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शुल्क प्रतिपूर्ति के इंतजार में टूटते सपने

Lucknow

Updated Sun, 19 Aug 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। आर्थिक रूप से कमजोर तबके के बच्चों की उच्च शिक्षा में मदद के लिए सरकार शुल्क शुल्क प्रतिपूर्ति व स्कॉलरशिप की योजनाएं चलाती है। इसी के आसरे में बेहद गरीब परिवारों के कई युवा इंजीनियरिंग, फार्मेसी, मैनेजमेंट जैसे महंगे कोर्स में एडमीशन ले लेते हैं। लेकिन वक्त पर शुल्क प्रतिपूर्ति व स्कॉलरशिप की राशि जारी न होने से कोर्स बीच में छोड़ने की नौबत आने लगी है।
राजधानी में ऐसे कई विद्यार्थी हैं जिन्हें समाज कल्याण विभाग द्वारा समय से शुल्क प्रतिपूर्ति न देने की कीमत अपना कॅरिअर बीच में छोड़ कर चुकानी पड़ी। विकास तिवारी ने वर्ष 2010-11 में बीसीए में एडमीशन लिया था। विकास के अनुसार सामान्य वर्ग में उन्हें 25 हजार रुपये की शुल्क प्रतिपूर्ति मिलनी थी, जो अब तक नहीं दी गई। गरीब किसान के बेटे विकास ने बताया कि उन्होंने लोन लेकर कॉलेज की फीस दी थी। अब 2011-12 के समेस्टर की फीस देने में उनके पिता सक्षम नहीं है, जबकि कॉलेज प्रबंधन ने साफ कर दिया है कि फीस देने के बाद ही उन्हें क्लास अटैंड करने दी जाएगी। अब वे कोर्स छोड़कर कोई जॉब करने व प्राइवेट स्टूडेंट के तौर पर बीएससी करने का विकल्प तलाश रहे हैं। ऐसी ही स्थिति शिल्पी मिश्रा की है जिन्हाेंने रामेश्वरम इंजीनियरिंग कॉलेज के बीफार्मा कोर्स में एडमीशन लिया। फर्स्ट ईयर की फीस 78 हजार 950 रुपये थी। उनके पिता जगन्नाथ मिश्रा ने बताया कि किसी तरह 40 हजार रुपये जमा करवाकर प्रवेश दिलाया था। उम्मीद थी कि सरकारी योजना के तहत कुछ मदद मिल जाएगी। लेकिन ऐसा हो न सका और अब वे समझ नहीं पा रहे हैं कि बीते सत्र की बैलेंस फीस और नए सत्र की फीस के लिए रकम कैसे जुटाएं। वे विभाग और कॉलेज दोनों से इस बारे में मदद मांग चुके हैं, लेकिन राहत नहीं मिली है। दूसरी ओर कॉलेज चेयरमैन सुरेंद्र शुक्ला ने कहा कि करीब 200 विद्यार्थियों में से 10 प्रतिशत को ही अब तक शुल्क प्रतिपूर्ति मिली है। वे यह आश्वासन तो देते हैं कि बीते सत्र की बैलेंस फीस के लिए सरकार द्वारा पैसा जारी होने का इंतजार किया जाएगा, लेकिन मौजूदा सत्र की फीस के लिए इंतजार करने को तैयार नहीं हैं। समाज कल्याण विभाग ने अगले कुछ हफ्तों में सभी बकाया शुल्क प्रतिपूर्ति जारी करने का आश्वासन दिया, लेकिन सैकड़ों विद्यार्थियों के सामने इन हालात में अपना कोर्स छोड़ने का खतरा पैदा हो गया है। कॉलेज भी मान रहे हैं कि रकम जारी होने दिसंबर तक का वक्त लग सकता है।
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