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बिजली की दरों में वृद्धि से उबला उद्योग जगत

Ludhiana

Updated Tue, 17 Jul 2012 12:00 PM IST
लुधियाना। पंजाब में बिजली की दरों में 12-13 फीसदी की वृद्धि के बाद उद्योग व्यापार जगत में उबाल आ गया है। सरकार के इस फैसले के खिलाफ विभिन्न औद्योगिक एवं व्यापारिक संगठनों ने आंदोलन करने का मन बना लिया है। साथ ही उद्यमियों ने यह ऐलान भी कर दिया है कि किसी भी हाल में एक अप्रैल से बढ़ी हुई दरों के बकाए का भुगतान नहीं किया जाएगा। दूसरे उद्यमियों ने मांग की है कि बिजली की दरों में वृद्धि को तुरंत वापस लिया जाए, क्योंकि पावरकॉम के प्रबंधन को सुधार कर ही सारे घाटे को पूरा किया जा सकता है। सरकार के इस कदम को उद्यमियों ने एंटी इंडस्ट्री करार दिया है। इससे पंजाब से उद्योगों का पलायन और तेज हो जाएगा।
आल इंडस्ट्री एंड ट्रेड फोरम पंजाब के कनवीनर नरिंदर भमरा ने कहा कि मंदी की मार झेल रहे उद्योगों को कई राज्य सरकारें आर्थिक पैकेज दे रही हैं। वहीं पंजाब सरकार अपने खजाने भरने के लिए इंडस्ट्री पर बोझ बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि उद्योग व्यापार विरोधी इस फैसले के खिलाफ शीघ्र ही फोरम की बैठक बुलाई जा रही है।
उधर, फेडरेशन ऑफ जालंधर इंडस्ट्रियल एंड ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रधान गुरशरण सिंह के अलावा चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कामर्शियल अंडरटेकिंग्स, यूनाइटेड साइकिल एंड पार्ट्स मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन, लुधियाना हैंड टूल्स एसोसिएशन, निटवियर क्लब, फेडरेशन ऑफ टाइनी एंड स्माल इंडस्ट्रीज एसोसिएशंस और पंजाब प्रदेश व्यापार मंडल समेत कई औद्योगिक संगठनों ने साफ कर दिया है कि किसी भी हाल में अप्रैल से बिजली की बढ़ी दरों का भुगतान नहीं किया जाएगा। सरकार के इस फैसले के खिलाफ सभी संगठन एक प्लेटफार्म पर इकट्ठा होकर आंदोलन करेंगे। उद्यमियों का तर्क है कि एक तरफ तो सरकार उपभोक्ताओं को 24 घंटे निर्विघ्न बिजली की आपूर्ति करने में नाकाम साबित हो रही है। अब अपना घाटा पूरा करने के लिए दरों में भारी इजाफा कर दिया है।
यूनाइटेड साइकिल एंड पार्ट्स एसोसिएशन के प्रधान गुरमीत सिंह कुलार ने कहा कि इसके अलावा सरकार ने मिनिमम चार्जेज में भी चुपचाप इजाफा कर दिया है। अब मिनिमम चार्जेज 162 रुपये प्रति किलोवाट से बढ़ा कर 194 रुपये प्रति किलोवाट कर दिए गए हैं। इससे भी उद्योग जगत को करारा झटका लगा है।
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