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पंजाबी सियासत में भारी पड़े तिवारी

Ludhiana

Updated Mon, 29 Oct 2012 12:00 PM IST
लुधियाना। जाहिर है कि अगले लोकसभा चुनाव से पहले इसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में विस्तार नहीं होना है, ऐसे में लुधियाना के सांसद मनीष तिवारी का मंत्री बनाना खासकर कांग्रेस की पंजाबी-सियासत में एक बड़ा उलटफेर है। साथ ही तिवारी के सियासी कैरियर में भी उनका केंद्रीय मंत्री महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा। सबसे अहम पहलू यह है कि तिवारी के मंत्री बनते ही कांग्रेस के युवा कार्यकर्ताओं में उनको अपना रोल-मॉडल बनाने की होड़ निचले स्तर तक देखने को मिल रही है।
उल्लेखनीय है कि आज हर खास आम कांग्रेसी और कांग्रेस हाईकमान के शुरूआती दौर से ही इस तथ्य से वाकिफ रहा है कि तिवारी जैसे तेजतर्रार युवा नेता को अगली कतार में रखकर खासतौर पर पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया जा सकता है। इसी रणनीति के तहत उनको पहले सियासी-चैनल छात्र-राजनीति के जरिए कांग्रेस टीम में शामिल करते ही तरजीह दी जाने लगी थी। कांग्रेस नेतृत्व ने जब उनको अपने छात्र-संगठन एनएसयूआई की कमान सौंपी थी तो तभी पंजाबी युवा वर्करों का एक बड़ा तबका खासकर पंजाब को प्रतिनिधित्व मिलने से खासा उत्साहित हुआ था। उसी राजनीतिक प्रयोग को आगे बढ़ाते हुए पार्टी नेतृत्व ने उनको युवा कांग्रेस की कमान संभालने का अवसर भी दिया। इस दूसरे कदम ने विशेष रूप से पार्टी को उस पंजाब के युवा-वर्ग की तरफ से पॉजिटिव-रिस्पांस दिया, जो काले दौर में कांग्रेस से विमुख हो रहा था।
पार्टी की दूरअंदेशी रणनीति तब और साफ हुई, जब तिवारी को लुधियाना सीट से लोकसभा चुनाव में पहली बार उम्मीदवार बनाया गया। भले ही पहली बार में वह जीते नहीं, लेकिन अगला चुनाव जीतकर उन्होंने पार्टी की रणनीति सही दिशा में जाने की तस्दीक कर दी।
दूसरी तरफ लोस चुनाव में उम्मीदवार बनाने से पहले ही कांग्रेस नेतृत्व ने तिवारी को युवा नेता के साथ ही परिपक्व राजनेता के तौर पर स्थापित करने की सियासी बिसात बिछाई। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और फिर राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता मनीष तिवारी की एक गंभीर राजनेता की छवि तेजी से उभरी। वह इस सफलता की सीढ़ी के पायदान चढ़ते हुए मीडिया के सहारे लगातार लोकप्रियता का आवरण चढ़ाते गए। पंजाब का प्रतिनिधित्व करते हुए वह केंद्रीय राजनीति के मंच से अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहचान बनाने में सफल रहे। अब भले ही उनको देरी से सही, लेकिन केंद्र में राज्य मंत्री बना स्वतंत्र प्रभार दिया गया है, वह राजनीतिक हलकों में सबको प्रभावित कर रहा है। खासकर कांग्रेस के अंदर जहां वरिष्ठ नेता तक उनकी सफलता को लेकर सोचने को मजबूर हो रहे हैं, वही युवा वर्ग गद्गद है। इसकी प्रतिक्रिया तत्काल प्रभाव से रविवार को निचले स्तर तक विशेष रूप में उसी पंजाब में देखने को मिली, जिसका प्रतिनिधित्व तिवारी केंद्र सरकार में भी करने के लिए तैयार हो गए हैं। मसलन, उनके संसदीय क्षेत्र लुधियाना में बेहद जोश में आए कांग्रेस के युवा कार्यकर्ता अपना संयम नहीं रख पाए। उन्होंने तिवारी के लुधियाना स्थित निवास के सामने उसी वक्त जाकर जश्न मनाना शुरू कर दिया, जब वह दिल्ली में शपथ ले रहे थे। पंजाब की सियासी नब्ज को लंबे समय से समझने वाले कांग्रेसी मानते हैं कि इसका दूरगामी राजनीतिक लाभ होगा। कांग्रेस को अगले लोस चुनाव में खासकर लुधियाना और पंजाब के बाकी हिस्सों में युवा वर्करों का जबरदस्त नैतिक सहयोग मिलेगा।
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