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पिता की बंदूक संभाली जूनियर राज्यवर्धन ने

नई दिल्ली/हेमंत रस्तोगी।
Story Update : Thursday, February 09, 2012    12:38 AM
Rajyavardhan Jr took his fathers gun

बेटे का विरासत संभालना पिता के लिए गर्व की बात होती है। यही विरासत बेटा स्वेच्छा से अपने कंधों पर उठा ले तो पिता का सीना चौड़ा होना लाजिमी है। ठीक यही एथेंस ओलंपिक रजत पदक विजेता राज्यवर्धन राठौड़ के साथ हुआ है। महज 12 साल की उम्र में उनके बेटे मानवदित्य ने पिता की तरह कंधे पर बंदूक उठा ली है। यही नहीं ट्रैप में जूनियर नेशनल में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने भारतीय जूनियर टीम में स्थान बना लिया है।

इसके बाद वह उसे रेंज पर लाए
राज्यवर्धन बेटे माइलो (प्यार का नाम) के बंदूक संभालने पर हैरान हैं। उनके मुताबकि न उन्होंने और न ही उसकी मां ने शूटिंग के लिए उस पर दबाव डाला। घर पर टंगी बंदूकों ने उसे इसके प्रति आकर्षित किया। वह आठ साल का था तो उन्होंने उसे एयरराइफल दी। उसने इसे लेने से इंकार कर दिया। माइलो का कहना था कि उसे पापा की बंदूक चाहिए है। इसके बाद वह उसे रेंज पर लाए। उन्होंने बेटे को सहारा देकर बंदूक पकड़ाई। उसने सही ढंग से फायर किया। फिर उन्होंने उसे पीछे से पकड़कर निशाना लगाने को कहा। यहां भी वह सफल रहा। इसके बाद उसने खुद निशाना लगाने की जिद की। उन्होंने कहा कि अगर वह निशाना लगाएगा तो उसे कैमरे में कैद करेंगे। राठौड़ के मुताबिक बेटे ने निशाना लगाकर उन्हें आश्चर्य में डाल दिया। उसके इस पहले शूट की क्लीपिंग उन्होंने यू ट्यूब पर भी डाली है।

इस खेल का दबाव डालना ठीक नहीं
राज्यवर्धन मानते हैं उसमें नेचुरल टैलेंट है। साल में तीन या चार सप्ताह ही वह उसे ट्रेनिंग देते हैं। इसी को वह काफी मानता है। हालांकि बीते वर्ष उसने स्कीट में शुरूआत की थी। लेकिन इस साल वह ट्रैप में आया है। राठौड़ ने शूटिंग 28 साल में शुरू की थी। तब उनके लिए यह खेल नहीं था। लेकिन माइलो ने इसे बतौर खेल लिया है। राठौड़ खुलासा करते हैं कि जब उन्होंने अभिनव बिंद्रा को बताया कि बेटा शूटिंग कर रहा है। तो उन्होंने कहा कि कहां उसे शूटिंग में ला रहे हो। उस पर इस खेल का दबाव डालना ठीक नहीं होगा। लेकिन बेटा इसे अपनाकर खुश है। वहीं सातवीं के छात्र मानवदित्य का कहना है कि उन्हें शूटिंग में मजा आता है। इसीलिए वह इसे करते हैं। माइलो अपने स्कूल की तैराकी व बतौर गोलकीपर फुटबाल टीम में भी हैं। राज्यवर्धन का कहना है कि जिस तरह से उसने शुरूआत की है। आगे उनकी तरह रास्ता भी निकाल लेगा।


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