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‘बचा लीजिए सुंदरबनों की सुंदरता’

Lucknow

Updated Fri, 26 Oct 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। ‘मैंने हाल ही देश के सुंदरबनों को देखा, वे बेहद सुंदर हैं, अब तक मानवीय हस्तक्षेप से बचे रहे हैं, लेकिन अब यह संभव नहीं रहा। सैटेलाइट से मिली तस्वीरों के अनुसार यहां हर साल कार्बन की मात्रा बढ़ रही है और जंगल कट रहे हैं। ऐसे में बाहर से आ रही मुसीबत से इन सुंदरबनों को बचाना होगा। मैं चाहता हूं कि एनबीआरआई लखनऊ इसमें देश की मदद करे। यहां की निगरानी के लिए एक प्रोग्राम बनाए और शोध के लिए एक लैब की स्थापना इन्हीं वनों में करे।’ देश के पूर्व राष्ट्रपति भारतरत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आजाद की इस अपील को राजधानी के वैज्ञानिक समुदाय ने पूरे अहतेराम के साथ लिया। मौका था सीएसआईआर के राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान के डायमंड जुबली समारोह का, जिसमें डॉ. कलाम ने देश में पर्यावरण और कृषि से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान तलाशने के लिए युवा वैज्ञानिकों को लक्ष्य करते हुए संस्थान से अपील की।
सुंदरबन के विषय में कलाम ने बताया कि जलवायु परिवर्तन की वजह से यहां की विशाल जैव विविधता को नुकसान हो रहा है। यहां करीब 50 लाख लोग रहते हैं, लेकिन उनसे पर्यावरण को नुकसान नहीं है क्योंकि वे सौर ऊर्जा का उपयोग करते हैं। डॉ. कलाम ने बताया कि यहां न बिजली है न आसान रास्ते। बावजूद, इसकी सुंदरता को लगातार खतरा बना हुआ है। एनबीआरआई यहां अपनी एक लैब स्थापित कर इन खतरों से निपटने पर काम कर सकता है। इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ एनबीआरआई के निदेशक डॉ. सीएस नौटियाल ने स्वागत भाषण में संस्थान की उपलब्धियों के बारे में बताया। वहीं, जेएनयू के वीसी व एनबीआरआई रिसर्च काउंसिल अध्यक्ष प्रो. एसके सोपोरी ने बताया कि संस्थान को अभी भी बहुत काम करना है। जब संस्थान का सर्वश्रेष्ठ सामने आएगा तो इसका फायदा सभी को होगा। सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. एसके ब्रह्मचारी ने बताया कि डॉ. कलाम के आह्वान पर एनबीआरआई ने राष्ट्रपति भवन का गार्डन विकसित किया है, जो गर्व की बात है। साथ ही संस्थान के वैज्ञानिक लगातार साइंस जर्नलों में जगह बना रहे हैं। उप्र राज्यपाल बीएल जोशी ने एनबीआरआई को डायमंड जुबली समारोह पर विशेष मुबारकबाद दीं। डॉ. प्रवेंद्र नाथ ने धन्यवाद भाषण पढ़ा। कार्यक्रम का समापन संस्थान कैंपस में पौधरोपण से हुआ। डॉ. कलाम और राज्यपाल बीएल जोशी ने अपने हाथों से दुर्लभ प्रजाति के रुद्राक्ष (एलिओकार्पस स्पेरिकस) यहां रोपे और संस्थान को विज्ञान की प्रगति में योगदान के लिए शुभकामनाएं दीं।

बोले कलाम, एनबीआरआई क्षेत्रीय मसलों पर करें काम : डॉ. कलाम ने एनबीआरआई के शोध और खोजों की सराहना करते हुए उससे देश में फैली पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं पर सीधे जुड़कर काम करने का आह्वान किया। इस दौरान उन्हाेंने विभिन्न मुद्दे उठाए। वहीं, बॉटेनिकल रिसर्च व उसके आयाम को अपनी भाषण की थीम बनाया।

बनाएं किसानों के लिए एटलस : डॉ. कलाम ने वैज्ञानिकों से एक ऐसा एटलस बनाने को कहा, जिसमें पूरे भारत की कृषि और पशुपालन से जुड़ी जानकारियां हों। इसमें पारंपरिक फसलों और ज्ञान के साथ-साथ उन वैज्ञानिक तौर तरीकों का भी जिक्र हो, जिससे किसान कुछ नया कर सकें। एटलस में क्षेत्र विशेष की मिट्टी, पानी, पोषण की स्थितियों सभी की जानकारी होगी।

जेट्रोपा उत्पादन पर काम करें : उन्हाेंने बताया कि आपके निकटवर्ती इलाहाबाद में जेट्रोपा का उत्पादन तेजी से बढ़ा है। यहां 700 से ज्यादा किसानों ने इसे अपनाया है और इससे हर हेक्टेयर 50 हजार रुपये सालाना तक उपज पा रहे हैं। एनबीआरआई इसे लोकप्रिय बनाने के लिए काम करे। इससे न केवल किसानों को आर्थिक लाभ होगा, बल्कि देश के लिए ईंधन तेल की वैकल्पिक व्यवस्था हो सकेगी।

पौधे वहां भी उगें, जहां बर्फ जमती हो : डॉ. कलाम ने बताया कि कश्मीर में एक बड़ा भूभाग बेकार रहता है। यहां खेती की जा सकती है, लेकिन साल के अधिकतर वक्त यहां बर्फ होने से कुछ उग नहीं पाता है। एनबीआरआई कश्मीर के ही कुछ पौधों पर शोध करते हुए उनके गुण दूसरे पौधों में लाते हुए इस जमीन पर उन्हें उगने लायक बनाने पर भी काम करें।

नार्थ-ईस्ट को बांस से निजात दिलाएं : देश के एक बड़े उत्तर-पूर्वी हिस्से में हाल के वर्षों में बांस के पौधे तेजी से बड़े हैं। इनसे क्षेत्रीय पौधों और दुर्लभ जड़ी-बूटियों के लिए खतरा पैदा हो गया है। ऐसे में इस घुसपैठ से निजात दिलाने में एनबीआरआई को भूमिका निभानी होगी।

बेहतर नस्ल की कपास चाहिए प्रदेश को : डॉ. कलाम ने वैज्ञानिकों को चुनौतीपूर्ण अंदाज में बताया कि विश्व की 12 प्रतिशत कपास भारत में होती है, लेकिन क्वालिटी में अच्छी नहीं होने से यह ज्यादा फायदेमंद नहीं है। ऐसे में एनबीआरआई के वैज्ञानिक बेहतर क्वालिटी की कपास पर काम करें, जो दोगुनी उपज दें, इससे उप्र के गरीब किसानों को मदद मिले।
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