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अरे लुधियाना में कहां से आए सितार सुनने वाले

Ludhiana

Updated Thu, 13 Dec 2012 05:30 AM IST
लुधियाना। करीब एक डेढ़ साल पहले लुधियाना सांस्कृतिक समागम की टीम ने महासचिव और हीरो साइकिल लिमिटेड के एमडी एसके राय के नेतृत्व में नई दिल्ली में पंडित जी को जब एलएसएम के मंच पर लुधियाना में परफार्म करने का न्योता दिया, तो पंडित जी का जवाब था अरे, औद्योगिक शहर लुधियाना में सितार सुनने वाले कहां से आ गए। भारतीय कला, संस्कृति, थिएटर और संगीत को लुधियानवियों के दिलों तक पहुंचाने वाले एलएसएस के मंच पर आकर परफार्म करने की पंडित रविशंकर की हसरत अधूरी रह गई।
पंडित जी की इस बात पर एलएसएस की तरफ से एसके राय ने चाय की चुस्कियों के बीच उनको भरोसा दिलाया कि शहर में क्लासिकल सुनने वालों की कोई कमी नहीं है। शहर का गुरु नानक देव भवन क्लासिकल परफार्मेंस के दिन खचाखच भरा रहता है और यहां आकर पंडित जी को निराशा नहीं होगी। हालांकि पंडित जी ने अपने खराब स्वास्थ्य के करण इस न्यौते पर अमल नहीं कर सके । बुधवार को सितार के इस जादूगर के दुनिया से चले जाने के बाद हर संगीत प्रेमी की आंख नम है, क्योंकि पंडित जी ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को पूरे विश्व में पहचान दिलाई।
बातचीत में एलएसएस महासचिव एसके राय ने कहा कि उन्होंने पंडित जी को खूब सुना है। उनके सितार वादन में एक अलग ही आनंद की अनुभूति होती थी। जब जार्ज हेरिसन जैसे लोग भारत में पंडित जी से सितार सीखने आए तब पता चला कि पंडित जी ने सितार को किन बुलंदियों पर पहुंचा दिया। जब उन्होंने यदूदी मेनन के साथ वायलिन और सितार की जुगलबंदी की तो सारी दुनिया देखती रह गई। उनके निधन से शास्त्रीय संगीत को एक बड़ा धक्का लगा है, उनकी कमी को कोई पूरा नहीं कर सकता।
पंजाब ललित कला अकादमी और स्पिक मैके के प्रधान रणजोध सिंह जब 14 साल के थे, तब जालंधर में चल रहे हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन में उन्होंने पंडित रविशंकर को देखा था और उनके सितार वादन को सुना था। उनके साथ तबले पर पंडित शमता प्रसाद ने साथ दिया था। 32 साल बाद भी रणजोध के मन में उनकी याद ताजा है। पंडित जी के निधन से दुखी रणजोध ने कहा कि आज सितार भी शांत हो गया। उन्होंने कहा कि सितार के साथ इस तरह से खेलने वाला जादूगर पंडितजी के समान कोई नहीं है। उनकी अंगुलियों पर सितार की तारें कठपुतली की तरह नाचती थीं। भारतीय शास्त्रीय संगीत को अमेरिका में स्थापित करने वाले पंडित जी ही थे। रणजोध ने कहा कि शास्त्रीय संगीत के इस महानायक को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
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