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कंपनी सेक्रेटरीज में चमके राजधानी के मेधावी

Lucknow

Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। द इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटीज के जून सत्र का रिजल्ट शनिवार को जारी हुआ। राजधानी के मेधावियों ने भी परीक्षा में अपनी चमक दिखाई है। फाउंडेशन कोर्स में 257, एक्जीक्यूटिव में 248 एवं प्रोफेशनल एग्जाम में 131 छात्र लखनऊ क्षेत्र से उत्तीर्ण हुए हैं। प्रियांजली अग्रवाल, निकिता अग्रवाल एवं पारूल अग्रवाल ने क्रमश: प्रोफेशनल में प्रथम, द्वितीय एवं तीसरी रैंक हासिल की एवं प्रोफेशनल प्रोग्राम के सभी चार मॉड्यूल पहले प्रयास में ही निकाल लिए। प्रियांजली अग्रवाल को ऑल इंडिया 17वीं रैंक मिली है। फाउंडेशन में सनी जायसवाल, रबाब जायदी, रितेश खत्री एवं स्वाति रावत तथा एक्जीक्यूटिव में सागर त्रिपाठी, श्रेयस जायसवाल तथा गगन दीप को क्रमश: पहला, दूसरा एवं तीसरा स्थान मिला। खास बात यह है कि अधिकांश मेधावियों ने बिना कोचिंग ही सफलता का परचम लहराया है।
बिना कोचिंग ही मेरिट में रही प्रियांजली ः लखनऊ विश्वविद्यालय के बायो केमिस्ट्री विभाग के अध्यक्ष प्रो. एसके अग्रवाल एवं केंद्रीय विद्यालय में शिक्षिका डॉ. अलका अग्रवाल की बेटी प्रियांजली अग्रवाल ने पहले प्रयास में ही सीएस की मेरिट में स्थान बनाया है। लखनऊ जोन में पहले स्थान पर रही प्रियांजली को ऑल इंडिया 17वीं रैंक मिली है। प्रियांजली एक साथ तिहरे मोर्चे पर जुटी हैं और सभी में उसका शानदार प्रदर्शन रहा। 2008 में सीमएएस गोमतीनगर से 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद प्रियांजली ने श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में बीकॉम में दाखिला लिया। पिछले सत्र में उन्होंने अपना बीकॉम पूरा किया और इस समय वह सीए फाइनल में हैं। प्रियांजली कहती हैं कि एक साथ तीन परीक्षाओं पर ध्यान देने के लिए टाइम मैनेजमेंट सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर था। वह कहती हैं कि इन परीक्षाओं के लिए कोचिंग के पीछे भागने से अच्छा है कि आप स्वयं पढ़ाई करें एवं शिक्षकों की मदद लें। कोचिंग में चार घंटे बरबाद करने से कहीं अच्छा आउटपुट आपकी घर पर की गई पढ़ाई से मिलता है। आज कोचिंग जरूरत से ज्यादा ट्रेंड बनती जा रही है। इससे बचें। बस इस पर फोकस करें कि किस समय क्या और कितना पढ़ने की जरूरत है।

शिक्षक-छात्रा दोनों ही भूमिका में रही निकिता ः आशियाना के व्यवसायी प्रमोद कुमार अग्रवाल एवं इंदु देवी अग्रवाल की बेटी निकिता ने न सिर्फ पहले प्रयास में एक्जीक्यूटिव एवं प्रोफेशनल के सारे मॉड्यूल क्लियर किए हैं बल्कि लखनऊ जोन में प्रोफेशनल एग्जाम में दूसरा स्थान भी बनाया है। निकिता ने यह सफलता शिक्षक की नौकरी के साथ पढ़ाई करते हुए पाई है। बकौल निकिता, 2007 में नवयुग गर्ल्स डिग्री कॉलेज से बीएससी करने के बाद उन्होंने रामस्वरूप कॉलेज से एमबीए किया। मंदी के दौर में अपेक्षित नौकरी नहीं मिली तो नए विकल्प तलाशने के बारे में सोचना पड़ा। इस दौरान उन्होंने राजधानी के ही एक मैनेजमेंट कॉलेज में शिक्षण शुरू कर दिया। चार्टर्ड अकाउंटेंट बड़ी बहन ने कंपनी सेक्रेटरी करने की सलाह दी। निकिता बताती है कि सीएस के कुछ पेपर एमबीए में कॉमन हैं। स्टूडेंट्स को पढ़ाते समय उनका रिवीजन भी हो जाता था, जिससे फायदा मिला। कोचिंग की कभी जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि उसके मैटेरियल का स्तर बहुत अच्छा नहीं लगा। कोर्स मॉड्यूल से ही अधिकांश सवाल पूछे जाते हैं इसलिए उस पर ही ध्यान केंद्रित किया। वह कहती हैं कि छात्र स्वयं पर विश्वास रखें एवं फोकस के साथ तैयारी व परीक्षा दें तो पहले प्रयास में ही सारे मॉड़्यूल क्लियर करना कोई बड़ी बात नहीं है।

