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घरेलू सिलेंडरों की बदलेगी शक्ल-ओ-सूरत

Lucknow

Updated Sun, 07 Oct 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। घरेलू एलपीजी वितरण की नई व्यवस्था के बाद सब्सिडी व नॉन सब्सिडी सिलेंडरों की समानता परेशानी पैदा कर रही है। दामों में भारी अंतर के बाद भी एजेंसियों से एक जैसे रंग, स्वरूप व भार वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति की जा रही है। इससे इनके अवैध इस्तेमाल को रोकने में तमाम दिक्कतें पेश आने लगी हैं। इससे छुटकारा दिलाने के लिए घरेलू एलपीजी आपूर्ति से जुड़ी तीनों प्रमुख तेल कंपनियों ने जल्द ही सब्सिडी व नॉन सब्सिडी श्रेणी के सिलेंडरों की अलग पहचान की कवायद शुरू कर दी है। आईओसी से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी की मानें तो आने वाले समय में सब्सिडी व नॉन सब्सिडी घरेलू गैस सिलेंडरों को अलग पहचान देना जरूरी हो जाएगा।
भारत पेट्रोलियम कंपनी से जुड़े एक जिम्मेदार सूत्र ने बताया कि घरेलू श्रेणी के सब्सिडी व नॉन सब्सिडी युक्त सिलेंडरों को रंग के आधार पर अलग पहचान देने की तैयारी चल रही है। इसके अमल में आने से रंग के आधार पर 14.2 किलोग्राम भार वाले सब्सिडी, नॉन सब्सिडी घरेलू व नॉन सब्सिडी एक्जम्पटेड श्रेणी के सिलेंडरों की पहचान दूर से देख कर ही आसानी से हो जाएगी। रंग के आधार पर अलग पहचान देने के पीछे सबसे बड़ा तर्क सिलेंडर कंटेनर के वर्तमान स्वरूप में कोई बदलाव न होना माना जा रहा है। कंपनियों के बॉटलिंग प्लांट स्तर पर रिफिलिंग के समय सिलेंडर कंटेनर के ऊपरी गोल घेरे को अलग-अलग रंग देकर सिलेंडरों को सब्सिडी व नॉन सब्सिडी श्रेणी के बतौर आसान पहचान दी जा सकेगी। सूत्रों का दावा है कि बीते दिनों पेट्रोलियम मंत्रालय स्तर पर दिल्ली स्थित मुख्यालय में हुई एक बैठक में इस प्रस्ताव पर काफी हद तक सहमति भी बन चुकी है। इस प्रस्ताव पर तेल आपूर्ति कंपनियों के स्तर पर एकराय से स्वीकार किए जाने के बाद ही इसकी औपचारिक तौर पर घोषणा की जाएगी।
एजेंसियों के गोदाम व स्टॉक के मूल्यांकन में होगी सख्ती ः इसके साथ ही एलपीजी आपूर्ति करने वाली तेल कंपनियां गैस एजेंसी संचालकों पर भी शिकंजा कसने के लिए उनके गोदाम व स्टॉक के मूल्यांकन व सत्यापन की व्यवस्था में सख्ती लाने की तैयारी में हैं। बीपी व आईओसी के स्तर पर गैस एजेंसियों के संचालकों के गोदाम में सिलेंडरों के स्टॉक को सब्सिडी, नॉन सब्सिडी, कॉमर्शियल व एक्जम्पटेड श्रेणी के तहत रखते हुए इसका मूल्यांकन किया जाएगा। नियमित निरीक्षण के आधार पर इसका सत्यापन कराने की व्यवस्था लागू होगी ताकि एजेंसी संचालक अथवा उनके कर्मचारियों के स्तर पर घरेलू सब्सिडी सिलेंडरों के अवैध उपयोग पर सख्ती से रोक लगाई जा सके।
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