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अब कसुम्पटी में ही जमा करवाइए बिजली बिल

Shimla

Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
शिमला। कसुम्पटी और मल्याणा के सात हजार लोगों को अब अपने बिजली के बिल जमा करवाने के लिए बिजली बोर्ड के खलीणी आफिस नहीं आना पड़ेगा। पहली सितंबर से दो नए सब डिवीजन कसुम्पटी और मल्याणा काम करना शुरू कर देंगे। करीब 22 हजार उपभोक्ताओं को डील कर रहे खलीणी सब डिवीजन के विभाजन की प्रक्रिया पूरी होते ही अधिकारियों और कर्मचारियों की शिफ्ंिटग की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
राजधानी में खलीणी सब डिवीजन के तहत सबसे अधिक 22 हजार से अधिक उपभोक्ता आते हैं। ऐसे में इस आफिस पर पड़े अतिरिक्त बोझ को कम करने तथा क्षेत्रवासियों की मांगों के चलते दो नए सब डिवीजन बनाने का विद्युत बोर्ड प्रबंधन ने फैसला लिया है। पहली सितंबर से कसुम्पटी और मल्याणा क्षेत्र को खलीणी सब डिवीजन से विभाजित कर दिया जाएगा। उक्त दोनों क्षेत्रों में खोले जा रहे आफिस को सब डिवीजन का दर्जा दिया गया है। कसुम्पटी और मल्याणा के लोगों को बिल जमा करवाने से लेकर अन्य छोटे-छोटे कामों के लिए अब खलीणी के चक्कर काटने के झंझट से भी निजात मिलेगी।
बिजली बोर्ड के अधीक्षण अभियंता राजेंद्र भास्कर का कहना है दो नए सब डिवीजन पहली सितंबर से काम करना शुरू कर देंगे। उक्त क्षेत्रों के लोगों के बिजली के बिल जमा करवाने को खलीणी नहीं आना पड़ेगा। घर के नजदीक लोगों को सुविधा प्राप्त होगी।

इनसेट...
कसुम्पटी सब डिवीजन
परिमहल, पंथाघाटी, कालोनी और कसुम्पटी बाजार को कसुम्पटी सब डिवीजन के तहत रखा गया है।

मल्याणा सब डिवीजन
मल्याणा आफिस के तहत मल्याणा के अलावा ढली सब डिवीजन के कुछ क्षेत्रों में शामिल किया गया है।

खलीणी सब डिवीजन
विभाजन होने के बावजूद खलीणी सब डिवीजन के तहत शहर का एक बड़ा हिस्सा रह गया है। खलीणी में टूटीकंडी, पांजडी, रिडका, घोड़ा चौकी, झंझीड़ी, न्यू शिमला, पटयोग, बीसीएस, लोअर खलीणी सहित विकासनगर, देवनगर और एसडीए कांप्लेक्स का क्षेत्र आता है।

कसुम्पटी के तहत होना चाहिए था विकासनगर
कसुम्पटी से सटे विकासनगर, देवनगर, आंजी और एसडीए कांप्लेक्स के उपभोक्ताओं को खलीणी सब डिवीजन के तहत ही रखा गया है, जबकि ये क्षेत्र कसुम्पटी आफिस के तहत शामिल होने चाहिए थे। छोटा शिमला के पार्षद सुरेंद्र चौहान का कहना है कि इस बाबत बोर्ड के अधिकारियों से बात की जाएगी। जब कसुम्पटी में आफिस खोला जा रहा है तो विकासनगर वालों को खलीणी के चक्कर काटने पर क्यों मजबूर किया जा रहा है।
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