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घर से जाओ खाके, तो बाहर मिले पकाके: आशाराम बापू

इतना तो मजदूर भी जानता है कि भले गरीबी है, फिर भी काम पर जाना है तो कुछ रोटी खाकर जाऊँ। ऐसे ही आपको भी जब बाहर किसी से मिलना है तो अंदर की एक-दो प्याली पीकर फिर जाइये।
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