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हिमाचल के भीतर कहां आए हैं उद्योग?

शिमला/ब्यूरो

Updated Sat, 20 Oct 2012 02:03 PM IST
where is industry in himachal
सस्ती, निर्बाध बिजली और कामगार हड़तालों से मुक्त वातावरण होने के बावजूद यदि हिमाचल में औद्योगिक विस्तार नहीं हो पाया तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? औद्योगिक पैकेज मिला और रद्द भी हो गया, लेकिन हिमाचल के भीतरी जिलों तक न उद्योग पहुंचे, न निवेश। 70 फीसदी हिमाचलियों को रोजगार का ऐलान भी कागजी ही रहा। दक्ष कामगारों के उपलब्ध न होने के नाम पर उद्योगों ने राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में गैर हिमाचलियों को नौकरियां बांटी।  
जो उद्योग यहां आ गए, उन्हें अब आधारभूत ढांचे की कमी खल रही है। रेल विस्तार न होने और सड़क नेटवर्क मजबूत न होने के कारण प्रदेश की सीमाओं पर ही औद्योगिक विकास सिमट गया है। बद्दी, बरोटीवाला नालागढ़, मैहतरपुर, कालाअंब और कांगड़ा के कुछ क्षेत्र को छोड़ दें तो अन्य स्थानों पर बने औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े उद्योगपतियों ने कोई रुचि नहीं दिखाई। 2010 में हिमाचल में औद्योगिक पैकेज की अवधि समय से पहले खत्म होने का नुकसान भी हिमाचल को उठाना पड़ रहा है।

इसके बाद के दो साल में प्रदेश सिंगल विंडो की बैठक में महज 26 प्रोजेक्टों को ही स्वीकृति दे सका। इन उद्योगों में 800 करोड़ रुपये का निवेश तो हुआ, लेकिन पैकेज से पहले की रफ्तार के मुकाबले न के बराबर है। 2003 में हिमाचल को विशेष औद्योगिक पैकेज मिलने के बाद राज्य में इस क्षेत्र में तेजी आई। 2003 से लेकर 2012 तक हिमाचल में 15 हजार 565 छोटे और बड़े उद्योग लगे। इसमें कुल 47 हजार 631 करोड़ रुपये का निवेश हुआ और पांच लाख 27 हजार बेरोजगारों को रोजगार का मौका भी मिला।

प्रदेश में सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में अभी तक रेल लाइन नहीं बन सकी है। इससे उद्योगपतियों को कच्चा माल लाने और अपने उत्पाद को बाहर भेजने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। पिंजौर नालागढ़ सड़क को फोरलेन करने का प्रस्ताव है, लेकिन कब तक यह योजना सिरे चढ़ती है, इस पर कोई सहमति सरकारों में नहीं बनी है। हिमाचल में औद्योगिक विस्तार प्रदेश की सीमाओं पर ही सिमट गया। पहाड़ी क्षेत्र तो दूर मैदानी इलाकों में भी इसका विस्तार वहीं हो सका, जहां प्रदेश की सीमाएं हैं।

पंजाब से लगती हुई सीमाओं पर हिमाचल का सबसे ज्यादा विस्तार मिला है। शिमला के शोघी, चौपाल, रामपुर, से लेकर अन्य स्थानों में पर उद्योग न के बराबर लगे हैं। विशेषज्ञ भी इसे साधनों की कमी ही मुख्य कारण बताते हैं। उनका तर्क है कि कच्चे माल की उपलब्धता न होने और रोड और रेल नेटवर्क की कमी का खामियाजा हिमाचल के औद्योगिक विस्तार को भुगतना पड़ा है।

रहने के हिसाब से सबसे महंगा औद्योगिक क्षेत्र
औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों और कामगारों को रहने की सबसे ज्यादा समस्या आती है। यहां किराए के मकान प्रदेश में सबसे महंगे मिलते हैं। पर्यावरण प्रदूषित होने के साथ भारी जनसंख्या के लिए मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं। इसके बावजूद यहां रोजगार की तलाश में पहुंचे युवाओं के अपनी कमाई का बीस से पच्चीस फीसदी रहने की व्यवस्था पर ही खर्च करना पड़ता है।

तकनीकी शिक्षा की ओर नहीं दिया ध्यान
हिमाचल में तकनीकी शिक्षण संस्थानों की होड़ पैकेज के बाद लगी, लेकिन इनका स्तर इतना बेहतर नहीं था कि हिमाचली युवा निजी क्षेत्र में अपने आप को साबित कर सकें। अधिकतर युवा आईटीआई और पालीटेक्निक से कोर्स करने के बावजूद पांच से सात हजार प्रतिमाह की नौकरी में लगे। प्रबंधन का हिस्सा बनने में हिमाचली युवाओं को काफी कम मौका ही मिला।

