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नवरात्र में कन्या भोजन से जुड़ी जरूरी बातें

राकेश/इंटरनेट डेस्क

Updated Thu, 18 Oct 2012 04:55 PM IST
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नवरात्र में कन्याओं को भोजन करने से मां प्रसन्न होती हैं। इसलिए मां के भक्त श्रद्धापूर्वक कुंवारी कन्याओं को अपने घर निमंत्रण देकर बुलाते हैं और उन्हें हलवा पूरी, खीर, मिठाई खिलाते हैं। कन्याओं को भोजन कराने के दौरान कुछ बातों का अवश्य ख्याल रखना चाहिए। तभी आपको उचित फल प्राप्त होगा। आइए जानें कौन सी हैं वो बातें जिनका ख्याल रखा जाना जरूरी है।
भोजन के लिए कम से कम दो कन्याएं
शास्त्रों में कहा गया है कि नौ कन्याओं को भोजन कराना उत्तम होता है। अगर नौ से अधिक कन्याएं उपलब्ध हों तो इसे सौभाग्य मानकर सहर्ष भोजन कराएं। जो लोग नौ कन्याओं को भोजन नहीं करा सकते हैं उन्हें कम से कम दो कन्याओं को जरूर भोजन करना चाहिए। एक से अधिक जितनी कन्या होगी कन्या भोजन का फल उतना शुभ माना जाता है। जो लोग एक कन्या को भोजन करवाते हैं उन्हें संपूर्ण नवरात्र के दौरान हर दिन एक कन्या को भोजन कराना चाहिए और अंतिम दिन वस्त्र, धन, फल, मिठाई देकर माता से आशीर्वाद लेना चाहिए।

उम्र के अनुसार देवी तक पहुंचेगा अंश
दुर्गा शप्तशती में कन्या भोजन के लिए दो वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कन्याओं को भोजन करने की बात कही गयी है। दुर्गा सप्तशती के अनुसार दो वर्ष की कन्या कुमारी होती, तीन वर्ष की कन्या त्रिमूर्ति, चार वर्ष की कल्याणी, पांच वर्ष की रोहिणी, छह वर्ष की कालिका, सात वर्ष की चंडिका, आठ वर्ष की कन्या शाम्भवी, नौ वर्ष की दुर्गा और दस वर्ष की कन्या सुभद्रा होती है। आप जिस उम्र की कन्या को भोजन करावाते हैं उससे सम्बन्धित देवी तक कन्या के माध्यम से उनका अंश पहुंच जाता है।

किसी भी कन्या का निरादर न करें
भोजन कराने के साथ यह आवश्यक है कि आपके जरिए किसी भी कन्या का निरादर न हो। दस वर्ष तक की कन्या में मां का अंश मौजूद रहता और वह मां की तरह ही शुद्ध और निश्छल होती हैं। जो भक्त श्रद्धा भाव से कन्याओं में उनका अंश मानकर भोजन करवाता है उस भक्त पर सदा मां अनुकम्पा बनी रहती है। जो व्यक्ति कन्याओं का निरादर करते हैं उसके घर वे कभी नहीं जाती हैं और वह व्यक्ति मां के क्रोध का भागी बनता है। इसलिए कन्याओं को जात-पाँत का भेद भाव किये बिना भोजन करवाना चाहिए।
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