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रोकी जा सकती है नींद में समय की बर्बादी

Rakesh Jha

Rakesh Jha

Updated Mon, 30 Jul 2012 01:18 PM IST
sleep time can be productive
दस बारह घंटे लगातार काम करने के बाद अक्सर छह-सात घंटे की नींदं जरूरी होती है। नहीं सोएं तो दो-तीन बाद बीमार पड़ने की आशंका हो जाती है। लेकिन योग ने कहा और अब विज्ञान ने भी कहा कि पंद्रह से चालीस मिनट की एक गहरी नींद आयोजित कर ली जाए तो आठ दस घंटे बचाए जा सकते हैं और ताजगी गहरे विश्रान जैसी।
योग ने इस विधि से मिले विश्राम को योगनिद्रा कहा है। योगदर्शन के अब तक के सबसे लोकप्रिय और सर्वांगपूर्ण भाष्य स्वामी ओमानंद तीर्थ का कहना है कि अभ्यास कायदे से किया जाए तो दिन में बाईस-तेईस घंटे काम किया जा सकता है।

योगनिद्रा पर काम कर रहे रूस के फिजिओलाजिस्ट एंकतिया चोस्की ने कहा है कि सचमुच बिना सोए काम करते रहा जा सकता है। महाभारत में अर्जुन के निद्राजित कहे जाने का सच जानने और योग का अध्ययन करते समय उन्होंने नींद की जरूरत पर खोज और प्रयोग शुरु किए। उन्होंने पाया कि नींद के समय व्यक्ति शरीर एवं श्वास के प्रति अचेत रहता है। इससे वह ताजगी और विश्राम महसूस करता है।

स्वामी ओमानंद तीर्थ के प्रतिपादन की पुष्टि करते हुए उन्होंने शरीर के कुछ केंद्रों का जिक्र किया जो पेडू, नाभि, पसलियों केबीच, कंठ में और दोनों आंखों केबीच ऐसे केंद्र हैं जहां से शिराओं और तंतुओं तक तरंगें दौड़ती है। इन तरंगों को बिजली भी कहा जा सकता है।

योग की भाषा में इन केंद्रों को चक्र कहते हैं। स्वामी ओमानंद के अनुसार नींद के आवेग से ग्रस्त व्यक्ति सोते समय अचेतन रूप से देहात्म बोध से मुक्त हो जाता है। इस दौरान मस्तिष्क के मुख्य भाग तथा मेरुदंड के छह चक्रों के शक्ति केंद्रों में बहती धाराएं सक्रिय होती है।

इस स्थिति में आने में चार से छह घंटे लग जाते हैं और सिर्फ चालीस मिनट ही ऐसी स्थिति रहती है जो विश्राम देती है। अगर योगनिद्रा का अभ्यास किया जाए तो चालीस मिनट की वह स्थिति  बिना समय गंवाए हासिल की जा सकती है।

योगनिद्रा में प्रवेश की तकनीक पहले से उपलब्ध है। चोस्की का कहना है कि उसे नया किया जाना चाहिए क्योंकि पिछले दो सौ साल में मनुष्य के भीतर कई जटिलताएं उत्पन्न हुई है। योगनिद्रा पर उस बदलाव के अनुसार काम हो तो अच्छा।
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