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महज कागजों पर चल रहा आपदा प्रबंधन

Lucknow

Updated Wed, 19 Sep 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। राजधानी में चल रही गैस आधारित फैक्ट्रियों में आपदा प्रबंधन का किसी के पास कोई ठोस इंतजाम नहीं है। फैक्ट्रियां केवल मालिकों की मर्जी की व्यवस्था पर चल रही हैं। फैक्ट्रियों के संचालन का निरीक्षण करने वाले महकमे भी सिर्फ कागजी निर्देश देने भर के लिये हैं। उनके पास न तो विभागीय तालमेल है और न ही कोई संसाधन। सभी अग्निशमन विभाग के भरोसे हैं जो अभी तक शहर में आग बुझाने के लिये अत्याधुनिक उपकरणों का इंतजार कर रहा है। ऐसे में इस तरह के हादसे बड़ी घटनाओं का कारण बन सकते हैं।
टिकैतगंज बर्फ फैक्ट्री हादसे ने राजधानी में औद्योगिक आपदा प्रबंधन की कागजी व्यवस्था की पोल खोल दी। कई विभागों की सक्रियता के बावजूद अमोनिया जैसी गैस के रिसाव को पूरी तरह नियंत्रित करने में 24 घंटे लग गये। पुलिस-प्रशासन को ऐसा कोई विशेषज्ञ नहीं मिल पाया जो बची गैस को सुरक्षित तरीके से डायल्यूट कर सके। भारी रिसाव के वक्त दमकलकर्मियों ने परंपरागत तरीके से दर्जनों गाड़ी पानी फेंककर असर कम किया। लेकिन प्लांट की सप्लाई बंद करने में कई दमकलकर्मियों की सांस उखड़ने लगी। क्योंकि उनके पास आवश्यक सूट नहीं था। उन्हें सामान्य रेस्क्यू सूट में ही गैस वाले क्षेत्र में जाकर सप्लाई बंद करनी पड़ी। अग्निशमन विभाग सूत्रों के मुताबिक गैस प्रभावित क्षेत्र आपदा प्रबंधन के लिये विशेष सूट आता है। उसमें विषैली गैसों से शरीर को बचाने की क्षमता के साथ ऑक्सीजन की भी व्यवस्था होती है क्योंकि गैस प्रभावित क्षेत्र में कार्य करने के लिए सबसे ज्यादा चुनौती वहां रुकने की होती। इसके लिए गैस के असर से बचाव के साथ ऑक्सीजन जरूरी है। एडीएम सिटी ओपी पाठक भी मानते हैं कि गैस रिसाव जैसी स्थितियों से निपटने के लिए संबंधित विभागों के पास पर्याप्त संसाधन नहीं है।
अब तक स्टोरेज टैंक से नहीं निकाली जा सकी गैस
आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों के पास कोई व्यवस्था न होने के चलते ही टिकैतगंज आइस फैक्ट्री के स्टोरेज टैंक में बची गैस हादसे के तीन दिन बाद भी नहीं निकाली जा सकी। इस काम के लिए दो दिन तो विशेषज्ञ की तलाश में गुजर गये। सरकारी स्तर पर कोई व्यवस्था न होने पर प्रशासन ने फैक्ट्री संचालकों की मदद ली जिन्होंने गुड्डू भार्गव नामक विशेषज्ञ को उपलब्ध कराया।
फैक्ट्री में अभी बची है काफी गैस
हादसे के तीन दिन बाद भी आइस फैक्ट्री से अमोनिया गैस खत्म नहीं हो पाई। आइस फैक्ट्रियों में प्लांट की देखरेख करने वाले गुड्डू भार्गव व उनके सहयोगी राम बहादुर एवं जगन्नाथ ने मंगलवार को करीब दो घंटे में 100 किलो गैस पानी के जरिये डायल्यूट की। गुड्डू के मुताबिक 150 किलो से अधिक गैस टैंक में जमी होने केचलते उसे निकाला नहीं जा सका है। बची हुई गैस बुधवार को निकाली जाएगी।
गैस के असर से उबर नहीं पाए पवन व राधा
आइस फैक्ट्री में हुए रिसाव से गैस की चपेट में आकर बीमार पड़े पवन मिश्र व शोभा की स्थिति अभी सामान्य नहीं हो पाई। दोनों का बुलाकी अड्डा स्थित अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है। आइस फैक्ट्री कर्मी पवन परिसर के एक हिस्से में रहता था। रिसाव के वक्त अंदर होने के चलते उस पर गैस का काफी असर हुआ जिससे दो दिन उसे आईसीयू में भर्ती रखा गया। वह अभी भी अस्पताल में ही है। शोभा रविवार आधी रात से अस्पताल में है।
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