पिता के नक्शे कदम पर पारुल ः अलीगंज निवासी सीए पवन अग्रवाल एवं प्रतिमा अग्रवाल की बेटी पारुल अग्रवाल ने पिता की परंपरा को आगे बढ़ाया है। पारुल कंपनी सेक्रेटरीज में लखनऊ जोन में तीसरे स्थान पर रही है। 2008 में सीएमएस अलीगंज से 12वीं पास करने के बाद पारुल ने सीपीटी क्वालीफाई किया और इसके बाद सीए में दाखिला ले लिया। वर्ष 2009 में उन्होंने सीएस फाउंडेशन में प्रवेश लिया। पारुल बताती है कि सीएस अब इंडस्ट्री में जॉब के लिए बेहतर अवसर की संभावनाओं को बढ़ा रहा है। इसलिए इस डिग्री को लेना भी मुफीद लगा। बकौल पारुल, उन्होंने सीएस के लिए कोई कोचिंग नहीं की थी। बस स्टडी मॉड्यूल, पिछले साल के सवालों और खासकर आंसर पैटर्न पर ध्यान केंद्रित किया। पारूल कहती हैं कि नियमित अध्ययन आवश्यक है, जो रिफरेंस बुक या स्टडी मॉड्यूल कोर्स के दौरान मिलते हैं उनको ध्यान से पढ़ें और गाइड बुक से परहेज करें। तैयारी ठीक रहेगी तो पहले प्रयास में ही सारे लेवल क्लियर हो जाएंगे। फिलहाल पारुल ने भी पिता के साथ सीए की प्रैक्टिस शुरू की है, लेकिन आगे चलाकर उनका इरादा जॉब करने का है।

सागर का सफलता का दौर जारी ः राजधानी के शहादतगंज निवासी एडवोकेट वीपी त्रिपाठी के पुत्र सागर त्रिपाठी अपनी सफलता की परंपरा को लगातार बनाए हुए हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से वर्ष 2011 के बीकॉम ग्रेजुएट सागर ने कंपनी सेक्रेटरीज के दूसरे चरण यानी एक्जीक्यूटिव एग्जाम में राजधानी में पहला पायदान हासिल किया है। दोनों मॉड्यूल उन्होंने पहले प्रयास में ही निकाले हैं और आगे फाइनल में यह प्रदर्शन जारी रखने के लिए प्रयासरत है। शहादत इस समय सीए फाइनल ईयर के स्टूडेंट है। वर्ष 2009 में इसके इंटर पाठ्यक्रम में भी उन्होंने लखनऊ में पहला स्थान हासिल किया था। सागर कहते हैं कि योजनाबद्ध अध्ययन सबसे आवश्यक है दूसरा उसको नियमित करना भी प्राथमिकता में रखें। पढ़ाई चार घंटे की हो या छह घंटे वह बाधित नहीं होनी चाहिए। वह बताते हैं कि सीएस की डिमांड आज अच्छी प्लेसमेंट में बढ़ी है इसलिए सीए की साथ ही सीएस करने का रुझान अधिक विकसित हुआ है।

नौकरी के साथ ही पढ़ाई भी रही उम्दा ः ऐशबाग के रहने वाले एडवोकेट केके अग्रवाल एवं रेनू जायसवाल के बेटे श्रेयस अग्रवाल ने नौकरी के साथ ही पढ़ाई में खुद को उम्दा साबित किया है। वर्ष 2007 में चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने के कुछ दिन बाद उन्होंने स्टेट बैंक कानपुर में जॉब शुरू कर दी। कंपनियों का प्रोफाइल देखते-देखते श्रेयस को यह समझ में आया कि इंडस्ट्री के कामकाज के बदलते पैटर्न में कंपनी सेक्रेटरीज की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो गई है। इसके बाद उन्होंने सीएस की पढ़ाई शुरू की। फिलहाल दूसरे चरण यानी एक्जीक्यूटिव एग्जाम में उन्होंने लखनऊ जोन में दूसरा स्थान हासिल किया है। श्रेयस कहते हैं कि चुनिंदा पढ़ने का दृष्टिकोण आपको बदलना होगा। हर चीज को बारीकी से समझना एवं पढ़ना जरूरी है क्योंकि कार्य क्षेत्र लगातार व्यापक हो रही है। कड़ी मेहनत करें और अपनी क्षमता पर विश्वास रखें रिजल्ट हमेशा बेहतर रहेगा।
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