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धरती पर भी है भगवान विष्णु का एक निवास

Rakesh Jha

Rakesh Jha

Updated Sat, 04 Aug 2012 01:21 PM IST
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भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का निवास स्थान वैकुण्ठ माना जाता है। लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि इस धरती पर भी भगवान विष्णु का एक निवास स्थान है जिसे दूसरा वैकुण्ठ कहा जाता है। शास्त्रों का कहना है कि आदि काल से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी गर्मी के महीने में क्षीर सागर को छोड़कर धरती पर बने अपने वैकुण्ठ धाम में विराजते हैं। द्वापर आने तक इस स्थान पर लोगों को साक्षात विष्णु भगवान के दर्शन प्राप्त होते थे। लेकिन अब इस स्थान पर सिर्फ काले रंग की प्रतिमा के दर्शन होते हैं। माना जाता है कि इस स्थान पर जाकर विष्णु भगवान की प्रतिमा का दर्शन करना साक्षात दर्शन का फल देता है।
कहां है विष्णु का दूसरा वैकुण्ठ?
उत्तराखंड की धरती पर समुद्रतल से 3133 मीटर की ऊंचाई पर भगवान विष्णु का निवास बना हुआ है। इसे बद्रीनाथ धाम के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों में बद्रीनाथ के संबंध में जो कथा मिलती है उसके अनुसार कभी यहां बद्री यानी बेर का वन हुआ करता था। भगवान विष्णु एक बार लक्ष्मी माता से नाराज होकर इस वन में आकर तपस्या करने लगे। माता लक्ष्मी विष्णु की तलाश करते हुए बद्रीवन में पहुंची और विष्णु भगवान को मनाया। इसके बाद भगवान विष्णु ने कहा कि वैकुण्ठ में मेरे दर्शन का जो पुण्य है वही पुण्य बद्रीनाथ के दर्शन से प्राप्त होगा।    

बद्रीनाथ में भगवान विष्णु की मूर्ति पद्मासन मुद्रा में है, जो इस बात का प्रतीक है कि भगवान विष्णु ने यहां पर तपस्या की थी। भगवान विष्णु की इस मुद्रा के कारण बौद्ध धर्म को मानने वाले बद्रीनाथ को महात्मा बुद्ध मानते हैं। कहते हैं कि द्वापर आते ही भगवान शिला में परिवर्तित हो गये और कृष्ण के रूप में अवतार लिया। स्कंद पुराण के अनुसार सतयुग में यह स्थान मुक्तिप्रद कहा जाता था, त्रेता युग में इसे भोग सिद्धिदा कहा गया और द्वापर में इसे विशाल नाम दिया गया तथा कलयुग में इसे बद्रिकाश्रम कहा गया।

बद्रीनाथ की यात्रा
बद्रीनाथ धाम की यात्रा अप्रैल-मई से शुरू होती है और अक्तूबर-नवम्बर तक भगवान के दर्शन होते हैं। इसके बाद अत्यधिक बर्फ पड़ने के कारण मार्ग अवरुद्ध हो जाता है जिससे यात्रा बंद हो जाती है। ऐसी मान्यता है कि बद्रीनाथ का कपाट बंद होने के बाद शीत ऋतु में देवतागण भगवान की पूजा करते हैं। इसका प्रमाण मंदिर के अंदर जलती हुई अखंड ज्योति को माना जाता है।

जो लोग बद्रीनाथ की यात्रा पर जाने की सोच रहे हैं उनके लिए सलाह है कि अपने साथ गर्म कपड़े और खाने-पीने की जरूरी चीजें साथ में जरूर रख लें। ऐसा इसलिए क्योंकि मार्ग कभी भी अवरुद्ध हो जाता है उस समय यही सामान काम आता है।
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