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फेंसिंग में पदक पाने का सपना अभी अधूरा

Ludhiana

Updated Thu, 26 Jul 2012 12:00 PM IST
मुक्तसर। लंदन ओलंपिक 2012 में भारत के लिए फेंसिंग (तलवारबाजी) में पदक हासिल करने का सपना पूरा नहीं हो सकेगा। कारण यह है कि लंदन ओलंपिक में खेलने के लिए भारत की तरफ से फेंसिंग का कोई खिलाड़ी क्वालीफाई नहीं कर सका। भारतीय फेंसिंग खिलाड़ियों के लंदन ओलंपिक के लिए क्वालीफाई न कर पाने का कारण खिलाड़ियों का मापदंडों पर खरा न उतर पाना और जापान, चीन, कोरिया के खिलाड़ियों का भारतीय खिलाड़ियों के मुकाबले कही ज्यादा उम्दा प्रदर्शन है। भारतीय खिलाड़ियाें की मेहनत तभी रंग ला पाएगी जब उन्हें बेहतर कोचिंग हासिल होगी। मगर त्रासदी यह है कि भारत में इस खेल के नाममात्र ही कोचिंग सेंटर हैं। पंजाब में तो सिर्फ नेताजी सुभाष नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स पटियाला में ही फेंसिंग की कोचिंग दी जा रही है।
फेंसिंग एसोसिएशन इंडिया के चीफ कोच मोहित अश्वनी तथा एनआईएस पटियाला के कोच कृष्ण कुमार ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि यूरोप के हांगरी (बुद्धा पीस्ठ) तथा चीन से डिप्लोमा तथा फे ंसिंग कोचिंग कोर्स करने के बाद वह एनआईएस में खिलाड़ियों को फे ंसिग कोचिंग दे रहे हैं। पंजाब में इस खेल के करीब छह-सात सौ खिलाड़ी हैं। कृष्ण कुमार के अनुसार पूरे देश में ही इस खेल कोचिंग देने के लिए सिर्फ चार इंस्टीट्यूट हैं जो पटियाला, गुवाहाटी, केरल तथा मणिपुर में स्थित हैं।
उन्होंने बताया कि पटियाला की फेंसिंग खिलाड़ी जैसमीन गत अप्रैल माह में जापान में ओलंपिक क्वालीफाई करने गई थी। 21 तथा 22 अप्रैल को क्वालीफाई करने के लिए आयोजित मुकाबले में वह पांचवें स्थान पर रही थी। जबकि पहले दो स्थानों पर आने वाले अन्य देशों के खिलाड़ी क्वालीफाई हो गए थे।

-- यूं हुआ फेंसिंग का जन्म --
तलवारबाजी यूं तो भारतीय खेल ही है। पुराने समय में राजा-महाराजा तथा ऋषि-मुनि तलवारबाजी का शौक पाला करते थे। मगर इसे फेंसिंग का रूप फ्रांस ने दिया है। इसकेे बाद तलवारबाजी न्यू फेंसिंग के रूप में दोबारा उभरकर भारत में आई। बताया जाता है कि दिल्ली फेंसिंग एसोसिएशन के महासचिव एनयू सिद्धिकी तथा महाराष्ट्र फेंसिंग एसोसिएशन के महासचिव कड़ाऊ सन 1974 में तेहरान (ईरान) में हुई एशियन गेम्स में गए थे तो उन्होंने वहां फेंसिंग खेल को अच्छी तरह से जाना। इसके बाद से ही भारत में इस खेल का जन्म हुआ। 1989 में भारत सरकार ने जर्मनी से कोच मंगवा नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट में इस खेल की कोचिंग शुरू कर दी। मगर फिलहाल अब यह कोचिंग बंद पड़ी है।

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