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आस्था है तो मूर्ति में भी दिखेंगे भगवान

राकेश/इंटरनेट डेस्क।

Updated Thu, 20 Dec 2012 10:16 AM IST
god appear in statue
आपके घर में भगवान की बहुत सी तस्वीर लगी होगी। पूजा घर में देवी-देवताओं की कुछ मूर्तियां भी हो सकती हैं लेकिन कभी आपने महसूस किया है कि मूर्तियां और तस्वीर जीवित हो उठी हैं अर्थात वह जड़ अवस्था को छोड़कर चेतन जान पड़ने लगे हैं। हो सकता है कुछ ने ऐसा महसूस किया हो।
अगर आपने महसूस किया है तो यह समझ लीजिए कि जिस घड़ी आपने ईश्वर को चेतन जाना उस समय वास्तव में ईश्वर उस मूर्ति में वर्तमान थे। जब आपने उन्हें मात्र मूर्ति मानकर पूजा किया तो वह मात्र मूर्ति बने रहे। बहुत से लोग यह कहते हैं कि हमने भगवान की मूर्ति को लड्डू का भोग लगाया, सुबह-शाम धूप-दीप दिखाया लेकिन ईश्वर ने मेरे लिये किया क्या। वास्तव में यह ईश्वर की गलती नहीं है कि आपकी पूजा का फल आपको नहीं मिला।

इस संदर्भ में एक कथा है कि एक व्यक्ति हर दिन सुबह शाम गणेश जी की पूजा करता है। धूप-दीप दिखाता। लेकिन कई वर्षों तक पूजा करने के बाद भी उसे जब कुछ लाभ नहीं दिखा तो गणेश जी से नाराज हो गया। इस व्यक्ति ने गणेश जी की पूजा बंद करके लक्ष्मी माता की पूजा शुरू कर दी। इसने देखा कि जो धूप दीप वह लक्ष्मी मां को दिखा रहा है उसका धुआं गणेश जी के पास भी जा रहा है। वह झट से रूई लेकर आया और गणेश जी नाक में लगा दिया, ताकि गणेश जी को धूप-दीप का गंध भी नहीं मिले।

गणेश जी की मूर्ति जड़ से चेतन अवस्था में आकर हंसने लगी। व्यक्ति बड़ा हैरान हुआ कि, आखिर जब तक मैं धूप-दीप दिखाकर गणेश जी की पूजा करता रहा तब तो गणेश जी नहीं आये, लेकिन आज जब मैंने उनकी नाक रूई से बंद कर दी तो गणेश जी भला कैसे मूर्ति में प्रकट हो गये।

गणेश जी अपने भक्त के मन की बात समझ गये और बोले जब तक तुम मुझे जड़ मानते रहे अर्थात मिट्टी की मूर्ति मानकर पूजते रहे तब तक मैं जड़ बना रहा। आज तुमने मेरी नाक में रूई लगाया ताकि मैं धूप-दीप का गंध न प्राप्त कर सकूं इसका मतलब है कि तुमने आज मुझे चेतन अर्थात जीवित मान लिया है, बस यही कारण है कि मैं तुम्हारे सामने जीवित उपस्थित हूं।

यानी ईश्वर की मूर्ति में चावल लेकर संस्कृत के कुछ मंत्र बोलकर मूर्ति पर चावल फेंकने से ईश्वर की मूर्ति में प्राण का संचार नहीं होता है। मूर्ति में प्राण का संचार हमारी आस्था से होता है। अगर बाजार से मूर्ति खरीदकर ले आयें और पूर्ण आस्था से मूर्ति को साक्षात मानकर उनकी पूजा करने लगें तो मूर्ति में भी ईश्वर के दर्शन हो सकते हैं। मूर्ति पर मंत्र द्वारा चावल फेंककर प्राण प्रतिष्ठा का तात्पर्य भी यही है कि व्यक्ति में यह विश्वास उत्पन्न हो कि मूर्ति में भगवान प्रवेश कर चुके हैं।
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