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लविवि ने जारी किया छात्रसंघ का संविधान

Lucknow

Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय ने नये सत्र के प्रस्तावित चुनावों के लिये छात्रसंघ संविधान की घोषणा कर दी है। विश्वविद्यालय ने पुराने छात्रसंघ संविधान में कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन किये हैं। पहले संविधान में केवल ‘द यूनियन’ शब्द का प्रयोग था लेकिन इस बार नाम स्पष्ट करते हुये ‘कांस्टीट्यूशन ऑफ द लखनऊ यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन’ कर दिया गया है। छात्रावासों, फैकल्टी एवं आरक्षित संवर्ग के छात्रों की भागीदारी छात्रसंघ कार्यकारिणी में पहले से जहां बढ़ी है वहीं विवेकाधीन कोष एवं आपातकालीन खर्च के मद में भी संशोधन किया गया है।
छात्रसंघ चुनाव के लिये लिंगदोह समिति की सिफारिशों को यथावत स्वीकार कर लिया गया है। संविधान में विश्वविद्यालय की प्रगति एवं नये पाठ्यक्रमों के संचालन को देखते हुये बदलाव किये गये हैं। इसमें एक महत्वपूर्ण परिवर्तन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज की हिस्सेदारी तथा छात्रावासों की भागीदारी बढ़ाने से संबंधित है। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से चुनाव कराने की अपनी मंशा लविवि प्रशासन ने एक बार फिर स्पष्ट कर दी है और इसे संविधान का हिस्सा बनाया है। हालांकि विकल्प के तौर पर बैलेट के इस्तेमाल की व्यवस्था को भी सुरक्षित रखा गया है। जन्मतिथि निर्धारण को लेकर भी लविवि प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। इसके तहत जिस दिन चुनाव के लिये नामांकन शुरू होगा उस तिथि को प्रत्याशी की आयु की अर्हता देखी जाएगी।

छात्रसंघ संविधान में जो हुये बदलाव
- छात्रसंघ के अंतर्गत कला, विज्ञान, वाणिज्य, शिक्षाशास्त्र, लॉ के अलावा फाइन आर्ट्स व आईएमएस का भी एक-एक प्रतिनिधि होगा। अभी तक इनकी भागीदारी नहीं थी।
- 10 पुरुष छात्रावासों तथा 5 महिला छात्रावासों के प्रतिनिधि जनरल काउंसिल के सदस्य होंगे। अभी तक 11 छात्रावासों की ही काउंसिल में भागीदारी थी।
- काउंसिल में ओबीसी के तीन तथा एससी/एसटी के दो प्रतिनिधि शामिल होंगे। अभी तक काउंसिल में एससी/एसटी के पांच प्रतिनिधियों का प्रावधान था।
- छात्रसंघ अध्यक्ष आकस्मिक व्यय के रूप में एक हजार तथा सचिव पांच सौ रुपये खर्च कर सकेंगे। पहले इसकी सीमा महज 50 रुपये थी।
- छात्रसंघ पदाधिकारियों को अपना वार्षिक बजट शपथ ग्रहण के एक माह के भीतर प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। पहले 15 अक्टूबर की तिथि निर्धारित की गयी थी।
- वोटिंग के लिए सुविधानुसार बैलेट या ईवीएम का प्रयोग किया जाएगा।
- पांच छात्राएं, पांच मेरिट होल्डर विद्यार्थी तथा स्पोर्ट्स में बेहतर प्रदर्शन करने वाले एक स्टूडेंट को भी काउंसिल का हिस्सा बनाया जाएगा।
- संविधान में लिंगदोह की सिफारिशों को यथावत शामिल किया गया है।


प्रति छात्र 14 रुपये चुनाव प्रक्रिया में होंगे खर्च ः लखनऊ विश्वविद्यालय ने छात्रसंघ मद के रूप में प्रति छात्र वसूले जाने वाले 75 रुपये के खर्च का विभाजन भी संविधान में करने की कोशिश की है। 14 रुपये प्रति छात्र छात्रसंघ चुनाव के खर्च के रूप में उपयोग किया जाएगा। 12 रुपये विभागीय खर्चोें के लिए प्रति छात्र आवश्यकतानुसार खर्च किये जा सकेंगे। 12 रुपये प्रति छात्र डिस्पेंसरी मद के लिए आरक्षित रहेंगे जबकि 12 रुपये एथलेटिक्स एसोसिएशन को जाएगा। छात्रसंघ की कार्य समिति छात्रसंघ की होने वाली कुल आय का तीन फीसदी अपने विवेक पर खर्च कर सकेगी। विश्वविद्यालय में लगभग 40 हजार विद्यार्थी पंजीकृत हैं। ऐसे में उनके शुल्क से मिलने वाली धनराशि लगभग 30 लाख रुपये है। इस हिसाब सेे यह धनराशि लगभग 91 हजार रुपये के आस-पास पहुंचेगी। हालांकि इस पर आमसभा से मुहर लगनी जरूरी होगी।

राइट टू रिकॉल भी संविधान का हिस्सा ः देश के संसद से लेकर सड़क तक भले ही राइट टू रिकॉल लागू करने की मांग अभी चर्चा से आगे न बढ़ पायी हो लेकिन लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रसंघ संविधान का यह पहले से ही प्रमुख हिस्सा रहा है। नये छात्रसंघ संविधान में भी राइट टू रिकॉल की व्यवस्था को बनाये रखा गया है। छात्रसंघ की काउंसिल किसी भी पांच सदस्यों को वापस बुला सकेगी। इसके लिये अध्यक्ष को लिखित प्रत्यावेदन देने के साथ ही स्टूडेंट काउंसिल के दो-तिहाई सदस्यों की सहमति जरूरी होगी। इसके लिए कम से कम दस दिन की नोटिस देना जरूरी होगा। कोरम के लिए काउंसिल के पचास फीसदी सदस्यों यानी न्यूनतम 25 सदस्यों का होना जरूरी होगा। इसी तरह काउंसिल से संबद्ध संस्थाओं मसलन, फैकल्टी, छात्रावास आदि को भी अपने प्रतिनिधियों को वापस बुलाने का अधिकार होगा। इसके लिये छात्रसंघ के संरक्षक अर्थात कुलपति को प्रत्यावेदन देना होगा जिसमें संस्था के एक तिहाई सदस्यों की सहमति आवश्यक होगी। एक सप्ताह का नोटिस देना भी अनिवार्य होगा।

200 छात्र ला सकेंगे अविश्वास प्रस्ताव ः छात्रसंघ पदाधिकारियों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की व्यवस्था को भी संविधान में बनाये रखा गया है। संविधान का उल्लंघन करने, अपने कार्यों की उपेक्षा या छात्रहित के खिलाफ काम करने की दशा में पदाधिकारियों या छात्रसंघ कार्यकारिणी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाया जा सकेगा। अविश्वास प्रस्ताव आमसभा में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके लिये कम से कम दो सौ साधारण सदस्यों को कुलपति को लिखित में अनुरोध पत्र देना होगा। आमसभा इसके बाद न्यूनतम 14 दिन की नोटिस जारी करेगी। आमसभा के मौजूद सदस्यों के दो तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पास किया जा सकेगा। कोरम के लिये कम से कम 500 सदस्यों का होना अनिवार्य होगा। अविश्वास प्रस्ताव पास होने के दस दिन के भीतर नया चुनाव कराया जाएगा।
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