आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

जिससे प्रेम करो उसके प्रति समर्पित हो जाओः मोरारी बापू

नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।

Updated Wed, 31 Oct 2012 01:56 PM IST
morari bapu pravachan devotion in love make love successful
जब तक विकार है, विश्राम संभव ही नहीं। अविकार की भूमिका विश्राम का स्वरूप या कहें कि विश्राम की पहचान है। प्रेम ही इस भवसागर से पार उतारने वाला एकमात्र उपाय है। प्रेमी बैरागी होता है, जिससे आप प्रेम करते हैं, उस पर न्यौछावर हो जाते हैं। त्याग और वैराग्य सिखाना नहीं पड़ता। प्रेम की उपलब्धि ही वैराग्य है। जिन लोगों ने प्रेम किया है, उन्हें वैराग्य लाना नहीं पड़ा।
जिन लोगों ने केवल ज्ञान की चर्चा की, उनको वैराग्य ग्रहण करना पड़ा, त्यागी होना पड़ा, वैराग्य के सोपान चढ़ने पड़े। कभी गिरे, कभी चढ़े लेकिन पहुंच गए। जैसे जब कृष्ण ब्रज से गए तो क्या ब्रजांगनाएं घर छोड़कर चली गईं। क्या गोप भागे? नहीं, वे सब वहीं रहे। वही गायें, वही बछड़े, वही गोशालाएं, वही खेत, वही घर, सब वहीं थे लेकिन वे सभी परम वैराग्य को उपलब्ध हो गए। प्रेम में वैराग्य निर्माण करने की शक्ति है।

भक्ति का अर्थ है जिसको तुम प्रेम करते हो उसके इच्छानुकूल रहो, यही भक्ति है। अपना सब कुछ भूल कर सिर्फ साध्य के लिए ही समर्पित होना भक्ति है। सच्ची भक्ति व्यक्ति और ईश्वर को इस तरह एक दूसरे में समाहित कर देती है कि आपमें ईश्वर की छाया दिखाई देने लगती है। ये भक्ति का ही असर था कि मीरा ने हंसते-हंसते सब कुछ सह लिया। सच्चा भक्त ईश्वर में सबको और सबमें ईश्वर को देखता है।

प्रभु भक्ति करनी हो तो मीरा की तरह करो या प्रभु से प्रेम करना हो तो ब्रज गोपिका की तरह करो। मीरा की ईश्वर भक्ति सबसे श्रेष्ठ है। उस काल के भक्त कवियों नरसिंह मेहता, ज्ञानदेव, नामदेव, कबीर, तुलसी व मीरा में संवादों का आदान-प्रदान होता रहता था। राजस्थान को रंग रंगीले राजस्थान की संज्ञा सर्वप्रथम मीराबाई ने ही दी थी। किसी भी भक्त के लिए मीरा के भजन बहुत महत्वपूर्ण हो सकते हैं। भक्ति में गायन का अपना अलग मनोविज्ञान है। यदि गम में भी मीरा के भक्ति गीत गाये जाए तो दर्द कम हो जाता है।

मोरारी बापू
इनका जन्म 25 सितम्बर 1946 को सौराष्ट्र के तलगारजा में एक वैष्णव परिवार में हुआ। 14 वर्ष की आयु में बापू ने पहली बार तलगारजा में एक महीने तक रामायण कथा का पाठ किया। विद्यार्थी जीवन में उनका मन अभ्यास में कम, रामकथा में अधिक रमने लगा था। राम कथाओं के दुर्लभ प्रसंगों को मार्मिक शैली में कहने की उनकी कला बहुत लोकप्रिय हुई।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

शाहरुख के करियर की 'कमजोर कड़ी' रहेंगी ये 10 फिल्में

  • शुक्रवार, 20 जनवरी 2017
  • +

कार का अच्छा माइलेज चाहिए तो पढ़ लें ये टिप्स

  • शुक्रवार, 20 जनवरी 2017
  • +

सर्दियों में भी हो जाते हैं पसीना-पसीना, ध्यान दें इन बातों पर

  • शुक्रवार, 20 जनवरी 2017
  • +

अब दिल्ली में यहां मिलेगा 10 रुपए में भरपेट भोजन

  • शुक्रवार, 20 जनवरी 2017
  • +

पूर्वजन्म के रहस्य से पर्दा उठाइये, जान‌िए जवाहर लाल नेहरु क्या थे पूर्वजन्म में

  • शुक्रवार, 20 जनवरी 2017
  • +

Most Read

इसे आजमाकर देख‌िए ज‌िंदगी में कभी दुख और तकलीफ से परेशान नहीं होंगे

mantra of happiness in life
  • गुरुवार, 8 सितंबर 2016
  • +

वनवास से लौटने के बाद भगवान श्री राम ने कैकई को समझाया यह गहरा रहस्य

anand ramayan story of ram
  • बुधवार, 20 जुलाई 2016
  • +

भारत के एक फकीर ने ऐसे स‌िकंदर का अभ‌िमान क‌िया चूर

moral story what happen when alexander came in india
  • गुरुवार, 8 सितंबर 2016
  • +

बंदर की करतूत पढ़कर खूब हंसेंगे और आप ताक-झांक करना बंद कर देंगे

positive story of panchtantra
  • बुधवार, 29 जून 2016
  • +

आप भी आजमाकर देख‌िए, आपका कोई भी काम तब नहीं रुकेगा

one tips for success in every work
  • सोमवार, 5 सितंबर 2016
  • +

ध्यान में डूबी लड़की कर आयी परलोक की सैर, फ‌िर जो हुआ जानकर आंखें खुली रह जाएगी

girl in deep meditation wellness story
  • शनिवार, 16 जुलाई 2016
  • +
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top