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प्रकाश पादुकोण को नन्‍हें लक्ष्य से काफी उम्मीदें

नई दिल्ली/हेमंत रस्तोगी

Updated Sat, 13 Oct 2012 11:00 PM IST
prakash padukone hope with lakshya
प्रकाश पादुकोण की पारखी नजरों ने जब से इस नन्हे बालक को देखा है। उसी पर ध्यान केंद्रित किए हैं। नन्हे लक्ष्य सेन में पूर्व वर्ल्ड और ऑल इंग्लैंड चैंपियन प्रकाश 2020 ओलंपिक पदक विजेता का अक्स देख रहे हैं। 11 साल के इस बालक को न सिर्फ उन्होंने बंगलूरू स्थिति अपनी अकादमी में बुलाया, बल्कि उसकी हर तरह की ट्रेनिंग, विदेशी दौरों का खर्च एकेडमी उठा रही है। कहने का मतलब अल्मोड़ा का लक्ष्य प्रकाश का चहेता बन गया है। उसने भी यह भरोसा कायम रख शनिवार को जकार्ता में एस्टेक ओपन का अंडर-13 सिंगल्स खिताब जीता।
लक्ष्य के नए कारनामे पर प्रकाश ने अमर उजाला से उसकी तारीफों के पुल बांधना शुरू कर दिए। सच्चाई यह है कि वह अपने से ज्यादा प्रतिभाशाली उसे मानते हैं। उनके मुंह से छूटते ही निकला। इसमें दोराय नहीं उसकी उम्र में उनके पास ऐसा टैलेंट नहीं था। उसके पास जैसे नेचुरल स्ट्रोक हैं।

उन्होंने किसी दूसरे में नहीं देखे। प्रकाश खुलासा करते हैं कि ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट के जरिए वह उसे 2020 ओलंपिक पदक विजेता के रूप में तैयार कर रहे हैं। उसमें ओलंपिक पदक विजेता के गुण दिख रहे हैं। हालांकि वह इन शब्दों को जल्दबाजी मानेंगे। उनका उसकी लंबाई पर ध्यान है। लक्ष्य का चीजों को समझना और उसे हू-ब-हू कोर्ट पर उतारना प्रकाश को पसंद है। इसलिए वह कहते हैं कि यह लड़का आने वाले दिनों में देश के लिए सितारा बनेगा।

लक्ष्य ने शनिवार को इंडोनेशिया के एमएस रिजाल को सीधे गेमों 21-18, 21-7 से हराकर अपना तीसरा अंतरराष्ट्रीय खिताब जीता। लक्ष्य ही नहीं उनके बड़े भाई चिराग सेन भी प्रकाश के लड़ैते हैं। दोनों भाई उनकी एकेडमी में प्रशिक्षणरत हैं। तीन साल बड़े चिराग ने आज चीन में एशियाई यूथ बैडमिंटन में कांस्य पदक जीता। प्रकाश की नजर इन दोनों पर डेढ़ साल पूर्व नेशनल यूथ चैंपियनशिप के दौरान पड़ी। यहीं से उन्होंने दोनों को अपने पास बुलाया। दोनों को यह खेल विरासत में मिला है। उनके दादा सीएल सेन यूपी के जाने माने खिलाड़ी रहे हैं, जबकि पिता डीके सेन भारतीय जूनियर टीम के कोच होने के साथ अल्मोड़ा में साई कोच हैं।
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