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इस बार इंप्रूवमेंट में बरकरार रहेगी राहत

Lucknow

Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों में इस वर्ष इंप्रूवमेंट देने वाले अभ्यर्थियों पर पुराने नियम ही लागू होंगे। यानी इंप्रूवमेंट या मूल अंक में जो बेहतर होगा वही छात्र की मार्कशीट में जुड़ेगा। नए नियम अगले वर्ष से लागू किए जाएंगे जिसमें इंप्रूवमेंट के नंबर ही आखिरी होंगे। इसके लिए विश्वविद्यालय को अध्यादेश में संशोधन करना होगा। विश्वविद्यालय में अंक सुधार की जो मौजूदा व्यवस्था है उसके अनुसार यदि अंक सुधार की परीक्षा देने पर अभ्यर्थी के अंक मूल परीक्षा से कम आए हैं तो ऐसे में उसके पुराने नंबर ही मार्कशीट में जुड़ते हैं। इस प्रक्रिया में छात्र अंक सुधार में किसी भी स्थिति में नुकसान में नहीं रहते हैं। विश्वविद्यालय ने इस प्रक्रिया में बदलाव का फैसला किया था। इसके पीछे तर्क यह रहा कि अंक सुधार की परीक्षा छात्र अपनी मर्जी से चुनता है। ऐसे में यदि उसकी तैयारी पूरी है और परीक्षा को गंभीरता से ले रहा है तभी शामिल हो। दूसरा आधार यह है कि यदि छात्र के अंक घटते हैं और पुराना अंक बरकरार रहता है तो ऐसी स्थिति में वह परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है। कई विश्वविद्यालयों में इंप्रूवमेंट के अंक को ही मार्कशीट में स्थान दिए जाने का नियम लागू भी है। इन स्थितियों को देखते हुए 28 मार्च को हुई परीक्षा समिति में यह निर्णय किया गया था कि सत्र 2012-13 से जो भी छात्र-छात्राएं इंप्रूवमेंट की परीक्षा में सम्मिलित होंगे, उनके इंप्रूवमेंट परीक्षा में प्राप्त अंक ही अंतिम माने जाएंगे। चाहे यह अंक मुख्य परीक्षा में प्राप्त अंकों से कम ही क्यों न हों। इसके लिए अध्यादेशों में आवश्यक संशोधन कर प्रावधान लागू किया जाएगा। लविवि में बैकपेपर एवं इंप्रूवमेंट के फॉर्म मिलने शुरू हो गए हैं। ऐसे में नियम को लेकर ऊहापोह की स्थिति थी। परीक्षार्थियों का तर्क था कि चूंकि यह व्यवस्था सत्र 2012-13 से लागू होनी है और वह पिछले सत्र का इंप्रूवमेंट देंगे ऐसे में इस वर्ष उन्हें नए नियम के दायरे में नहीं लाना चाहिए। फिलहाल लविवि ने इस वर्ष पुरानी व्यवस्था बहाल रखने का निर्णय किया है। इसके पीछे एक वजह यह भी मानी जा रही है कि अभी तक विश्वविद्यालय ने नए नियम को अध्यादेश में समाहित नहीं किया है। इसलिए भी इसको मौजूदा सत्र में लागू करना संभव नहीं है।
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