे सुरेंद्र ने दोनों को धमकाते हुए कहा कि उसकी इजाजत के बगैर टेंडर कैसे डाल दिया? इसके साथ सुरेंद्र व उसके साथी गालीगलौज करने लगे। कक्ष में मौजूद रेलवे के अधिकारी व कर्मचारियों को चुप्पी साधे देख प्रदीप व पिंटू ने आरपीएफ के जवानों से मदद मांगी। उन्हें खामोश देखकर दोनों ने गालीगलौज कर रहे सुरेंद्र व उसके साथियों से विरोध जताते हुए कक्ष से निकलने की कोशिश की। इस पर हमलावरों ने उन्हें पकड़ लिया और पीटने लगे। डीआरएम दफ्तर में बवाल होते देख किसी ने पुलिस को फोन कर दिया। थोड़ी देर में हजरतगंज पुलिस मौके पर पहुंच गई। इस बीच सुरेंद्र व उसके साथियों ने प्रदीप को दुबारा दिखाई देने पर गोली मारने की धमकी दी और उन्हें डीआरएम ऑफिस से बाहर खदेड़ दिया।
हिस्ट्रीशीटर है सुरेंद्र कालिया
प्रदीप व पिंटू ने हजरतगंज कोतवाली में शिकायत की। पुलिस ने सुरेंद्र कालिया व उसके साथियों के खिलाफ संगीन धाराओं में मामला दर्ज करके प्रदीप और पिंटू को अस्पताल भेजा। पुलिस सूत्रों का कहना है कि हिस्ट्रीशीटर सुरेंद्र कालिया पहले भी कई बार गिरफ्तार किया जा चुका है। वह एक बाहुबली सांसद का गुर्गा है और रेलवे के ठेकों पर वर्चस्व बनानेे को लेकर वारदात को अंजाम दिया है। आरोपियों की सरगर्मी से तलाश की जा रही है।
असलहे लेकर जाते हैं टेंडर डालने
डीआरएम कार्यालय में असलहे लेकर जाना प्रतिबंधित है। कार्यालय के गेट पर रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ) की पूरी चेक पोस्ट है। उसके बाद भी ठेकेदार व उनके गुर्गे खुलेआम असलहे लेकर जाते हैं। सूत्रों की मानें तो अफसरों से साठगांठ होने के कारण गेट पर तैनात सुरक्षा कर्मी उन्हें नहीं रोकते। ऐसे में कर्मचारी इन ठेकेदारों से डरते हैं। अधिकारियों की सेवा करने वाले इन ठेकेदारों को अफसर पहले ही बता देते हैं कि टेंडर कितने पर डालना है। गौरतलब है कि वर्ष 2009 में लखनऊ के ही अभियंताओं ने मिलीभगत करके बनारस स्टेशन के बाहर करोड़ों रुपये का काम टेंडर उठने से पहले ही करवा लिया था। नाराज तत्कालीन डीआरएम जेएस सोंधी मामला अखबारों में प्रकाशित होने के बाद कई महीनों तक भुगतान की फाइल पर हस्ताक्षर नहीं किए थे।
अफसर भी डरते हैं ठेकेदारों से
कर्मचारी ही नहीं अफसर भी इन ठेकेदारों से खौफ खाते हैं। पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल हो या फिर उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल दोनों स्थानों पर सांसदों व विधायकों के गुर्गों का बोलबाला है। माननीयों के अलग-अलग नामों से फर्म हैं। इन्हीं फर्मों के नाम पर लाखाें व करोड़ों रुपये के टेंडर हथियाने की कोशिशें होती हैं। ऐसे में बाहर का कोई व्यक्ति टेंडर प्रक्रिया में शामिल नहीं होता। इससे रेलवे में हो रहे कार्य की गुणवत्ता में भी कमी आती जा रही है।
सीनियर कमांडेंट बोले, मेरी जानकारी में नहीं मामला
मैं दिन भर निरीक्षण पर था। मेरी जानकारी में नहीं है कि मंडल कार्यालय में क्या हुआ। अगर टेंडर को लेकर किसी गुट ने किसी दूसरे गुट के लोगों से हाथापाई की है या फिर कोई और बात हुई है तो मैं पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। आरपीएफ सिपाहियों ने बीच बचाव क्यों नहीं किया, इस संबंध में भी पता करवाया जाएगा। डीआरएम परिसर में हथियार लेकर जाना प्रतिबंधित है। अगर हथियार लेकर कोई आया है तो भविष्य में ऐसा न हो उसके लिये सख्त निर्देश दिए जाएंगे।
पंकज गंगवार, वरिष्ठ कमांडेंट, रेल सुरक्षा बल, लखनऊ मंडल
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