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मेला ‘गदरी बाबेयां दां’ में श्रद्धा से उमड़े लोग

Jalandhar

Updated Tue, 30 Oct 2012 12:00 PM IST
जालंधर। शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मर मिटने वालों का यहीं बाकी निशा होगा। इस कथन को अमृतसर के गांव गुरुवाली (गिलवाली) के लोग हर साल सच साबित करते हैं। अंग्रेजी शासन के खिलाफ आवाज उठाने वाले शहीदों की याद में जालंधर में शुरू हुए मेले ‘गदरी बाबेयां दां’ में लोग श्रद्धा के साथ उमड़े हैं। गांव के लोगों ने अपने गांव के शहीदों की याद में विशाल लंगर लगाया।
पहले दिन हजारों लोगों ने लंगर छका। हर आने जाने वाले को शहीदों की जानकारी देने के लिए तस्वीरों के साथ-साथ उनके शहीदी दिन की जानकारी भी दी जा रही है। खास बात यह है कि गांव गुरुवाली के हर घर में शहीदों की कुर्बानी को आज भी याद किया जाता है। यहां के बड़े अपने छोटों को देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा देते हैं और युवा भी उनकी प्रेरणा पर अमल करते हैं।
गांव के सरपंच अवतार सिंह और सर्ब भारत नौजवान सभा के पूर्व राष्ट्रीय प्रधान पृथीपाल सिंह ने बताया कि गांव के लोग अपने शहीदों की याद में कुछ भी कर जाने का मादा रखते हैं। गांव के शहीदों ने शहीद करतार सिंह सराबा के साथ शहीदी दी थी। इसलिए लोग उन्हें आज भी याद करते हैं। जालंधर के देश भगत यादगार हाल में आयोजित मेला गदरी बाबेयां में लंगर लगाकर शहीदों की याद करने की योजना बनाई गई। मेले के पहले ही दिन हजारों लोगों ने लंगर ग्रहण किया।

1915 में लाहौर में दी थी फांसी
गदर पार्टी के इतिहास में चब्बे का डाका काफी मशहूर है। इस गांव में एक साहूकार बेली राम रहता था। वह अंग्रेजों के साथ मिलकर लोगों को लूटता था। गदर लहर के शहीद करतार सिंह सराबा के साथ गांव गिलवाली के गदरी भाई बख्शीश सिंह, भाई सुरैण सिंह बड़ा और भाई सुरैण सिंह छोटा ने साहूकार के घर डाका मारा। इस दौरान गदर पार्टी और अंग्रेजों के बीच कड़ा मुकाबला हुआ। इसमें गदर पार्टी के लोगों ने बम भी चलाया और साहूकार के घर से सोना, चांदी और नगदी सहित अन्य सामान पर कब्जा जमा लिया। अंग्रेज सरकार ने शहीद करतार सिंह सराबा के साथ-साथ गांव गिलवाली के गदरी भाई बख्शीश सिंह, भाई सुरैण सिंह बड़ा और भाई सुरैण सिंह छोटा को हिरासत में ले लिया। 16 नवंबर 1915 में लाहौर में इन सभी को फांसी दे दी गई। इसी तरह बाबा वसावा सिंह को भी गदर लहर में शामिल होने के लिए उम्र कैद, काले पानी और जायदाद जब्त करने की सजा सुनाई थी।
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