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कारोबारियों को एक माह का अल्टीमेटम

Shimla

Updated Mon, 09 Jul 2012 12:00 PM IST
शिमला। शहर के खाद्य पदार्थ विक्रेताओं के पास फू ड सेफ्टी एवं स्टैंडर्ड एक्ट 2006 के तहत अनिवार्य किए गए लाइसेंस को बनवाने के लिए सिर्फ एक माह का समय शेष रह गया है। पांच अगस्त से कारोबारियों के लाइसेंस जांचने का काम शुरू होगा। बिना लाइसेंस खाद्य सामग्री बेचते धरे जाने पर कारोबार तो बंद होगा ही साथ ही छह माह तक जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है। यही नहीं चेकिंग करने वाले अधिकारी एक्ट के तहत ऐसे कारोबारी पर अधिकतम पांच लाख तक का जुर्माना भी लगा सकते हैं।
फू ड सेफ्टी एवं स्टैंडर्ड एक्ट 2006 को प्रदेश में पांच अगस्त 2011 को लागू किया गया था। एक्ट के मुताबिक लाइसेंस बनाने को दी गई समय सीमा भी इसी के साथ समाप्त हो जाएगी। इसके बाद एक्ट को लागू करने वाली अथारिटी चेकिंग अभियान शुरू कर देगी। नगर निगम शिमला के तहत खाद्य सामग्री का कारोबार कर रहे 80 फीसदी कारोबारियों ने लाइसेंस बना लिए हैं, मगर शेष बचे 20 फीसदी भी इन 26 दिनों में लाइसेंस बनवा लें। पांच अगस्त के बाद बिना लाइसेंस के खाद्य सामग्री बेचने वाले कारोबारी के कारोबार को गैर कानूनी माना जाएगा। एक्ट के तहत सभी ऐसे कारोबारियों को लाइसेंस बनवाना अनिवार्य है।

दो तरह के कारोबारियों को बनवाने होंगे लाइसेंस
नगर निगम आयुक्त शिमला डा. एमपी सूद ने बताया कि स्वंय बनाकर बेचने वाले कारोबारी की पंजीकरण को सौ रुपए की फीस देनी होगी। इनमें चाट, टिक्की , पकोड़े, गोल गप्पे , अस्थाई स्टा ल लगाने वाले ौर फल सब्जी विक्रेता और मेलों में खाद्य सामग्री बनाने वाले शामिल है। जिनकी बिक्री बारह लाख तक है को पंजीकरण अनिवार्य है, वहीं धार्मिक और सामाजिक कार्य में खाद्यान सप्लाई करने वालों को भी पंजीकरण करवाना होगा। उनको अपनी वार्षिक बिक्री का प्रमाण देना होगा।
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ढाबा रेस्टोरेंट व कैंटीन संचालकों को भी बनाना होगा लाईसेंस
नगर निगम क्षेत्र में खाद्य पदार्थ उपलब्ध करवाने वाले रेस्टोरेंट, बोर्डिंग हाउस, क्लब, भोजनालय, स्कूल कालेज कैंटीन बैंक्वेट हाल ढाबा, ढिब्बा वाला, होटल, आटा मिल्स, फल सब्जी विक्रेताओं को लाइसेंस बनवाना ही होगा। इनकी सालाना फीस 2000 से 7,500 तक है।
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खाद्य पदार्थ विक्रेताओं को देना होगा गौदामों का ब्यौरा
फूड बिक्री लाइसेंस बनाने और पंजीकरण करवाने वाले कारोबारी को अपने सभी स्टोरज व गोदाम व वितरण स्थानों और संसाधनों का लिखित में ब्यौरा देना होगा। यदि इनमें कोई बदलाव लाया जाता है, तो उसके बारे में भी विभाग को लिखित सूचना देनी होगी।
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