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केजीएमयू के सर्जरी विभाग में आग

Lucknow

Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। केजीएमयू में बुधवार शाम में सर्जरी विभाग के पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में शार्ट सर्किट से एयर कंडीनर में आग लग गई। इससे मरीजों और उनके तीमारदारों में अफरातफरी मच गई। जिनके तीमारदार साथ थे, वे अपने मरीज को लेकर वार्ड से बाहर भागे, तो कई मरीज खुद ही अपनी ड्रिप आदि निकालकर जान बचाने के लिए वार्ड से भागे। इस दौरान पूरे वार्ड धुआं से भर गया था। दरअसल पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड के पूरी तरह से एयर पैक होने के कारण धुआं का कहीं से निकलने का रास्ता नहीं था। इसलिए इस दौरान वार्ड के अंदर किसी के जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी। किसी तरह परिजनों ने मरीजों को वार्ड से निकाला। वहीं एक जूनियर रेजीडेंट डॉक्टर ने मरीजों को बचाने के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी। कई घंटे बाद सभी मरीजों को ट्रॉमा सेंटर के आपदा प्रबंधन वार्ड में शिफ्ट कराया गया।
सर्जरी विभाग के पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में 16 बेड हैं। सुबह से हो रही सर्जरी के बाद मरीजों को लगातार एक-एक कर शिफ्ट किया जा रहा था। सबकुछ ठीकठाक चल रहा था कि शाम 5.30 बजे अचानक वार्ड में धुआं भरने लगा। इस पर मरीजों के परिजनों में अफरातफरी मच गई। अभी वो कुछ समझ पाते की एयर कंडीशनर (एसी) भी जलने लगा। माजरा समझते ही तीमारदार अपने-अपने मरीजों को वार्ड से बाहर निकालने में जुट गए। सर्जरी होने के कारण बेड सहित मरीजों को बाहर निकालना मजबूरी था। इसलिए परिजनों में पहले बाहर निकलने में कहासुनी भी हो गई। इस बीच धुआं इतनी तेजी से वार्ड में भरा कि लोगों को दम घुटने लगा। गॉल ब्लाडर स्टोन का ऑपरेशन कराने वाली गोमती नगर निवासी अनुसुइया शुक्ला (42), राघवपुर से आई कैंसर की सर्जरी करा चुकी मंजू, गर्भाशय की सर्जरी कराने वाली रमा (52), धीरेंद्र (7), राघव (आठ माह), मयंक (40), अरुण (28), सीतापुर निवासी हंसराज, आकाश, नीतू, अमित आदि को उनके परिजन वार्ड से बाहर लेकर भागे। सभी को किसी तरह निकालकर बाहर लाया गया। कई मरीजों के तीमारदार वार्ड में नहीं थे, उन्हें भी जान बचाने के लिए स्वयं ही किसी तरह आना पड़ा। इसी बीच कर्मचारियों और सुरक्षा गार्डों ने वार्ड का धुआं बाहर निकालने के शीशे तोड़े। फायर ब्रिगेड को भी सूचना दी गई और एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। इस दौरान मरीज बाहर सड़क पर पड़े रहे। लगभग एक डेढ़ घंटे बाद सभी को ट्रॉमा सेंटर के आपदा प्रबंधन कक्ष में भर्ती कराया गया है। उधर घटना की सूचना मिलने पर सीएमएस प्रो. एसएन शंखवार, प्रॉक्टर प्रो. अब्बास मेहंदी, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. नरसिंह वर्मा आदि भी मौके पर पहुंच गए थे। इसके बाद बचाव कार्य में थोड़ी तेजी आई।
