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अभी बढ़ेगी महंगाई, मार्च में मिलेगी राहत

Lucknow

Updated Fri, 09 Nov 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। ‘डीजल के बढ़े दामों का असर इसी सप्ताह से दिखने लगेगा। जैसे-जैसे सप्ताह-दर-सप्ताह गुजरेंगे, महंगाई और बढ़ेगी।’ ये भविष्यवाणी है रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के मौद्रिक नीति विभाग के एडवाइजर-इन-चीफ डॉ. एमडी पात्रा की। हालांकि डॉ. पात्रा दूरगामी तौर पर राहत भरे भविष्य की ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि मार्च 2013 से महंगाई कम होनी शुरू हो जाएगी और महंगाई दर 7.5 से नीचे आएगी यानी हालात सुधरेंगे। इस दर को 5 से नीचे लाने के लिए सरकार और आरबीआई को मिलकर आर्थिक मजबूती के लिए काम करना होगा। हालांकि मौजूदा महंगाई की दर पर सरकार से आरबीआई कतई खुश नहीं है, लेकिन मिलकर ही इन हालात से निकला जा सकता है। डॉ. पात्रा गुरुवार को राजधानी में थे और लखनऊ विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग द्वारा कौटिल्य सभागार में आयोजित ‘भारत में मौद्रिक नीति बनाने की कला’ विषय पर आयोजित व्याख्यान दे रहे थे। व्याख्यान के दौरान डॉ. पात्रा ने मौद्रिक नीति से जुड़ी कई रोचक बातों को साझा किया। उन्हाेंने बताया कि जहां बाकी देश अपनी मौद्रिक नीति महंगाई नियंत्रित करने के लिए बनाते हैं, वहीं हमारे यहां ये नीति आर्थिक विकास दर बढ़ाने, आर्थिक व वित्तीय स्थायित्व जैसे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए बनाई जाती है। यही वजह है कि कार्य क्षेत्र एकाग्र नहीं रह पाता और महंगाई नियंत्रण से बाहर चली जाती है। उन्हाेंने महंगाई के गणित को समझाया कि अगर इसकी दर 5 प्रतिशत से कम रहती है तो यह स्वस्थ अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए अच्छा है, कारोबारी प्रगति का संकेत हैं। यदि दर इसके आगे बढ़ती है तो हमारी 70 प्रतिशत गरीब आबादी बुरी तरह प्रभावित होती है। इस मौके पर वीसी जी पटनायक ने बतौर अध्यक्ष कहा कि आर्थिक प्रगति अच्छी बात है, लेकिन उन 10 प्रतिशत लोगों की प्रगति न हो जो 90 प्रतिशत संसाधनों पर कब्जा जमाए बैठे हैं, बल्कि उस 90 प्रतिशत जनता की जरूरतों को पूरा करने वाली आर्थिक प्रगति चाहिए जो देश के सिर्फ 10 प्रतिशत संसाधनों पर जीवन यापन करने को मजबूर है। आयोजन में अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. हर्ष मोहन और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस समन्वयक डॉ. एमके अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी और प्रोफेसर्स मौजूद रहे।
खतरा : ग्रीस में हमारे लगे हैं 25 अरब डॉलर ः डॉ. पात्रा ने बताया कि यूरोपियन यूनियन संकट में भारत की अर्थव्यवस्था भी फंस गई है। हमारा निर्यात 10 प्रतिशत की दर से गिर रहा है। अकेले ग्रीस में भारत के 25 अरब डॉलर लगे हैं। ग्रीस, इटली, पुर्तगाल, स्पेन, आयरलैंड आदि देशों में अगर हालात नहीं सुधरे तो हमें हमारी आर्थिक प्रगति 5 प्रतिशत से गिरकर 1 प्रतिशत पर आ जाएगी। ऐसे में भारत सरकार की यह मजबूरी है कि वह यूरो जोन संकट को उबारने में उनकी मदद करे।
बुरे हालात : पहले पैसा देता था मार्केट, अब हमसे ले रहा है ःअपने व्याख्यान के दौरान मार्केट लिक्विडिटी पर डॉ. पात्रा ने ग्राफ प्रस्तुत किए और बताया कि किस तरह नवंबर 2009 तक आरबीआई को मार्केट रोजाना त्र1600 करोड़ तक कमाकर दे रहा था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के हालात बिगड़ते चले गए, आज त्र200 से 400 करोड़ आरबीआई ही मार्केट को दे रहा है। उन्हाेंने साफ किया कि आरबीआई की शक्तियां मार्केट में बैलेंस बनाने की है, वह चीजें निर्देशित नहीं करता। इसी नीति के चलते जनवरी और मार्च में रिवर्स रेपो रेट कम करके मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ाई गई।
यूपी को महंगा कर्ज, बाजार में छवि अच्छी नहीं ः वहीं राज्यों को केंद्र से मिलने वाले पैकेज के बारे में उन्हाेंने कहा कि यह पैसा केंद्र मार्केट से जुटाता है। इसकी ब्याज दर भी मार्केट तय करता है जो 5.2 से 8 प्रतिशत तक हो सकती है। कर्ज की अवधि राज्यों के अनुसार तय होती है। डॉ. एमडी पात्रा ने उदाहरण के लिए बताया कि गुजरात के मुकाबले उप्र के लिए पैसा जुटाते वक्त मार्केट ज्यादा ब्याज दर लगाता है क्योंकि यहां निवेश में उसे गुजरात से ज्यादा रिस्क नजर आता है।
उम्मीद की किरण ः डॉ. पात्रा बताते हैं कि सरकार आर्थिक विकास दर चाहती है और हम महंगाई पर नियंत्रण। ऐसे में उन्हाेंने महंगाई पर नियंत्रण करते हुए आर्थिक विकास दर बढ़ाने में केंद्र और आरबीआई को सामंजस्य के साथ काम करने की जरूरत बताई। वित्त मंत्री ने बजट से पहले महंगाई नियंत्रण के लिए उपाय करने का वादा किया था, लेकिन वे मुकर गए। ऐसे तो हालात नहीं सुधर सकते। फिर भी अंतरराष्ट्रीय मार्केट सुधर रहा है। हमें भी प्रयास और उम्मीद दोनों बनाए रखनी होगी।
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