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श्रम कानूनों में बदलाव के प्रस्तावों से उद्योग नाराज

Ludhiana

Updated Mon, 17 Dec 2012 05:30 AM IST
लुधियाना। अपेक्स चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री ने सरकार से आग्रह किया है कि श्रम कानूनों को सख्त बनाने की बजाए लचीला किया जाए क्योंकि बदलते परिवेश में लचीले कानूनों की ज्यादा सार्थकता है। चैंबर मानता है कि वैश्विक बाजार की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए श्रम कानूनों में ढील मिलना अनिवार्य है अन्यथा इंडस्ट्री ओवरसीज बाजार से आउट हो जाएगी।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार श्रम कानूनों में बदलाव की योजना बना रही है। इसके तहत न्यूनतम वेजेज को मुद्रास्फीति केे साथ जोड़ा जा रहा है। इसके अलावा कर्मचारी भविष्य निधि फंड की भी न्यूनतम सीमा बढ़ा का 24 फीसदी की जा रही है। अपेक्स चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री ने इसका विरोध किया है। चैंबर के प्रधान पीडी शर्मा का तर्क है कि आर्थिक सुधारों के दौर में भविष्य निधि की सीमा को बढ़ाना उचित नहीं है। इससे मजदूर अपने घर कम वेतन ले जा पाएंगे। शर्मा का दावा है कि उद्यमी पहले से ही मजदूरों को महंगाई के हिसाब से ही वेतन अदा कर रहे हैं। न्यूनतम वेतन का राष्ट्रीय फ्लोर स्तर 115 रुपये प्रति दिन है, जबकि उद्यमी इससे कहीं अधिक अदा कर रहे हैं। यहां तक की भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट में भी यह साफ हुआ है कि औद्योगिक श्रमिकों में मुद्रास्फीति को लेकर कोई रोष नहीं है। शर्मा ने सरकार से आग्रह किया है कि औद्योगिक हित में श्रम कानूनों को सख्त नहीं बल्कि लचीला बनाया जाए।
चैंबर आफ इंडस्ट्रियल एंड कामर्शियल अंडरटेकिंग के महासचिव अवतार सिंह कहा कि श्रम कानूनों को इंडस्ट्री फ्रेंडली बनाना चाहिए।
इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के पूर्व रीजनल चेयरमैन एवं लुधियाना हैंड टूल्स एसोसिएशन के प्रधान एससी रल्हन का कहना है कि देश में श्रम कानून अब काफी पुराने हो गए हैं। आर्थिक उदारीकरण के दौर में इंडस्ट्री की जरूरतें भी काफी बदल रही हैं। इसलिए अब विदेशी तर्ज पर श्रम कानून बनाने की जरूरत है। इसके लिए सरकार कानूनों में बदलाव के पहले व्यापक स्टडी करे, इंडस्ट्री की राय ले और इसके बाद ही कानूनों को अंतिम रूप दिया जाए, ताकि इनके साथ औद्योगिक ग्रोथ को बढ़ावा दिया जा सके और उद्योग का भी भला हो सके।
नार्दर्न इंडिया चैंबर आफ इंडस्ट्रीज एंड कामर्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अरविंद राय ने भी श्रम कानूनों में बदलाव का समर्थन किया, लेकिन यह इंडस्ट्री की आवश्यकताओं में ध्यान में रख कर किया जावा चाहिए।
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