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वर्तमान में जीने की कला सिखाता है ध्यानः श्री श्री रवि शंकर

नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।

Updated Wed, 21 Nov 2012 02:17 PM IST
meditation teaches art of living in the present
क्या आप ने निरीक्षण किया है आप के मन में हर पल क्या चलता रहता है? ये भूतकाल और भविष्य के बीच में डोलता रहता है| ये या तो भूतकाल में जो बीत गया है उस में व्यस्त है और या तो भविष्य के बारे में अब क्या करना है ये सोचता रहता है|
ज्ञान मन के इस तथ्य से जागरूक होना है - इस बात से कि जब आप ये लेख पढ़ रहे हैं तब मन में क्या चल रहा है| जानकारी तो पुस्तकें पढने या इन्टरनेट को देख कर भी प्राप्त की जा सकती है| आप किसी भी विषय पर पुस्तक खोल सकते हैं जैसे वज़न कैसे कम किया जाए, इंटरव्यू के लिए कैसे तैयारी की जाए, सफलता के 101 तरीके इत्यादि| ऐसे कितने ही अनगिनत विषयों पर असंख्य खंड मिलते हैं, लेकिन मन की जागरूकता पुस्तक से नहीं सीखी जा सकती|

मन की एक और प्रकृति है - ये नकारात्मक विचारों से जकड़ा रहता है| यदि 10 सकारात्मक घटनाओं के बाद एक नकारात्मक घटना हो, तो मन नकारात्मकता को चिपकाए रखेगा। वह 10 सकारात्मक घटनाओं को भूल जाएगा| ध्यान द्वारा, आप मन की इन दोनों प्रकृतियों से सजग हो जाएंगे और उसे वर्तमान में ले आएंगे| ख़ुशी, आनंद, उत्साह, कार्यक्षमता ये सब वर्तमान में हैं|

मानव मन बहुत जटिल है| इसके नाज़ुक और कठोर दो पहलु हैं| यदि किसी मित्र या ऑफिस के सहकर्मी के साथ आपकी कोई गलतफहमी हो गई है तो आप भीतर से कठोर हो जाते हैं और ये आपकी भावनाओं को विकृत करके आपको नकारात्मक बना देता है और आप जहां जाते हैं, इस नकारात्मकता को साथ लेकर चलते हैं|

जब आप ध्यान द्वारा मन को उन्नत करते हैं तो मन की नकारात्मकता को पकड़े रखने की प्रवृति अदृश्य हो जाती है| आप वर्तमान क्षण में जीने की योग्यता और क्षमता प्राप्त कर लेते हैं। भूतकाल को छोड़ने में सक्षम हो जाते हैं|

श्री श्री रविशंकर परिचय
मानवीय मूल्य्वादी, शांतीदूत और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर, का जन्म 13 मई 1956 को तमिलनाडु के पापानासम में हुआ था। इनके पिता आरएसवी रत्नम ने इनकी आध्यात्मिक रुचि को देखते हुए इन्हें महर्षि महेश योगी के सान्निध्य में भेज दिया। महर्षि के अनेकों शिष्यों में से रवि उनके सबसे प्रिय थे। 1982 में रवि शंकर दस दिन के मौन में चले गए। कुछ लोगों का मानना है कि इस दौरान वे परम ज्ञाता हो गए और उन्होंने सुदर्शन क्रिया (श्वास लेने की तकनीक) की खोज की।

स्रोतः आर्ट ऑफ लिविंग



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