जूनियर डॉक्टरों ने जान पर खेलकर बचाई मरीजों की जान ः सर्जरी विभाग के जिस पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में शार्ट सर्किट से आग लगी, वहां जेआर-1 जोया मिलर की ड्यूटी थी। हाउस ऑफिसर के रूप में जोया ने अपनी भूमिका बखूबी निभाई। उसने मरीजों को बाहर निकालने में तत्परता दिखाई। यहां तक इस दौरान उसकी एप्रेन और हाथ पूरी तरह काले हो गए। जेआर-3 रवि कुमार और अक्षय आनंद ने भी मरीजों को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस दौरान वहां डॉ. अरशद भी मौजूद थे।
ड्रिप हाथ से नोंच कर बाहर भागी नैंसी ः पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड के जिस एसी में शार्ट सर्किट से आग लगी। उसके नीचे नैंसी सोनकर (22) का बेड था। नैंसी सर्जरी के बाद बेड पर आराम कर रही थी। जबकि उसकी मां किसी कार्य से बाहर चली गई थी। जब आग लगने की सूचना मिली तो वो अपनी बेटी को बचाने के लिए वार्ड में भागी। लेकिन इससे पहले ही नैंसी किसी तरह भागते हुए अकेली बाहर निकली। उसके हाथ में लगी हुई ड्रिप निकल गई थी। पूरा हाथ खून से सना हुआ था। किसी तरह उसे संभाल कर बाहर निकाला गया। इस दौरान कई ऐसे भी मरीज थे। जिन्हें ऑक्सीजन के सहारे रखा हुआ था। उन्हें भी ऑक्सीजन सिलिंडर के साथ बाहर निकाला गया। सीएमएस प्रो. एस.एन. शंखवार का कहना है कि किसी भी मरीज को नुकसान नहीं पहुंचा है। समय रहते सभी को सुरक्षित निकाल लिया गया था।
पीडियाट्रिक सर्जरी वार्ड तक पहुंचा धुआं ः पोस्टऑपरेटिव वार्ड में आग लगने के कारण उसके ऊपर स्थित पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में भी धुआं भर गया। वहां भी इस दौरान भी 20 से अधिक बच्चे भर्ती थी। जब वहां धुआं भरा और नीचे के कमरे में आग लगने की सूचना फैली तो पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के हेड प्रो. एस.एन. कुरील ने मौके पर पहुंच कर सभी बच्चों को सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग में शिफ्ट कराया। वहां भी एक-एक बेड पर दो बच्चों भर्ती कराए गए। हालांकि बाद में बच्चों को ट्रॉमा सेंटर के डिजास्टर मैनेमेंट वार्ड में शिफ्ट करा दिया गया। ट्रॉमा सेंटर के सह प्रभारी डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि 40 मरीजों को डिजास्टर मैनेजमेंट वार्ड में भर्ती किया गया है। देर रात को पीडियाट्रिक सर्जरी वार्ड के बच्चों को वापस उनके विभाग भेज दिया गया था।
चिविवि में अब तक हुए हादसे
14 जनवरी 2006 सीएसएमएमयू प्रशासनिक भवन में अग्निकांड
13 जुलाई 2010 चिविवि के एसपी हॉस्टल के किचन में लगी आग, तीन झुलसे
16 सितंबर 2010 दंत संकाय के पीरियोडॉन्टिक्स विभाग में सुबह
16 सितंबर 2010 दंत संकाय के प्रॉस्थेडॉन्टिक्स विभाग में शाम को
13 जुलाई 2010 सरदार पटेल छात्रावास के किचन में गैस सिलेंडर से आग
7 मार्च 2011 सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग की ओटी में आग
9 मार्च 2011 सीएसएमएमयू में कम्प्यूटर सेल में शार्ट सर्किट से आग
11 मई 2011 रुमेटोलॉजी विभाग में एसी प्लांट में आग
17 जून 2011 रुमेटोलॉजी विभाग में शार्ट सर्किट से हादसा
15 सितंबर 2011 सीएसएमएमयू रेडियोडायग्नोसिस विभाग में एमसीबी जली
25 सितंबर 2011 सर्जरी विभाग मेें शार्ट सर्किट से ओटी के कॉटन स्टोर में लगी आग
5 अप्रैल 2012 चिविवि के ब्लड बैंक में शॉट सर्किट से लगी आग
26 मार्च 2012 क्वीन मेेरी में एचआईवी काउंसलर के कमरे में एसी में लगी आग

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