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एसइई पर जीबीटीयू में कॉलेजों की बैठक ः मैनेजमेंट कोटा बढ़ाने की मांग नकारी

Lucknow

Updated Sat, 15 Dec 2012 05:30 AM IST
लखनऊ। गौतम बुद्ध प्राविधिक विश्वविद्यालय में शुक्रवार को राज्य प्रवेश परीक्षा (एसईई) के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर कॉलेज निदेशकों की बैठक आयोजित की गई। इस दौरान प्रदेश के तकनीकी एवं प्रबंधन कॉलेजों में लगातार घट रहे दाखिलों के आंकड़े भी चर्चा में रहे। इस दौरान कॉलेजों ने काउंसलिंग कार्यक्रम की अवधि घटाए जाने का सुझाव दिया। एसईई-2013 की प्रवेश परीक्षा 21 एवं 22 अप्रैल को होनी है। इसकी तैयारी के पहले चरण में शुक्रवार को कॉलेजों को एसईई के प्रारूप पर चर्चा के लिए बुलाया गया था। इस दौरान कॉलेजों ने मैनेजमेंट कोटा बढ़ाकर 40 फीसदी की जाने की मांग की। हालांकि अधिकारियों ने उन्हें साफ कर दिया कि यह संभव नहीं है। वजह यह है कि पहले से ही कॉलेजों को 15 फीसदी मैनेजमेंट कोटा दिया गया है। इसके अलावा काउंसलिंग से सीटें न भरने की स्थिति में कॉलेजों को सीधे दाखिले का अधिकार दिया जाता है। इसलिए कोटा बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है। चर्चा के दौरान अधिकारियों एवं कॉलेजों का जोर प्रवेश के आंकड़े बढ़ाने पर ही रहा। कॉलेज प्रतिनिधियों का कहना था कि एसईई की काउंसलिंग एक महीने से भी अधिक चलती है। लंबे कार्यक्रम के चलते दाखिले प्रभावित होते हैं क्योंकि उस अवधि में छात्रों के पास दूसरे कॉलेजों में भी दाखिले के विकल्प खुल जाते हैं। जीबीटीयू प्रशासन ने इस पर विचार का आश्वासन दिया। प्रति कुलपति प्रो. वीके सिंह ने बताया कि कॉलेजों से अपना शैक्षणिक स्तर सुधारने एवं विश्वविद्यालय के मानकों के अनुपालन की भी ताकीद दी गयी जिससे छात्र दूसरे प्रदेशों का रुख न करे।
प्रयोग पर भारी दाखिले का डर ः एसईई प्रवेश प्रक्रिया में बदलावों पर दाखिलों की घटती संख्या का डर भारी पड़ रहा है। जीबीटीयू प्रशासन ने एसईई की आवेदन प्रक्रिया को इस वर्ष पूरी तरह ऑनलाइन करने की कवायद शुरू की थी। लेकिन पिछले वर्ष की ऑफलाइन एवं ऑनलाइन दोनों ही माध्यम से आवेदन की व्यवस्था ही इस वर्ष भी लागू रहेगी। इसके समर्थकों का तर्क यह है कि प्रदेश में बहुत से ग्रामीण इलाकों में रहने वाले छात्र एसईई में आवेदन करते हैं। प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होेने से उन छात्रों का रुझान आवेदन में कम हो सकता है जो इंटरनेट फ्रेंडली नहीं है। पहले से ही आधी सीटों के खाली रहने का दंश झेल रहे कॉलेज ऐसे किसी भी संभावित खतरे के लिए तैयार नहीं है।
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