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बीमा कंपनी में डिस्पैचर की नौकरी भी की थी नागर जी ने

Lucknow

Updated Fri, 17 Aug 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। प्रख्यात साहित्यकार अमृतलाल नागर के बारे में शायद कुछ लोगों को ही पता हो कि उन्होंने एक बीमा कंपनी में डिस्पैचर की नौकरी भी की थी। हालांकि उनका जन्म आगरा में हुआ था, जहां उनका ननिहाल थी और बाद में ससुराल भी हुई, लेकिन लखनऊ उनकी कर्मभूमि बनी। यह नौकरी भी उन्होंने लखनऊ में ही की।
नागर जी के बेटे शरद नागर बताते हैं कि यह 1935 की बात है। उसी वर्ष उनके पिता राजाराम नागर का देहांत हुआ। मेरे पिता जी मेरी माता जी को 1934 में ही लखनऊ ला चुके थे और 1935 में मेरे बड़े भाई कुमुद नागर के पिता भी बन चुके थे। उन्होंने बीमा कंपनी के लखनऊ कार्यालय में डिस्पैचर की नौकरी शुरू की, लेकिन केवल 18 ही दिनों तक नौकरी कर सके। पिता की मृत्यु के बाद नागर जी ने यह कुछ दिनों की नौकरी तो की ही अपने संसाधनों से अपनी कहानियों का संग्रह छपवाने का महत्वपूर्ण कार्य भी किया। 1935 में उनका ‘वाटिका’ कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुका था। 17 अगस्त को जन्में नागर जी उस समय 19 वर्ष के थे। 1939 में उन्होंने नवलकिशोर प्रेस और ‘माधुरी’ के संपादकीय विभाग में कार्य किया, लेकिन अवैतनिक। अमृतलाल नागर इसके बाद मुंबई (तत्कालीन बंबई) चले गए और 1940 से 1947 तक उन्होंने फिल्म उद्योग में अपना योगदान दिया। शरद नागर बताते हैं कि उन्होंने मुंबई और चेन्नई के फिल्म उद्योग में कार्य किया तथा पटकथा एवं संवाद लेखन करते रहे। इन वर्षों में उन्होंने बहूरानी, कुंवारा बाप व राजा (निर्माता- निर्देशक किशोर साहू), संगम ( निर्माता-नवयुग चित्रपट), उलझन ( निर्माता-एन.आर.आचार्य), पराया धन (निर्माता-नितिन बोस), किसी से न कहना (निर्माता-लीला चिटनिस, श्री ग्वालानी), कल्पना (निर्माता-उदयशंकर), गुंजन (निर्माता-वीरेन्द्र देसाई), चोर (निर्माता-सिंह आर्ट प्रोडक्शन) जैसी फिल्मों के पटकथा, संवाद लिखे। इनके अतिरिक्त उन्होंने कुछ रूसी फिल्मों को हिंदी में भी डब किया। कम ही लोग जानते हैं कि अमृतलाल नागर जी के भाई रतनलाल नागर ने फिल्मउद्योग में काफी ख्याति अर्जित की थी, जबकि दूसरे भाई मदनलाल नागर प्रसिद्ध चित्रकार बने।
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