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पीएचडी दाखिले की अर्हता पूरी नहीं करते शिक्षक

Lucknow

Updated Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय (लविवि) के पूर्व कुलपति प्रो. मनोज कुमार की एक टिप्पणी ने विवि के कई शिक्षकों की योग्यता को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। पूर्व कुलपति ने अपने कार्यकाल के दौरान नियमों के विरुद्ध पीएचडी में दाखिला लेने वाले एक शोधार्थी पर कार्रवाई से सिर्फ इसलिए इनकार कर दिया क्योंकि उनके मुताबिक बीते सालों में लविवि से पीएचडी करने वाले कई शोधार्थी ऐसे थे जो परास्नातक में 55 फीसदी की अर्हता को पूरा नहीं करते थे। इसके बावजूद उन्हें दाखिला मिला और उनमें से कई आज विवि में शिक्षक भी हैं। इस टिप्पणी को पूर्व कुलपति ने शोधार्थी के खिलाफ प्राप्त शिकायती-पत्र पर स्पष्ट रूप से अंकित किया है। उन्होंने फाइल पर यह भी लिखा है कि आरोपी शोधार्थी को तभी सजा दी जाए , जब ऐसे सभी शिक्षकों पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो।
लविवि के शारीरिक शिक्षा विभाग के शोधार्थी अशोक कुमार श्रीवास्तव क्रिश्चयन कॉलेज के शिक्षक डॉ. जी के दुबे के सुपरविजन में पीएचडी कर रहे हैं। कुछ हफ्ते पहले उनकी थीसिस जमा हुई है और वर्तमान में वह सिटी एकेडमी डिग्री कॉलेज में पढ़ा भी रहे हैं। अशोक की पीएचडी पर फर्जीवाड़े के आरोप लगाए गए हैं। लविवि की परिनियमावली में पीएचडी में इनरोलमेंट के लिए परास्नातक में न्यूनतम 55 फीसदी अंक होने चाहिए लेकिन अशोक के स्नातक में जहां 40.6 फीसद अंक हैं, वहीं परास्नातक में महज 52.72 प्रतिशत। इसके बावजूद अशोक कुमार को पीएचडी में न सिर्फ इनरोल कर दिया गया बल्कि कुछ हफ्ते पहले उनकी थीसिस तक जमा करा दी गई। लूटा के महामंत्री नीरज जैन ने 18 सितंबर को तत्कालीन कुलपति प्रो. मनोज कुमार को एक शिकायती-पत्र लिखकर मामले को उठाया था। लूटा महामंत्री ने इस संबंध में सभी साक्ष्य भी प्रस्तुत किए थे। इस पर तत्कालीन कुलपति ने 19 अक्टूबर को टिप्पणी लिखी कि परास्नातक में 55 फीसदी से कम अंक पाने वाले लविवि में कई शिक्षक भी हैं। ऐसे में सभी के खिलाफ एक समान कार्रवाई की जाए। उधर, कुलपति बदलने के साथ ही मामले की जांच दोबारा शुरू कर दी गई है। लविवि रजिस्ट्रार जेबी सिंह ने बताया कि आरोपों की जांच के लिए निर्देश दे दिए गए हैं। जांच होने तक आरोपी अशोक कुमार श्रीवास्तव के साक्षात्कार पर रोक लगा दी गई है।
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