रेललाइन, फोर लेन के विस्तार की जरूरत : रावत
बद्दी बरोटीवाला और नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र के अध्यक्ष अरुण रावत ने बताया कि हिमाचल में औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार हुआ है। इसके लिए शुरू में ही प्लानिंग नहीं की गई। इसके बावजूद अभी तक काफी उद्योग हिमाचल में लगे हैं। इनके विस्तार के लिए रेललाइन बनाने और पिंजौर नालागढ़ सड़क को शीघ्र फोर लेन करने की काफी जरूरत है।

फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिटों को नहीं दी तरजीह
फल और सब्जी उत्पादक प्रदेश के नाम के प्रख्यात हिमाचल में फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिटों को किसी भी सरकार ने तरजीह नहीं दी है। सरकारी क्षेत्र में इसके आधा दर्जन यूनिट लगे हैं, लेकिन इनकी क्षमता और तकनीक अमूमन सवालों के घेरे में रही है। हालांकि, हिमाचल में यह औद्योगिक विस्तार के लिए बेहतर विकल्प हो सकता था। इसके बावजूद सेब और संतरे ,किन्नू और आम की फसलों को प्रोसेस कर रोजगार मुहैया करवाने की कोशिश नहीं की गई।

नहीं मिला 70 फीसदी रोजगार : कौल
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ठाकुर कौल सिंह कहते हैं कि भाजपा सरकार ने इस पांच वर्षों में औद्योगिक विकास के लिए कुछ नहीं किया। राज्य की औद्योगिक नीति में हिमाचलियों को 70 फीसदी रोजगार का प्रावधान था, लेकिन सरकार इसे लागू नहीं कर पाई। कौल सिंह ने कहा कि औद्योगिक पैकेज खत्म होने के बाद भी राज्य में उद्योगों का आना जारी रहा है। यहां 24 घंटे बिजली उपलब्ध है और कामगार हड़ताल नहीं होती। इसी खूबी के कारण औद्योगिक पैकेज रद्द होने का ज्यादा फर्क नहीं पड़ा है।

कांग्रेस बताए किसने छीना औद्योगिक पैकेज : कपूर
उद्योग मंत्री किशन कपूर का कहना है कि कांग्रेस नेता सबसे पहले यह बताएं कि वाजपेयी सरकार की ओर से हिमाचल को दिया गया औद्योगिक पैकेज किसने वापस लिया? यह पाप कांग्रेस की केंद्र सरकार ने किया है। तब हिमाचल से केंद्र में दो दो कैबिनेट मंत्री थे, लेकिन किसी ने इसका विरोध नहीं किया। इससे राज्य में औद्योगिक निवेश प्रभावित हुआ और हजारों युवाओं को रोजगार से वंचित रहना पड़ा। किशन कपूर ने कहा कि राज्य सरकार ने औद्योगिक इकाइयों में 70 फीसदी रोजगार सुनिश्चित किया गया।

किस वर्ष कितना हुआ औद्योगिक विस्तार

वर्ष            प्रोजेक्ट मंजूर         निवेश करोड़ों में           रोजगार
2003-04         15                     21.18                     384
2004-05         37                    365.21                    1735
2005-06         15                     277.04                   1158
2006-07         9                     181.3                      429
2007-08         3                     24.52                     126
2008-09         27                    951.02                    3437
2009-10         35                    506.07                    2758
कुल             141                    2317.7                    10027

कितने बड़े-कितने छोटे उद्योग

जिला              छोटे उद्योग          मध्यम उद्योग    
बिलासपुर              2320                  12
चंबा                  1784                   1
हमीरपुर               2818                   1
कांगड़ा                8984                  30
कुल्लू                 2540                   2
किन्नौर               580                    0
लाहौल-स्पीति           581                    0
मंडी                  3919                   1
शिमला               3469                   15
सोलन                5102                   681
सिरमौर               3525                   210
ऊना                 3375                   86
कुल                 38,707                 1039

पैकेज के बाद औद्योगिक विस्तार (अब तक)

मद                   संख्या               निवेश करोड़ों में          रोजगार
छोटे और मध्यम उद्योग       1039                 33370.83                 175341
इनका विस्तार              167                   3114.08                   12758
छोटे नए उद्योग             14,616                10913.36                  335589
छोटे उद्योगों का विस्तार       259                  233.36                    3543
कुल                      15,655                47631.84                 527231

पैकेज खत्म होने के बाद लगे उद्योग

वर्ष          प्रोजेक्ट             निवेश          रोजगार
2010-11         13                 562.20           1907
2011-12         13                 234.18            824
कुल            26                 796.38           2731 

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